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कॉरपोरेट पर टैक्स बढ़ा और काले धन को जब्त कर हो रोजगार सृजन – अखिलेन्द्र

सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरो सदस्य वृंदा करात ने आकर दिया समर्थन
रोजगार को मौलिक अधिकार बनाने के लिये बुकलेट जारी
अखिलेन्द्र के उपवास का छठा दिन, स्वास्थ्य में गिरावट जारी  
नई दिल्ली, 12 फरवरी 2014, केजी बेसिन, टू जी और कोयले से लेकर देश में हुये तमाम महाघोटालों से यह साफ है कि यदि देश के प्राकृतिक संसाधनों और सरकारी खजाने की कॉरपोरेट घरानों द्वारा की जा रही अंधाधुध लूट पर रोक लगा दी जाये, कॉरपोरेट घरानों के अकूत मुनाफे पर टैक्स बढ़ाकर उसकी वसूली की जाये और काले धन को जब्त किया जाये तो सभी को रोजगार देने दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। आज वक्त की माँग है कि सरकार को संविधान में रोजगार के अधिकार को नीति निर्देशक तत्व के बजाये मूल अधिकार में शामिल करें। यह युवाओं की जिदंगी के लिये तो जरूरी है ही साथ ही यह राष्ट्र के निर्माण और विकास की भी अनिवार्य शर्त है।
यह बातें आज जंतर-मंतर पर उपवास के छठवें दिन रोजगार के अधिकार के लिये निकाली गयी बुकलेट को जारी करते हुये आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहीं। अखिलेन्द्र के स्वास्थ्य में लगातार गिरावट जारी है उनका पल्स रेट सामान्य से ज्यादा है, वजन घट रहा है और पेशाब में कीटोन आ रहा है। अखिलेन्द्र के उपवास का समर्थन करने सीपीआई (एम) पोलित ब्यूरों सदस्य कॉमरेड वृंदा करात एडवा की अन्य राष्ट्रीय नेताओं के साथ उपवासस्थल पर आयी।
       इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंध के पूर्व अध्यक्ष लाल बहादुर सिंह द्वारा लिखित बुकलेट में आकंड़ों के साथ बताया गया कि देश में आज बेरोजगारी की दर 9.4 फीसदी है, जो यूरोप को छोड़कर पूरी दुनिया में सर्वाधिक है। आज हमारे देश में 35.5 फीसदी युवा स्नातक बेरोजगार है, देश में हर साल पैदा होने वाले 4 लाख इंजीनियरों में 2 लाख बेरोजगार हो जाते है। बेरोजगारी की भयावहता का अंदाजा हाल ही में प्रकाशित रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिपोर्ट से लगाया जा सकता है, जिसके अनुसार अगले 7 साल में एक करोड़ 20 लाख लोग काम के अभाव में शहरों से कृषि क्षेत्र की ओर लौटने के लिये मजबूर हो जायेंगे। शहर से गांव की ओर उल्टे पलायन की यह अभूतपूर्व त्रासदी होगी। दरअसल खेती-बाड़ी, कल-कारखानों को विदेशी कम्पनियों और कॉरपोरेट घरानों के हवाले करने की रोजगारविहीन आर्थिक नीतियों को लागू करने के कारण देश में लगातार बेरोजगारी में इजाफा हुआ है। सबके लिये रोजगार का सृजन करना और योग्यतानुसार रोजगार के माध्यम से सबके लिये सम्मानजनक जीवन की गारंटी करना सरकारों की प्राथमिकता में नहीं रह गया है तथा नवउदारवादी नीतियों के दौर में तो हालात बद से बदतर होते गये हैं, जिसे वैश्विक संकट ने और गहरा ही किया है।
        असंगठित क्षेत्र जिसमें कुल रोजगार प्राप्त लोगों के 92-93 प्रतिशत लोग लगे हुये हैं, उसमें बौद्धिक व शारीरिक श्रम करने वाले माल्स, सर्विस सेन्टर, सेल्स एजेन्ट से लेकर मीडिया, शिक्षण संस्थाओं समेत सेवा क्षेत्र में कार्यरत कर्मी, राष्ट्रपति भवन, संसद से लेकर सार्वजनिक निजी उद्योग, सरकारी विभागों में लगे ठेका व दिहाड़ी मजदूर, आंगनबाड़ी, आशाबहुंए, शिक्षा मित्र, पंचायत मित्र, कानून मित्र, खनन, निर्माण मजदूर आदि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों की अनगिनत श्रेणियां पांच हजार के आस पास की मासिक आय पर बेहद अमानवीय और असुरक्षित सेवा शर्तो पर काम करने के लिये अभिशप्त है। नवउदारवादी भारत में रोजगार की गुणवत्ता में निरंतर गिरावट की यह भयावह तस्वीर है। बुकलेट में माँग की गयी कि सरकार को तमाम सेवा क्षेत्र में कार्यरत कर्मियों, ठेका-दिहाडी मजदूरों व स्कीम कर्मचारियों को नियमित करना चाहिए तथा उनके सम्मानजनक जीवन की गारंटी हेतु समुचित वेतनमान सुनिश्चित करना चाहिए।
       गौरतलब है कि कॉरपोरेट घरानों व एनजीओं को लोकपाल कानून के दायरे में लाने, रोजगार के अधिकार को नीति निर्देशक तत्व की जगह संविधान के मूल अधिकार में शामिल करने, साम्प्रदायिक हिंसा निरोधक बिल को संसद के इसी सत्र में पारित करने समेत आम नागरिक की जिदंगी के लिये महत्वपूर्ण सवालों पर आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट (आइपीएफ) के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह का दस दिवसीय उपवास जंतर-मंतर पर 7 फरवरी से जारी है। जिसे सीपीआई (एम) के महासचिव कॉमरेड प्रकाश करात, वयोवृद्ध कम्युनिस्ट नेता और सीपीआई के पूर्व महासचिव कॉमरेड ए0 बी0 वर्धन, सोशलिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष न्यायमूर्ति राजेन्द्र सच्चर समेत तमाम बुद्धिजीवियों, जनांदोलन के नेताओं व कार्यकत्र्ताओं ने समर्थन दिया है।

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