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खुर्शीद हत्याकांड- हत्या तो पहले ही तय हो चुकी थी (!)

तीन महीने लंबा चलने वाला कत्ल

फुसफुसाहटों से न्याय नहीं पाया जा सकता न

नई दिल्ली। यह बड़े-बड़े क्रांतिकारी चेहरों पर पड़े हुए नकाब नोंचे जाने का वक्त है। अजब इत्तेफाक है, फासिस्ट ताकतें तो मौत पर नाचा ही करती हैं, उनकी प्यास तो मानव रक्त से ही बुझती है, लेकिन मौत पर नाच करने वालों को कुछ तथाकथित गम्भीर किस्म के लोगों का भी साथ मिल रहा है।

खुर्शीद अनवर की हत्या कोई सीधा-सादा अपराध नहीं है बल्कि यह तीन महीने लंबा चलने वाला कत्ल है। भाड़े के हत्यारे भले ही खुर्शीद की हत्या करने में कामयाब रहे हों लेकिन कल 19 सितंबर को निगमबोध घाट पर “खुर्शीद तेरे सपनों को मंज़िल तक पहुँचाएंगे” के लगते गगनभेदी नारे बता रहे थे कि खुर्शीद ने मरते-मरते भी बहुत से चेहरों पर पड़े नकाब नोंच डाले और उनकी जलाई लौ आसानी से बुझने न पाएगी।

मानवाधिकार कार्यकर्ता समर अनार्या की फेसबुक वॉल पर अक्टूबर महीने के अंत में लंबी बहस चली थी। उस बहस में तथाकथित पीड़िता के पक्ष के कई लोगों ने भी भाग लिया था और उस बहस से लगभग तय हो गया था कि एक बड़ा षडयंत्र है। इस बहस में खुद खुर्शीद अनवर ने भी हिस्सा लिया था।

कानून अपना काम करेगा। प्रकरण की जाँच होगी, खुर्शीद की हत्या की भी। लेकिन फेसबुक पर अभी भी जिस तरह से खुर्शीद की हत्या की जा रही है ऐसे दौर में समर अनार्या की फेसबुक टाइमलाइन पर चली बहस को हम यहाँ दे रहे हैं ताकि बहुत सी चीजें साफ हो सकें, बस उसमें तथाकथित पीड़िता का चित्र डिलीट कर रहे हैं, क्योंकि वे अभी भी पीड़िता ही हैं।

सं.-हस्तक्षेप

Samar Anarya
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फेसबुक पर कुछ लोग बहुत कहानियाँ सुना रहे हैं.. जहरीली बूंदों की कहानियाँ. बहुत दिन सोचा चुप रहूँ पर अब अब खामोश रहना जुर्म में शरीक रहना होगा सो इन कहानियों के जवाब में सच सुनाता हूँ..

हुआ यह था कि उड़ीसा से लौट दिल्ली आने की पहली शाम ही आदतन एक बहुत प्यारे कामरेड और पुराने दोस्त के घर चला गया था. उस शाम हो रही बातचीत के बीच अचानक पुरानी और प्यारी दोस्त और कामरेड Ila Joshi का फोन आया. फोन पर उन्होंने जो कहा वह होश उड़ा देने वाला था, स्तब्ध करने वाला था. खैर, उस फोन के बाद ज्यादा देर वहाँ बैठना मुनासिब नहीं था सो निकल आया.

फिर इला और Mayank ही नहीं बल्कि लगभग पूरी टीम बूँद से दिल्ली कॉफ़ी हाउस में मुलाकात हुई. जो नाम याद हैं उनमे Gaurav Gupta, Nalin Mishra, KaliKant Jha, Pauline Huidrom, स्वाति मिश्र और कुछ और. खैर, वहाँ इला ने बताया कि एक रात टीम बूँद के कुछ दोस्त एक वरिष्ठ कामरेड साथी के घर गए थे जहाँ बहुत शराब पी लेने के बाद समूह की एक महिला साथी की हालत बहुत ख़राब हो गयी. जिनको उस वरिष्ठ साथी के तमाम बार साथ ले जाने के या कमसेकम बूँद के किसी सदस्य के रुकने के आग्रह को नकार पूरी टीम बूँद उस लड़की को वहाँ अकेला छोड़ चली गयी. इला के मुताबिक़ फिर उस लड़की ने उन्हें बताया कि उस वरिष्ठ साथी ने रात में उस लड़की से बलात्कार किया.

मुझे अभी भी याद है कि अविश्वास से लेकर नफरत तक के कितने भाव मेरे मन में एक साथ आये थे.

मेरी पोजीशन बिलकुल साफ़ थी कि ऐसे मामलों में लड़की का बयान ही सही माना जाना चाहिए चाहे फिर आरोपी आपका कितना ही करीबी क्यों न हो. मैंने इला, मयंक और पूरी टीम बूँद (वहाँ मौजूद) को यही कहा कि उन्हें तुरंत उस व्यक्ति के खिलाफ़ एफआईआर करनी चाहिए, और साथ ही उसे कनफ्रंट करना चाहिए. मैंने अपनी यह पोजीशन भी साफ़ कर दी थी कि मैं साथ जाकर उस व्यक्ति को कन्फ्रंट करने को तैयार हूँ. तीसरी बात यह कही कि कानूनी कार्यवाही के साथ साथ उसका सामाजिक बहिष्कार करवाना चाहिए और उसके लिए मैं मेरी और उनकी साझा महिला मित्रों से मैं इस विषय में बात कर सकता हूँ और मुझे करनी चाहिये.

पर आश्चर्यजनक तरीके से इनमे से किसी भी बात पर इला, मयंक और वहाँ मौजूद और दोस्त तैयार नहीं हुए.पीड़िता(नाम नहीं ले रहा अभी, क्योंकि जहरीली बूंदों के जहर के बावजूद सामाजिक और कानूनी दोनों नैतिकताओं का सम्मान करता हूँ, पर आप मजबूर करेंगे तो नाम ले भी सकता हूँ) ने भी इससे साफ़ इनकार कर दिया. उनका तर्क था कि लड़की तैयार नहीं है, उसके सम्मान पर असर पड़ेगा, उसका कैरियर ख़त्म हो जाएगा. टीम बूँद जैसे बड़े दावों वाले संगठन की सदस्य से ऐसी बात सुनना दुखी तो करता है पर फिर, अपने निर्णय लेने की एजेंसी लड़की की है इस समझदारी के साथ मैंने एफआईआर न करने वाली बात मान ली पर कन्फ्रंट करने की जरुरत पर जोर दिया. काफी देर तक हुई बात के बाद यही बात तय पायी गयी. खैर, उसके बाद मैं लगभग रोज इन लोगों को फोन करता रहा कि आज कन्फ्रंट करें, आज करें पर वापस हांगकांग आने तक इनका जवाब कभी नहीं आया.

एक बात और साफ़ कर दूं कि इस पूरे दौर में मैंने उस व्यक्ति से बातचीत बंद कर दी थी पर फिर भी एक बात जो लगातार खटक रही थी वह यह कि ये लोग उस व्यक्ति पर सिर्फ आरोप लगा रहे हैं,और कोई कानूनी या सामाजिक कार्यवाही नहीं कर रहे.

फिर अचानक एक दिन टीम बूँद के अन्दर चल रहे घमासान के बारे में खबरें (फेसबुक से ही) मिलनी शुरू हुईं. आर्थिक घपलों की खबरें, टीम पर कब्जे को लेकर लड़ाई की खबरें. और उन्ही के साथ टीम बूँद के कुछ लोग जहरीली बूंदों में तब्दील हो उस व्यक्ति के खिलाफ जहर बुझी पोस्ट्स लगाने लगे.

अब मामला कुछ कुछ साफ़ हो रहा था कि कहीं वह आदमी टीम बूँद की आंतरिक राजनीति का शिकार तो नहीं बनाया जा रहा? फिर थोड़े गुस्से में इला और मयंक को फोन किया कि मामला क्या हुआ? उन्होंने अबकी बार जो बताया वह तो और भी स्तब्ध करने वाला था. या कि तथाकथित पीड़िता ने स्वीकार कर लिया था कि वह झूठा आरोप लगा रही थी. यही नहीं, इन दोनों ने मुझे यह भी बताया कि इस सन्दर्भ में टीम बूँद के तमाम सदस्यों के साथ उस व्यक्ति के घर में मीटिंग हुई जिसमे मयंक, इला Pushpendra Singh और अन्य लोगों के साथ Manisha Pandey को भी बुलाया गया था. उस मीटिंग में टीम बूँद के (वहाँ मौजूद) सदस्यों ने माना कि आरोप गलत हैं, झूठे हैं और उन्होंने उस व्यक्ति से माफ़ी मांगी और सार्वजनिक माफ़ी मांगने का वादा किया.

मैं अब और भी स्तब्ध था. कि यह सब हो गया और मुझे बताया भी नहीं जबकि आरोप के ठीक बाद पहला फोन मुझे किया गया था. उसके बाद और कमाल तब हुआ जब मुझे पता चला कि उस मीटिंग में उस व्यक्ति को यह बताया गया कि टीम बूँद वालों को तो यकीन ही नहीं हुआ, वह तो जब उन्होंने मुझे फोन किया और मैंने कहा कि ऐसे मामलों में पहली नजर में लड़की का पक्ष ही मानना चाहिए और इसीलिए उन लोगों ने कार्यवाही करने का निर्णय लिया. (वैसे मझे इस बात का गर्व है, और अपनी पोजीशन आगे भी यही रहने वाली है, फिर सामने कितना भी जरुरी दोस्त क्यों न हो).

खैर, उसके बाद मैंने वह किया जो मुझे करना चाहिए था. मयंक और इला को फोन और उन्हें या तो कानूनी कार्यवाही करने की या माफ़ी मांगने की सलाह. जब उन्होंने नहीं मांगी ,तो मैंने एक स्टेटस लगाया जिसके बाद उन्होंने पहली बिना नाम की माफ़ी मांगी. पर मैं और ठगे जाने को तैयार नहीं था. उसके बाद दूसरा स्टेटस लगाया जहाँ सार्वजनिक चरित्रहनन के लिए सार्वजनिक माफ़ी की बात की. और इसी के बाद मयंक और इला ने टीम बूँद की तरफ से उस व्यक्ति से माफ़ी मांगी.

फिर इस कथा का अगला दौर शुरू हुआ. टीम बूँद के दूसरे खेमे के लोगों द्वारा अपनी राजनीति के लिए उस व्यक्ति को मोहरा बनाने का खेल जिसका नेतृत्व कोई जहरीला तपन नामक आदमी कर रहा है. इस खेल की खबर मुझे तब लगी जब कामरेड Girijesh Tiwari ने मुझे बताया कि जहरीला तपन कोई वीडिओ लेकर उनसे मिलने आजमगढ़ तक गया. उन्होंने यह भी बताया कि जहरीला तपन ने यह माना कि यह वीडिओ नरेंद मोदी भक्त मधु किश्वर के घर में बनाया गया, क्यों यह हममें से कोई नहीं जानता. यह भी कि वह व्यक्ति यह वीडिओ लेकर गली गली घूम रहा है,.

मुझे लगता है कि अब इस मुद्दे से सीधे टकराने का वक़्त आ गया है. वक़्त आ गया है कि अगर इन लोगों को लगता है कि कुछ ऐसा हुआ है तो वह उस व्यक्ति के खिलाफ पीड़िता के साथ कानूनी और सार्वजनिक दोनों कार्यवाहियाँ शुरू करें और मेरा वादा है कि मैं पीड़िता के साथ खड़ा रहूँगा.

और अगर वह ऐसा नहीं करें तो साफ़ होगा कि वह इस कहानी के बहाने कोई और खेल खेल रहे हैं और यह नाकाबिले बरदाश्त है. सो अब सीधी चुनौती है, न्याय की लड़ाई लड़नी है तो सामने आकर लड़ने की हिम्मत करें, और नहीं तो इतना तो सामने आयें ही कि वह व्यक्ति आप पर कार्यवाही कर सके.

सो साहिबान, वीडियो ही नहीं, पूरी कहानी नाम के साथ सार्वजनिक कर दें. फुसफुसाहटों से न्याय नहीं पाया जा सकता न.

[उस वरिष्ठ साथी का नाम इसलिए नहीं लिया क्योंकि मैं चाहता हूँ कि यह महान काम वह लोग करें जिससे अगर वे मुकदमा न करें तो उस साथी को उनपर मानहानि का दावा कर ‘डैमेजेज’ मांग सकें. इसलिए भी कि वह समझ सकें कि पीड़िता का आविष्कार नहीं किया जा सकता, या तो कोई पीड़िता है, या नहीं है. सो जो बात हो साफ़ हो, सीधी हो.]
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about 2 months ago • Edited

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3 Shares

•             Khurshid Anwar, Shahnawaz Malik, Wasim Akram Tyagi and 101 others like this.

•             Poojāditya Nāth Edit कर लीजिए समर भाई इस स्टेटस को…See Translation

October 26 at 1:06pm via mobile • Like

•             Samar Anarya samjha nahi Poojāditya Nāth bhai.. kuch galti hai?

October 26 at 1:07pm • Like

•             Khurshid Anwar मैं भी पीड़िता के साथ खड़ा मिलूँगा. मगर उसे सामने लाएं वह लोग जो कहानी बना रहे हैं. मेरे पास पीड़िता की एक पोस्ट इनबॉक्स में है जिसमे वह इलज़ाम पर चुप है और कह रही है मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रही.

October 26 at 1:11pm • Like • 13

•             Vandna Tripathi Shukriya Samar,yah pahlu ujaagar karne ka,ab tak to jahreeli kahaniyaan padh padh kar sar fat rha tha…

October 26 at 1:11pm via mobile • Like • 5

•             Syed Mohammad Altamash Jalal कितने षड्यंत्र रचे हुए है है आपस में ही ..See Translation

October 26 at 1:12pm • Like • 3

•             Sandeep Kumar पूरा मामला जलेबी की तरह सीधा लगा मुझे. आपको कोशिश करनी चाहिए कि सीधे पीड़िता से बात करके सचाई पता लगाएं बाकी लोगों के कुछ कहने का मतलब नहीं बनता. करियर खराब होने व इस तरह की अन्य बातें केवल बहाना हैं…इसका मतलब है कि कुछ गेम हो रहा था.

October 26 at 1:13pm • Like • 5

•             Khurshid Anwar वैसे ज़रूरी है कि ज़हरीला साहब सामने आयें. Nalin Mishra ko bhi maine unkee post par likha hai. वह भी बोलें.

October 26 at 1:13pm • Like • 4

•             Mohit Khan समर भाई अगर न्याय की ही बात है तो आज भी उसका सबसे सही तरीका अदालत वाला है क्योंकि सोशल नेटवर्किंग पर सिर्फ छवि बनाने और बिगाड़ने का काम किया जा सकता है न्याय नहीं दिलाया जा सकता।

October 26 at 1:13pm via mobile • Like • 12

•             Poojāditya Nāth Typing error हैं कुछ…..

October 26 at 1:16pm via mobile • Like • 1

•             Mohit Khan समर भाई आपकी पोस्ट के लिए शुक्रिया इससे कम से कम उन लोगों को एक निष्पक्ष version जानने को मिला जो सिर्फ ज़हरीली कहानियों वाला version सुन कर सिर्फ कयास ही लगा रहे थे।

October 26 at 1:17pm via mobile • Like • 12

•             Yuva Deep Pathak ये क्या है ये तो शर्मनाक बात है See Translation

October 26 at 1:17pm via mobile • Like • 4

•             Khabar Par Nazar भैया ये “उस व्यक्ति” कौन है??? सबका नाम ले लिए इनके मुहं पर काहे पर्दा डाले हैं….?????See Translation

October 26 at 1:19pm • Like • 1

•             Brijesh Soni sahi kaha, aisi khamoshi radde amal k dayre me nahi aata hai aur aane dena b nhi chahiye….See Translation

October 26 at 1:19pm via mobile • Like • 2

•             Vandna Tripathi sach bolne ka dansh itne ghatiya tareeke se jhelna padega kisi ko pataa na tha….shermnaak

October 26 at 1:21pm via mobile • Like • 4

•             Vandna Tripathi Nalin mishra ki post par tapaak se comment karne waale aaj khamosh hain aur unki bhi bolti band hai aaj

October 26 at 1:23pm via mobile • Like • 5

•             Samar Anarya जहरीला तपन ने कहानियाँ डालने की शुरुआत मुझे ब्लाक करके की थी. क्यों पता नहीं.See Translation

October 26 at 1:27pm • Like • 11

•             Samar Anarya Khabar Par Nazar उस वरिष्ठ साथी का नाम इसलिए नहीं लिया क्योंकि मैं चाहता हूँ कि यह महान काम वह लोग करें जिससे अगर वे मुकदमा न करें तो उस साथी को उनपर मानहानि का दावा कर ‘डैमेजेज’ मांग सकें. इसलिए भी कि वह समझ सकें कि पीड़िता का आविष्कार नहीं किया जा सकता, या तो कोई पीड़िता है, या नहीं है. सो जो बात हो साफ़ हो, सीधी हो.See Translation

October 26 at 1:28pm • Like • 10

•             Vandna Tripathi boond ke logo ko bhi tag kijiye plz,wo bhi to samjhen maazra abhi tak to zareeli boondo se hi roobaru they…

October 26 at 1:29pm via mobile • Like • 4

•             Samar Anarya किया है, जितनों को मैं जानता हूँ. उसमे दोनों तरफ वाले हैं Vandna Tripathi जी.See Translation

October 26 at 1:33pm • Like • 7

•             Tara Shanker मैंने तो परसों ही पढ़ा इस बेहुदे ज़हरीले तपन का ब्लॉग! बहुत ही निर्लज्ज तरीके से बुनी है उसने ये कहानी!

October 26 at 1:35pm • Like • 7

•             Sheeba Aslam Fehmi Ye makkariyan Naari-vomarsh ko kahan le jaengi?

October 26 at 1:38pm • Like • 8

•             Vandna Tripathi Mohit,tum karo baakiyon ko main mobile se nhi kar skti

October 26 at 1:39pm via mobile • Edited • Like • 4

•             Mohit Khan मेरी लिस्ट में जितने बूँद वाले हैं अभी करता हूँ सभी को टैग।

October 26 at 1:40pm via mobile • Like • 2

•             Mohit Khan Pushpendra Singh Devendra Kumar Devesh Tripathi Nalin Mishra Abhinav Sabyasachi Neeraj Hari Pandey Ahmer Khan Deependra Pandey Nandan Tripathi मृगांक Avinash Pandey

October 26 at 1:45pm via mobile • Like • 2

•             Sheeba Aslam Fehmi Mere khayal se ab koi ‘krantikari mahilaon’ ko apne ghar me ghusne nahi dega. Aur yahi sahi rahega.

October 26 at 1:49pm • Like • 7

•             Vandna Tripathi Kalikant jha,Amit Dhermendra,Narayan laxmi,Vibhanshu Divyaal ko bhi tag karo

October 26 at 1:53pm via mobile • Edited • Like

•             Sheeba Aslam Fehmi Zindigi bhar ki creditibility ki matti paleed ho jani hai. Meri nazar me ye teesra mamla hai jisme apni hawas aur glani ko kisi aur par thopa gaya hai.

October 26 at 1:51pm • Like • 9

•             Vandna Tripathi Sheeba ji ,afsos hai is baat ka us krantikari mahila ke achchhe karyo ke liye kai baar apni wall par post daal kar salaam kiya tha…

October 26 at 1:52pm via mobile • Like • 7

•             Mohit Khan Jai Prakash Shah Chakrawarti Nadeem Anwar Nitish Singh Jagdish Saurabh

October 26 at 1:53pm via mobile • Like • 2

•             Mohit Khan Dheeraj Tewari Ajayendra Tripathi Bunty Tripathi Gaurav Gupta Aj Anna

October 26 at 1:56pm via mobile • Like

•             Vandna Tripathi Amit Dharmendra Santosh Singh

October 26 at 2:05pm • Edited • Like

•             Khurshid Anwar zaroor hoga

October 26 at 2:14pm • Like • 5

•             Rituparna Mudra Rakshasa ‘फुसफुसाहटों से न्याय नहीं पाया जा सकता …..’ दुरुस्त !

October 26 at 2:14pm via mobile • Like • 5

•             Su Dipti वैसे इन मामलों में प्रथमत: स्त्री का पक्ष लेना लाज़मी है पर ऐसे मामलों के कारण असली पीड़ित से भी लोगों का यकीन उठता जा रहा है।See Translation

October 26 at 2:16pm via mobile • Like • 7

•             Gaurav Gupta bhut sahi kaha samar bhai…. zehreele k daant ab toonenge !!!!

October 26 at 2:18pm • Like • 1

•             Rituparna Mudra Rakshasa सच कहा ….. सुदीप्ति ! See Translation

October 26 at 2:20pm via mobile • Like • 2

•             Sheeba Aslam Fehmi Ek baat aur sirf Berozgari-Bekari ke daur me ‘krantikari activist’ ban jane walon se sabhi saavdhan rahen. Ye sabse ghair bharosemand jamat hai. Iske paas khone ko kuchh nahi, aapki qeemat par rengte rehna iski survival strategy hai.

October 26 at 2:25pm • Like • 6

•             Emran Rizvi संगठन की आतंरिक सियासत नज़र आ रही है iभाई कोई पद/वर्चस्व/अथॉरिटी वगेरह का विवाद तो नहीं है?See Translation

October 26 at 2:27pm • Edited • Like • 3

•             Su Dipti पता है मुझे इसका व्यक्तिगत अनुभव है कि कैसे औरतें इस हथियार का इस्तेमाल करती हैं। इसी लिए मेरे विचार कई बार कडवे होते हैं समर।कई बार वे स्त्री विरोधी भी लगते हैं। पर इसमें स्त्री पुरुष नहीं व्यक्ति विशेष पर यकीन करना चाहिए। और अगर आरोप झूठा पाया जाय तो स्त्री को भी वही सजा मिलनी चाहिए जैसे पुरुष को मिलती है।See Translation

October 26 at 2:27pm via mobile • Like • 16

•             Rituparna Mudra Rakshasa सौ फीसदी सहमति तुमसे… सुदीप्ति! मुहँदेखी बातों की बनिस्पत कड़वी बातों को कहना हमेशा ज़्यादा मुश्किल होता है… गट्स चाहियें इसके लिए…See Translation

October 26 at 2:32pm via mobile • Like • 5

•             Samar Anarya बिलकुल Su Dipti … मैं तो कॉफ़ी हाउस से सीधे पुलिस स्टेशन जाने की बात कर रहा था. इस बात से उन सब के मुकर जाने पर फिर तुरंत उसी शाम कन्फ्रंट करने पर आमादा था. अच्छा हुआ कि यह नहीं हुआ. वरना आज उस साथी को मुंह कैसे दिखाता.See Translation

October 26 at 2:37pm • Like • 5

•             Ajayendra Urmila Tripathi @mohit Khan: टैग करने के लिए शुक्रिया मोहित भाई, १० लोगों से दस तरह की बातें सुन ने को मिल रहा है, पता नहीं सच्चाई क्या है क्या नहीं. पर एक बात तो तय है की इस प्रकरण में मयंक सक्सेना और इला जोशी बहुत कमजोर दिखे हैं, कम से कम यह आशा मुझे उनसे नहीं थी जो लोग अपने बहादुरी के किस्से सुनाते नहीं थकते हैं. आज समर लिख रहे हैं तपन लिख रहे हैं नलिन लिख रहे हैं, खुर्शीद भी कमेंट में दिख ही रहे हैं पर ऐसी भी क्या मजबूरी है इन दोनों लोगों की जो गोल मोल किये पड़े हैं? मुझे और मेरे जैसे कई लोगों को यह पूरा घटनाक्रम और भी ज्यादा उलझा लग रहा है. शर्म की बात यह है की जिन्हें पता है वो तटस्थ बने हुए हैं.See Translation

October 26 at 2:37pm via

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