Home » गुरू गोलवलकर को त्याग दिया मोदी ने

गुरू गोलवलकर को त्याग दिया मोदी ने

देश के संघात्मक ढाँचे के विरोधी थे संघ और गोलवलकर 
 

एल.एस. हरदेनिया

पिछले रविवार (12 जनवरी 2014) को गोवा में एक आमसभा को संबोधित करते हुये गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आरोप लगाया कि केन्द्र की वर्तमान सरकार हमारे देश के संघीय ढाँचे को कमजोर कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार, राज्य के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप करती है। उन्होंने यह आश्वासन दिया कि जब वे सत्ता में आयेंगे तो देश के संघीय ढाँचे व संघीय संस्थाओं को और मजबूत करेंगे।

वैसे तो यह सभी को मालूम है कि नरेन्द्र मोदी का पढ़ने, लिखने से कोई ज्यादा सम्बंध नहीं है। इसके बावजूद, उनसे कम से कम यह अपेक्षा तो की ही जा सकती है कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेताओं द्वारा लिखी किताबें पढ़ी होंगी। मोदी प्रारंभ से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुये हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे सरसंघचालक श्री एम.एस. गोलवलकर ने संघ के उद्देश्यों व सिद्धान्तों को स्थापित करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। गोलवलकर एक उच्च कोटि के बुद्धिजीवी थे। उनके द्वारा निर्धारित सिद्धान्त और नीतियां आज भी संघ की प्रेरणा का स्त्रोत है।

अभी कुछ दिन पहले गोलवलकर, जिन्हें संघ के स्वयंसेवक, गुरू जी कहते हैं, का 100वाँ जन्मदिन मनाया गया था। उस अवसर पर संघ ने अनेक पुस्तिकाएं प्रकाशित की थीं। इसके पूर्व, उनके ही जीवनकाल में गुरू जी द्वारा दिये गये भाषणों और लेखों का एक संग्रह प्रकाशित हुआ था। इस संग्रह का नाम है “बंच ऑफ थॉट्स”। इस ग्रंथ में देश और विदेशों से सम्बंधित अनेक मुद्दों पर गुरू जी द्वारा प्रगट किये गये विचारों को संग्रहीत किया गया है।

इन्हीं में से एक मुद्दा है हमारे देश का संघीय ढाँचा। आजादी के बाद हमारे देश के नेताओं ने एक संविधान बनाया। उस संविधान का एक महत्वपूर्ण पहलू है देश का संघीय ढाँचा। हमारे संविधान निर्माता इस बात को जानते थे कि हमारे देश की सांस्कृतिक एवं भाषायी बहुलता को देखते हुये भारत को एक संघीय देश बनाना आवश्यक था। संविधान निर्माताओं ने केन्द्र और राज्यों के बीच विषयों का विभाजन किया है। कुछ विषय केन्द्र को सौंपे गये हैं और कुछ राज्यों को। उसके साथ, कुछ ऐसे विषय भी हैं जो समवर्ती सूची में शामिल किये गये हैं। हमारे देश की बहुलता को देखते हुये हमने एक संघीय ढाँचे को स्वीकार किया।

आजादी के कुछ वर्षों बाद हमारे देश के शासकों ने यह महसूस किया कि राज्यों के गठन का कोई वैज्ञानिक आधार बनाया जाये। वह आधार क्या हो, इसको निर्धारित करने के लिये राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया। इसी आयोग ने राज्यों के निर्माण का आधार भाषा को बनाया और तदनुसार हमारे देश में भाषा आधारित अनेक राज्यों का गठन किया गया।

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि गुरू जी देश के संघीय ढाँचे के विरोधी थे। उनका कहना था कि संघीय ढाँचे के कारण देश में पृथक्ता की भावना पैदा होती है। संघीय ढाँचे के कारण देश की  एकता की भावना कमजोर होती है। यदि देश एक है, इस भावना को मजबूत करना है तो, गुरू जी का कहना था कि वर्तमान संघीय ढाँचे को कब्र में गाड़ देना चाहिए। उनका कहना था कि राज्यों को समाप्त करके एक ही राज्य में उनका विलय कर देना चाहिए। गुरू जी तो हमारे संविधान की प्रासंगिकता पर भी प्रश्नचिन्ह लगाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आरएसएस, भारत के संघीय ढाँचे के विरूद्ध है। उनकी किताब ‘बंच ऑफ थाट्स’या ‘विचार नवनीत’में पूरा एक अध्याय है जिसका शीर्षक ही है “एकात्मक शासन की अनिवार्यता”। इस अध्याय में एकात्मक शासन को तुरन्त लागू करने के उपाय सुझाते हुये गोलवलकर लिखते हैं ‘‘इस लक्ष्य की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण काम और प्रभावी कदम यह होगा कि हम अपने देश के विधान से संघात्मक ढाँचे की संपूर्ण चर्चा को सदैव के लिये समाप्त कर दें। उसके बाद भारत अर्थात भारत के अंतर्गत अनेक स्वायत्त अथवा अर्द्धस्वायत्त राज्यों के अस्तित्व को मिटा दें तथा एक देश, एक राज्य, एक विधानमंडल, एक कार्यपालिका घोषित कर दें। उसमें खंडात्मक, क्षेत्रीय, सांप्रदायिक, भाषाई तथा अन्य प्रकार के गर्व का चिन्ह भी नहीं होना चाहिए एवं इन भावनाओं को हमारे एकत्व के सामंजस्य को उद्ध्वंस करने का अवसर नहीं मिलना चाहिए। संविधान का पुनर्निरक्षण एवं पुनर्लेख हो जिससे कि अंग्रेजों द्वारा किया गया तथा वर्तमान नेताओं द्वारा मूढ़तावश ग्रहण किया हुआ कुटिल प्रचार कि हम अनेक अलग-अलग मानव वंशों अथवा राष्ट्रीयताओं के गुट हैं जो संयोगवश भौगालिक एकता एवं एक समान सर्वप्रधान विदेशी शासन के कारण साथ-साथ रह रहे हैं, इस एकात्मक शासन की स्थापना द्वारा प्रभावी ढंग से अप्रमाणित हो जाएं”।

गोलवलकर को नरेन्द्र मोदी समेत भाजपाई नेता उसी तरह अपनी प्रेरणा का स्त्रोत मानते हैं जैसे कांग्रेस गांधी को मानती हैं। गोलवलकर ने 1961 में राष्ट्रीय एकता परिषद के प्रथम अधिवेशन को भेजे गये अपने संदेश में भारत में संघ राज्य को समाप्त करने का आह्वान करते हुये कहा था कि ‘‘आज की संघात्मक (फेडरल) राज्य पद्धति पृथकता की भावनाओं का निर्माण तथा पोषण करने वाली, एक राष्ट्रभाव के सत्य को एक प्रकार से अमान्य करने वाली एवं विच्छेद करने वाली है। इसको जड़ से ही हटा कर तदनुसार वर्तमान संविधान को समाप्त कर एकात्मक शासन प्रस्थापित हों”। गोलवलकर संघीय व्यवस्था से कितनी घृणा करते थे और किस हद तक उसके घोर विरोधी थे उसका एक प्रमाण यह है कि जब महाराष्ट्र को भाषा आधारित राज्य बनाने का आन्दोलन चल रहा था उस समय वे प्रान्तीयता विरोधी सम्मेलनों में भाषण देते हुये कहते थे कि मैं एक राज्य का समर्थन करता हूँ। भारत में केन्द्रीय शासन होना चाहिए। उन्होंने यह भी आह्वान किया था कि हमारे नेताओं को साहस दिखाना चाहिए और वर्तमान संघीय ढाँचे के खतरे को महसूस करते हुये संघीय ढाँचे को समाप्त करने की योजना बनाना चाहिए।

मैं जानना चाहूँगा कि क्या मोदी ने गुरू गोलवलकर को और संघ के इस विचार को त्याग दिया है? क्या उन्होंने संघ के इस दर्शन को नकार दिया है? संघीय ढाँचे की बात करना और उसके साथ ही संघ के राजनीतिक दर्शन के प्रति प्रतिबद्धता दिखाना एक साथ संभव नहीं है।

जहाँ तक राष्ट्र के संघीय ढाँचे का सम्मान करने का सवाल है, मैं यहाँ पर एक ऐतिहासिक घटना का स्मरण दिलाना चाहूँगा। 1977 के आमचुनाव में इंदिरा गांधी समेत कांग्रेस की जबरदस्त हार हुयी थी। उस हार के बाद देश की पहली चुनी हुयी गैर-कांग्रेसी सरकार ने केन्द्र में सत्ता संभाली थी। इस सरकार में जनसंघ, जो भारतीय जनता पार्टी का पुराना अवतार था, शामिल था। इस सरकार में जनसंघ के प्रतिनिधि के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी शामिल थे। केन्द्रीय मंत्रिमंडल में दोनों की उपस्थिति के बावजूद यह निर्णय लिया गया कि चुनी हुयी समस्त राज्य सरकारों को बर्खास्त किया जाये और वे बर्खास्त भी की गयीं। क्या यह संघीय ढाँचे के प्रति सम्मान का प्रदर्शन था? यदि जनसंघ, संघीय ढाँचे के प्रति प्रतिबद्ध था तो उसे चुनी हुयी राज्य सरकारों की बर्खास्तगी के प्रस्ताव को मंजूर नहीं होने देना चाहिए था। इसलिये मोदी से यह प्रश्न पूछा जा सकता है कि क्या वे संघ की विचारधारा से एकात्मक शासन के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को समाप्त करवायेंगे? जब तक वे यह नहीं करवा पाते हैं तब तक उन्हें केन्द्र की सरकार पर राज्यों के साथ भेदभाव करते हुये संघीय ढाँचे को कमजोर करने का आरोप लगाने का नैतिक अधिकार नहीं है।

About the author

( एल.एस. हरदेनिया, लेखक वरिष्ठ पत्रकार व धर्मनिरपेक्षता के प्रति प्रतिबद्ध कार्यकर्ता हैं)

About हस्तक्षेप

Check Also

भारत में 25 साल में दोगुने हो गए पक्षाघात और दिल की बीमारियों के मरीज

25 वर्षों में 50 फीसदी बढ़ गईं पक्षाघात और दिल की बीमांरियां. कुल मौतों में से 17.8 प्रतिशत हृदय रोग और 7.1 प्रतिशत पक्षाघात के कारण. Cardiovascular diseases, paralysis, heart beams, heart disease,

Bharatendu Harishchandra

अपने समय से बहुत ही आगे थे भारतेंदु, साहित्य में भी और राजनीतिक विचार में भी

विशेष आलेख गुलामी की पीड़ा : भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रासंगिकता मनोज कुमार झा/वीणा भाटिया “आवहु …

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा: चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा : चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश Occupy national institutions : …

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

अच्छे नहीं, अंधेरे दिनों की आहट

मोदी सरकार के सत्ता में आते ही संघ परिवार बड़ी मुस्तैदी से अपने उन एजेंडों के साथ सामने आ रहा है, जो काफी विवादित रहे हैं, इनका सम्बन्ध इतिहास, संस्कृति, नृतत्वशास्त्र, धर्मनिरपेक्षता तथा अकादमिक जगत में खास विचारधारा से लैस लोगों की तैनाती से है।

National News

ऐसे हुई पहाड़ की एक नदी की मौत

शिप्रा नदी : पहाड़ के परम्परागत जलस्रोत ख़त्म हो रहे हैं और जंगल की कटाई के साथ अंधाधुंध निर्माण इसकी बड़ी वजह है। इस वजह से छोटी नदियों पर खतरा मंडरा रहा है।

Ganga

गंगा-एक कारपोरेट एजेंडा

जल वस्तु है, तो फिर गंगा मां कैसे हो सकती है ? गंगा रही होगी कभी स्वर्ग में ले जाने वाली धारा, साझी संस्कृति, अस्मिता और समृद्धि की प्रतीक, भारतीय पानी-पर्यावरण की नियंता, मां, वगैरह, वगैरह। ये शब्द अब पुराने पड़ चुके। गंगा, अब सिर्फ बिजली पैदा करने और पानी सेवा उद्योग का कच्चा माल है। मैला ढोने वाली मालगाड़ी है। कॉमन कमोडिटी मात्र !!

Entertainment news

Veda BF (वेडा बीएफ) पूर्ण वीडियो | Prem Kahani – Full Video

प्रेम कहानी - पूर्ण वीडियो | वेदा BF | अल्ताफ शेख, सोनम कांबले, तनवीर पटेल और दत्ता धर्मे. Prem Kahani - Full Video | Veda BF | Altaf Shaikh, Sonam Kamble, Tanveer Patel & Datta Dharme

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: