Home » चुनाव के समय ही शिंदे को क्यों याद आते हैं आतंकवाद के नाम पर जेलों में बन्द मुस्लिम

चुनाव के समय ही शिंदे को क्यों याद आते हैं आतंकवाद के नाम पर जेलों में बन्द मुस्लिम

सादिक जमाल मेहतर के हत्यारे आईबी अधिकारियों को बचाने में लगी है सीबीआई- रिहाई मंच
सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की रच रही है साजिश आईबी
आजकल मुजफ्फरनगर में मुसलमानों की कीमत लगा रहे हैं अबू आसिम आजमी
लखनऊ 13 जनवरी 2013। गुजरात के सादिक जमाल मेहतर की हत्या में शामिल आईबी अधिकारी राजेन्द्र कुमार, सुधीर कुमार, यशोवर्धन आजाद, गुरुराज सवादत्ती को सीबीआई द्वारा बचाने का आरोप लगाते हुये सादिक जमाल की हत्या की 11 वीं बरसी पर रिहाई मंच ने कहा कि जब तक खुफिया विभागों के षडयंत्रकारी अधिकारी नहीं पकड़े जाएंगे तब तक देश में न तो बेगुनाह मुस्लिमों के फर्जी एनकाउंटर और फर्जी मुकदमें रुकेंगे और न ही आतंकवादी वारदातों के असली मुजरिम पकड़े जा सकेंगे।

रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब ने कहा कि 2003 में सादिक जमाल मेहतर को खुफिया विभाग के अधिकारियों और मुंबई तथा गुजरात के कथित एनकाउंटर स्पेश्लिस्टों द्वारा नरेन्द्र मोदी को मारने का षडयंत्र रचने के नाम पर फर्जी मुठभेड़ में मार दिया गया था। जिसके कई पुख्ता सबूत होने के बावजूद सीबीआई ने आईबी अधिकारियों को आज तक गिरफ्तार नहीं किया है, इतना ही नहीं इस हत्या कांड में शामिल गुजरात पुलिस के आला अधिकारियों डीजी वंजारा और पीपी पांडे जैसे लोगों को भी दूसरे मामलों में जेल में होने के बावजूद आज तक सादिक हत्या कांड में गिरफ्तार नहीं किया गया है। वहीं इस पूरे मामले में जाँच के दौरान इस तथ्य का भी खुलासा हुआ था कि हत्या राजनीतिक कारणों से की गई थी, लेकिन बावजूद इसके सीबीआई ने न तो मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी से और न ही तत्कालीन गृह मंत्री रहे अमित शाह से ही कोई पूछताछ की। जो साबित करता है कि आईबी अधिकारियों को बचाने और आतंकी घटनाओं के असली गुनहगारों को आजाद रखने में कांग्रेस और भाजपा दोनों एक मत हैं।

आजमगढ़ रिहाई मंच के प्रभारी मसीहुद्दीन संजरी ने कहा कि आईबी ने जिस तरह मुजफ्फरनगर दंगों के पीछे आईएसआई तो कभी आईएम तो कभी भटकल बंधुओं को जिम्मेदार बता रही है उससे साफ हो रहा है कि जो आईबी मोदी के लिये काम करती थी वो आजकल कभी राहुल गांधी तो कभी सांप्रदायिक हिंसा के सवालों से घिरी अखिलेश सरकार के लिये काम कर रही है। पिछले दिनों जिस तरीके से मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी और उसके बाद मुजफ्फरनगर से राहत शिविरों को संदेह में लाया गया वो साफ करता है कि राहुल गांधी जिन्होंने कहा था कि राहत शिविरों के लोगों से आईएसआई का संपर्क है उस बात को पुख्ता करने के लिये यह गिरफ्तारियाँ की जा रही हैं। देश की खुफिया व सुरक्षा एजेंसियां ने 2002 के बाद जिस तरीके से आतंकवाद के नाम पर गुजरात में इशरत जहां, सादिक तो कभी बाटला हाउस में बेगुनाहों का ठंडे दिमाग से कत्ल किया कि यह सब गुजरात 2002 का बदला लेने वाले थे, आज वैसे ही हालात मुजफ्फरनगर को लेकर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन घटनाक्रमों के बीच कथित खुफिया सूत्रों के हवाले से इस बात का कहा जाना कि गोरखनाथ पीठ पर भी आतंकी हमले का खतरा बढ़ गया है और प्रदेश में बड़ी तादाद में आईएम के आतंकी घुस आए हैं, आईबी की नापाक साजिशों का पता चलता है कि आने वाले दिनों में जब गोरखपुर में नरेन्द्र मोदी की रैली होनी है और गणतंत्र दिवस भी आने वाला है तब आईबी सूबे और देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के लिये आतंकी वारदातों को अंजाम दे सकती है या फिर उन बेगुनाह मुस्लिम युवकों को जिन्हें आईबी आतंकी बता रही है और जो उन्हीं की अवैध हिरासत में हैं, को गिरफ्तार करने का दावा कर सकती है। जैसा कि पिछले दिनों होली के मौके पर लियाकत शाह की फर्जी गिरफ्तारी करके उसने किया था।

गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे द्वारा राज्यों को आतंकवाद के नाम पर कैद मुस्लिम नौजवानों के मुद्दे पर स्क्रीनिंग कमेटी बनाने के लिये लिखे गये पत्र पर टिप्पणी करते हुये रिहाई मंच के प्रवक्ताओं शाहनवाज आलम और राजीव यादव ने कहा कि यूपीए सरकार को बताना चाहिए कि आतंकवाद के आरोप में जेलों में बन्द हजारों मुस्लिम युवकों की याद उसे सिर्फ विधानसभा और लोकसभा चुनाव में ही क्यों आ रही है। उन्होंने कहा कि शिंदे को पहले देश को यह बताना चाहिए कि उन्होंने इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में आईबी के अधिकारी राजेन्द्र कुमार का नाम सीबीआई की चार्जशीट में आने से बचाने के लिये क्यों आईबी और सीबीआई पर दबाव डाला। उन्होंने कहा कि यह दोहरा रवैया नहीं चल सकता है कि एक तरफ आतंकी वारदातों में लिप्त आईबी अधिकारियों को बचाने की कोशिश करें और वोट के लिये बेगुनाह मुस्लिम युवकों को छोड़ने की बात करें जो उन्हीं आईबी अधिकारियों के सांप्रदायिक षडयंत्रों का शिकार हुये हैं।

प्रवक्ताओं ने कहा कि सपा सरकार के मंत्री अहमद हसन का बयान जिसमें उन्होंने सपा सरकार में एक भी मुस्लिम नौजवान को आतंकवाद के आरोप में न गिरफ्तार करने के दावा किया था को झूठा करार देते हुये कहा कि इसी सरकार में 13 मई 2012 को सीतापुर के शकील, आजमगढ़ के जमातुर फलाह मदरसे के छात्र वसीम बट व सज्जाद बट और गोरखपुर से पिछले होली के दौरान लियाकत शाह को उठाया गया। यहाँ तक कि शकील के परिजन इस मसले पर अबू आसिम आजमी और जेल मंत्री व सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी से भी कई बार मिल चुके और मुख्यमंत्री के नाम कई बार ज्ञापन भी दिया है। प्रवक्ताओं ने अहमद हसन के इस बयान को भी भ्रामक बताया जिसमें उन्होंने दावा किया था कि मुजफ्फरनगर के पीड़ितों को सरकार ने दस-दस लाख रूपए दिये हैं। सच्चाई तो यह है कि अब भी पचास से अधिक ऐसी हत्याएँ हैं जिन्हें सरकार ने सांप्रदायिक हिंसा में हुयी हत्या माना ही नहीं है। सपा सरकार यदि ईमानदार हैं तो 10-10 लाख रुपए मुआवजा प्राप्त लोगों की सूची जारी करे।

रिहाई मंच ने कहा कि कुछ तथाकथित मुस्लिम धर्म गुरु और सपा नेता अबू आसिम आजमी जो बेगुनाह मौलाना खालिद की हत्या को बीमारी से हुयी मौत बताते हैं और उनकी सरकार मौलाना खालिद की जिन्दगी की कीमत 6 लाख रुपए उनके चचा को देने की कोशिश करती है, वो अबू आसिम आजमी आजकल मुजफ्फरनगर में मुसलमानों की कीमत लगा रहे हैं। अबू आसिम आजमी और ऐसे सरकारी मौलानाओँ को बताना चाहिए कि उन्होंने भाजपा के दंगाई नेताओं की गिरफ्तारी के लिये अब तक क्या किया है।

About हस्तक्षेप

Check Also

भारत में 25 साल में दोगुने हो गए पक्षाघात और दिल की बीमारियों के मरीज

25 वर्षों में 50 फीसदी बढ़ गईं पक्षाघात और दिल की बीमांरियां. कुल मौतों में से 17.8 प्रतिशत हृदय रोग और 7.1 प्रतिशत पक्षाघात के कारण. Cardiovascular diseases, paralysis, heart beams, heart disease,

Bharatendu Harishchandra

अपने समय से बहुत ही आगे थे भारतेंदु, साहित्य में भी और राजनीतिक विचार में भी

विशेष आलेख गुलामी की पीड़ा : भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रासंगिकता मनोज कुमार झा/वीणा भाटिया “आवहु …

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा: चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा : चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश Occupy national institutions : …

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

अच्छे नहीं, अंधेरे दिनों की आहट

मोदी सरकार के सत्ता में आते ही संघ परिवार बड़ी मुस्तैदी से अपने उन एजेंडों के साथ सामने आ रहा है, जो काफी विवादित रहे हैं, इनका सम्बन्ध इतिहास, संस्कृति, नृतत्वशास्त्र, धर्मनिरपेक्षता तथा अकादमिक जगत में खास विचारधारा से लैस लोगों की तैनाती से है।

National News

ऐसे हुई पहाड़ की एक नदी की मौत

शिप्रा नदी : पहाड़ के परम्परागत जलस्रोत ख़त्म हो रहे हैं और जंगल की कटाई के साथ अंधाधुंध निर्माण इसकी बड़ी वजह है। इस वजह से छोटी नदियों पर खतरा मंडरा रहा है।

Ganga

गंगा-एक कारपोरेट एजेंडा

जल वस्तु है, तो फिर गंगा मां कैसे हो सकती है ? गंगा रही होगी कभी स्वर्ग में ले जाने वाली धारा, साझी संस्कृति, अस्मिता और समृद्धि की प्रतीक, भारतीय पानी-पर्यावरण की नियंता, मां, वगैरह, वगैरह। ये शब्द अब पुराने पड़ चुके। गंगा, अब सिर्फ बिजली पैदा करने और पानी सेवा उद्योग का कच्चा माल है। मैला ढोने वाली मालगाड़ी है। कॉमन कमोडिटी मात्र !!

Entertainment news

Veda BF (वेडा बीएफ) पूर्ण वीडियो | Prem Kahani – Full Video

प्रेम कहानी - पूर्ण वीडियो | वेदा BF | अल्ताफ शेख, सोनम कांबले, तनवीर पटेल और दत्ता धर्मे. Prem Kahani - Full Video | Veda BF | Altaf Shaikh, Sonam Kamble, Tanveer Patel & Datta Dharme

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: