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खुफिया एजेंसियों की संसद के प्रति जवाबदेही तय की जाये

राजनीतिक दलों के समक्ष अपने मुद्दे रखने के लिये रिहाई मंच आज से करेगा मंथन- मो0 शुऐब
लखनऊ 19 जनवरी 2014। आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर अपने विभिन्न मुद्दों को लेकर देश की सभी राजनीतिक दलों से उन पर उनकी स्थिति स्पष्ट करने के लिये रिहाई मंच के लाटूश रोड स्थित कार्यालय पर आज से तीन दिवसीय बैठक का आयोजन किया गया है।

रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा है कि जिस तरह देश में लगातार मुस्लिम समाज के लोगों पर देश की सुरक्षा व खुफिया एजेंसियां आतंकवाद का आरोप लगाकर पूरे मुस्लिम समाज को आतंकित कर देती हैं, जिसके चलते मुस्लिम समाज दोयम दर्जे के स्थित में पहुंच चुका है ऐसे में अगर इस मसले पर अपनी स्थिति स्पष्ट किए बिना राजनीतिक पार्टियां चुनाव में उतरती हैं तो किसी पार्टी की सरकार भले बन जाये, देश के सबसे बड़े अल्पसंख्यक समाज की स्थिति में कोई सकारात्मक तब्दीली नहीं आनी है। लिहाजा लोकतंत्र को बचाने के लिये जरूरी है कि लोकतांत्रिक मूल्यों जिसमें सभी नागरिक अपने को बराबर का शहरी महसूस करें ऐसा सियासी माहौल बनाया जाये। इसलिये जरूरी है कि राजनीतिक दल सांप्रदायिक मानसिकता व पूर्वाग्रह के तहत आतंकवाद के नाम पर पकड़े जाने वाले मुस्लिम समाज के लोगों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करें कि क्या वो सभी लोगों के समानता के सिद्धान्त के अनुरुप लोकतंत्र चाहते हैं या समाज के बड़े हिस्से में अविश्वास और असंतोष को कायम रखते हुये सिर्फ चुनाव कराने को लोकतंत्र समझते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के तमाम लोकतांत्रिक देशों में खुफिया एजेंसियों को संसद के प्रति जवाबदेह बनाया गया है, लेकिन बड़े ही शर्म की बात है कि अपने को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहने वाले देश में खुफिया एजेंसियां लगातार सवालों में घिरे होने के बावजूद संसद के प्रति जवाबदेह नहीं हैं और चुनी गयी सरकार के समानांतर बिना जवाहदेह हुये एक अराजक और अमरीका-इजराइल जैसे देशों के हितों के आक्रामक रक्षक संगठन की तरह काम करने लगी हैं जो इस देश की संप्रभुता व स्वायत्ता को चुनौती देने जैसा है। लिहाजा रिहाई मंच मानता है कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिये जरूरी है कि खुफिया एजेंसियों की जनता के सर्वोच्च सदन संसद के प्रति जवाबदेही तय की जाये और इस पर राजनीतिक पार्टियां अपनी स्थिति स्पष्ट करें।

रिहाई मंच की आज शाम 5 बजे से 21 जनवरी तक होने वाली इस बैठक में आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों की रिहाई, सांप्रदायिक आधार पर उन्हें फंसाने वाले पुलिस, सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों के खिलाफ कार्यवाई, खुफिया एजेंसियों की संसद के प्रति जवाब देही, देश में घटित आतंकवाद की घटनाओं की अग्रिम विवेचना, आतंकवाद के आरोप से बरी किये हुये लोगों को पुर्नर्वास व मुआवजे के लिये कानून बनाने, उन्हें फंसाने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्यवाई करने को अनिवार्य बनाने वाला कानून बनाने, आतंकवाद के मामलों की सुनवाई के लिये विशेष अदलतों का गठन व सुनवाई जेल से बाहर करने व किसी भी सूरत में साल भर के अंदर फैसला सुनाने की व्यवस्था की जाये और ऐसा कर पाने में विफल होने पर इसे आरोपी के जमानत पाने का आधार बनाने का प्रावधान बनाया जाये, आरडी निमेष रिपोर्ट पर अमल, मुजफ्फरनगर, फैजाबाद, बरेली, कोसी कलां समेत देश के विभिन्न राज्यों में हुई सांप्रदायिक हिंसा की वारदातों की सीबीआई से जांच कराने जैसे मुद्दों पर बैठक में चर्चा होगी और प्रस्ताव पारित होंगे।

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