Home » गांधी के उत्पीड़न की सीबीआई जाँच की माँग

गांधी के उत्पीड़न की सीबीआई जाँच की माँग

स्वयंसेवी संगठनों ने भेजा मुख्यमंत्री सहित राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व राज्यपाल को पत्र
बाहुबली विधायक सहित आरोपी प्रशासनिक अधिकारियों के चलते पुलिस नहीं कर रही निष्पक्ष कार्रवाई
पुलिस कर रही घर-बार लूटने वाले माफियाओं की मदद 
गवाहों सहित पत्रकार की पत्नी को पुलिस धमकी दे रही
भदोही। संत रविदास नगर भदोही के वरिष्ठ पत्रकार सुरेश गांधी के मामले में पुलिस व प्रशासन से न्याय मिलना अब नामुमकिन हो गया है। इसकी वजह उत्पीड़नात्मक कार्रवाई में पुलिस व प्रशासन के अधिकारी शामिल होना बताया जा रहा है। ऐसे में इन अधिकारियों के रहते निष्पक्ष जाँच व न्याय मिलने से रहा। जाँच के आदेश देने वाले पुलिस अधिकारी खुद पीड़ित पत्रकार का घर-बार लूटने वालों के घर जाकर दरबारगिरी कर रहे हैं। पीड़ित पत्रकार श्री गांधी व उनकी पत्नी रश्मि गांधी की याचिका पर जिला न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 156 3 के तहत मुकदमा दर्ज तो कर लिया है, लेकिन घटना में कोतवाल के आरोपित होने से विवेचना में लीपापोती की जा रही है। पुलिस अपने बचाव में लुटेरे माफियाओं की मदद कर रही है। डीजीपी के निर्देश पर प्रकरण की जाँच कर रहे एक पुलिस अधिकारी को न तो आरोपी लुटेरों ने अपना बयान दिया और न ही आरोपित कोतवाल ने। पुलिस की इस कार्यशैली से जाहिर है कि वर्तमान पुलिस अधिकारियों के चलते निष्पक्ष जाँच नहीं हो सकती। पीड़ित पत्रकार ने मुख्यमंत्री समेत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व राज्यपाल व पुलिस महानिदेशक को रजिस्टर्ड पत्र भेजकर प्रकरण की सीबीआई जाँच कराने की माँग की है। इसके अलावा सूबे के स्वयंसेवी संगठनों के कर्ताधर्ताओं के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मिलकर श्री गांधी ने पत्रक सौंपा है।
पत्र में कहा गया है कि सारी उत्पीड़नात्मक कार्रवाई प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने गत् नवम्बर 2012 में मुहर्रम के दौरान भड़की हिंसा में अपनी लापरवाही छिपाने व बाहुबली विधायक विजय मिश्रा के काले कारनामों पर पर्दा डालने के लिए की है। मूलतः जौनपुर के गोपालापुर निवासी श्री गांधी पिछले 16 सालों में मेहीलाल बिल्डिंग अयोधयापुरी कालोनी स्टेशन रोड भदोही के किराए के मकान में रहकर पत्रकारिता करते हैं। वह दैनिक समाचार पत्र हिन्दुस्तान में वर्ष 1996 से 2012 तक, वर्ष 2012 से अब तक जनसंदेश टाइम्स व 2008 से अब तक आज तक टीवी न्यूज में भदोही के ब्यूरोचीफ हैं। उनके पास मौजूद अखबारों के हजारों बाईलाइन छपी खबरों के अलावा सैकड़ों ससमसामयिक आर्टिकल व वीडियो फुटेज व अन्य घटनाओं समेत दूरसंचार कार्यालय, इनकम टैक्स, बैंक, एलआईसी के अभिलेखों आदि में अंकित व पूर्व के आरोपों में विभिन्न न्यायालयों व जनसूचना विभाग से जारी कार्डो आदि प्रमुख साक्ष्य न सिर्फ पत्रकार बल्कि उस पते पर रहने के लिए पर्याप्त आधार है, लेकिन भदोही पुलिस है कि उन्हें पत्रकार नहीं होने का बयान सहित हाईकोर्ट के स्थगन आदेश व जिला न्यायालय से मिली जमानत आदेशों को भी खारिज कर दिया। इतना ही नहीं जिन तीन मुकदमों को आधार बनाकर गुंडाएक्ट व जिलाबदर किया गया है उसमें खुद पुलिस ने आरटीआई रिपोर्ट में मुकदमों को खत्म होने की बात कही है, उन्हें भी अपनी करतूतों को छिपाने के लिए दरकिनार कर दिया है। बताया जाता है दोनों पक्षों की रपट व गिरफ्तारी जैसे साक्ष्य भी पुलिस व प्रशासनिक अफसरों की ओर से जारी बयान में कह दिया है कि तोड़फोड़ आदि की घटना हुई ही नहीं है, जो हुआ था उसे आपस में सलटा लिया गया है। मामला गत 25 नवम्बर 2012 को भड़की हिंसा के दौरान हुए बवाल से शुरू हुआ। इस घटना सहित सरकार गठन के दौरान एक कैबिनेट मंत्री की मौजूदगी में बिना किसी इजाजत विजय मिश्रा जेल के बाहर आकर कार्यक्रम में शरीक होना, माफिया अतीक अहमद की मौजूदगी, अवैध बालू खनन, सड़कों के निर्माण में धांधली आदि की कवरेज समाचार पत्र में खबर के रूप में प्रस्तुत करना ही सुरेश गांधी के लिए अभिशाप बन गया। वह बाहुबली विधायक सहित जिला प्रशासन व पुलिस के निशाने पर आ गए। सत्ता पक्ष का विधायक होने के नाते व प्रशासन की किरकिरी होने के नाते जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक भी सुरेश गांधी को दुश्मन की तरह देखने लगे। उसके बाद कानूनी हथकंडे से शुरू हुआ पत्रकार सुरेश गांधी का उत्पीड़न बदस्तूर जारी है। पीड़ित पत्रकार पर गुंडाएक्ट जिलाबदर व धमकी देने तक के मुकदमे लाद दिए गए। जबकि बाहुबलि विधायक विजय मिश्रा पर लूट, हत्या, डकैती, अपहरण, फिरौती, गुंडा टैक्स सहित 54 मामले दर्ज हैं। लेकिन उसके विरूद्ध कोई कार्रवाई इसलिए नहीं हो रही है क्योंकि सत्ता प्रमुखों का उस पर बरदहस्त बताया जाता है।
श्री गांधी का कहना है कि उत्पीड़नात्मक कार्रवाई के दौरान से ही उच्चाधिकारियों समेत उच्च न्यायालय से अपने आवेदनों के जरिए कह चुके हैं कि पुलिस अपनी खामियों को छिपाने के लिए ही कार्रवाई कर रही है जो अब पुलिस अपने बचत में खामियों को छिपाने के लिए लुटेरों की मदद कर रही है। कालोनी में रह रहे लोगों को बयान न देने के लिए धमकी दी जा रही है।
(भदोही से एक पत्रकार के मेल से )

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