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क्षुब्ध मोदी सरकार ने शुरू की नेपाल में आर्थिक नाकाबंदी ?

नई दिल्ली। बिहार चुनाव और आरक्षण पर बहस की आड़ में भारत सरकार ने चुपके से नेपाल में आर्थिक नाकाबंदी लगा दी है। नेपाल के समाचार पोर्टल्स और चैनलों पर लगातार यह ख़बर चल रही है कि किस तरह भारत सरकार ने अपनी मर्जी का संविधान न बनने की खीझ में गाड़ियों को आज सुबह से ही सीमा पर रोकना शुरू कर दिया है और बिना किसी औपचारिक घोषणा के नेपाल में तेल की सप्‍लाई रोक दी है।

इससे ठीक पहले यानी कल नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोइराला के प्रेस सलाहकार प्रतीक प्रधान से सिर्फ इसलिए इस्‍तीफा ले लिया गया था क्‍योंकि एक अखबार में उनके लिखे लेख पर भारत के विदेश सचिव ने आपत्ति जता दी थी।

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नेपाली समाचार पोर्टल खबरडबली ने भारत को नाकाबन्दी सूरु, सूरक्षा को कारण देखाउँदै तेल ल्याउन दिइएन शीर्षक से तथा रातोपाटी ने सीमामा रोक्यो भारतले तेल बोकेका ट्याङ्कर शीर्षक से खबर प्रकाशित की है।

नेपाल की संप्रभुता और संविधान को लेकर भारत की सरकार इतनी बेचैन क्‍यों है, इसे विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर 20 सितंबर और 21 सितंबर यानी लगातार दो दिनों तक नेपाल की स्थिति पर जारी प्रेस विज्ञप्तियों की कठोर भाषा से समझा जा सकता है।

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नेपाल में भारत सरकार का दखल काफी तेजी से बढ़ रहा है। नाकेबंदी की इस खबर को अगर भारतीय मीडिया नहीं उठाता है, तब भी नेपाल की संप्रभुता से सरोकार रखने वाले तमाम पत्रकारों को इसे प्रसारित करना चाहिए।

नेपाल से वरिष्ठ पत्रकार नरेश ज्ञवाली ने कहा है – “भारतीय प्रधानमन्त्री मोदी के विशेष बुलावे पर भारत गए नेपाल स्थित भारतीय राजदूत रणजीत राय के मोदी को रिपोर्ट करने के बाद भारतीय विदेश मन्त्रालय से कड़ा प्रेस विज्ञप्ति सार्वजनिक हुआ है, जिसको नेपाल में भारत के हस्तक्षेप के नजर से देखा जा रहा है।”

सुविधा के लिए नेपाली वेबसाइट का लिंक। इस वेबसाइट पर लगातार निगाह बनाए रखें।

भारतको नाकाबन्दी सूरु, सूरक्षाको कारण देखाउँदै तेल ल्याउन दिइएन

अभिषेक श्रीवास्तव

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