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चौहानी राष्ट्रवाद – राष्ट्र द्रोहियों में तो आज महात्मा गांधी को भी शामिल कर लिया जाता

चौहानी राष्ट्रवाद
चौहानी राष्ट्रवाद की बल्ले बल्ले
राष्ट्रद्रोहियों में तो आज महात्मा गांधी को भी शामिल कर लिया जाता
[button-red url=”#” target=”_self” position=”left”]राजीव मित्तल[/button-red] जेएनयू विवाद ने अजीबोगरीब स्थिति पैदा कर दी है…… हमारे घर के सबसे प्राचीन व्यक्ति काफी हद तक राष्ट्रवादी हो चुके हैं और अपन पर देशद्रोह का तमगा लगाने की फिराक में हैं…… जब से केंद्र में मोदी जी की सरकार बनी है महाशय मनोयोग से -अपनी बात- सुनते हैं और बीच बीच में हाथ ऊपर उठा कर जोड़ते हैं…… इस नाचीज के अंदर तभी से उनको देशद्रोह के कीटाणु नजर आने लगे क्योंकि ना हम सुनते हैं न हाथ जोड़ते हैं….. सोनिया गांधी से अपनी कोई रब्त जब्त नहीं, लेकिन किसी पुराने लेख का हवाला देकर कर अपन का नाता मुसोलिनी के खानदान से जोड़ने से नहीं चूकते ….. और हाँ वो हमारे सम्पादकत्व को भी नहीं बख्शते कि किस नामाकूल ने हमें ये पद सौंपा था …जब से टीवी पर उन्हें चौहान साहब की वीरता के दर्शन हुए हैं, वो अक्सर बुलवा कर दिखलाते हैं देखो है ना पृथ्वीराज चौहान सरीखा ….. हज़ार

साल बाद दिल्ली धन्य हो गई ….. वो राय पिथौरा का चौहान ये पटियाला हाउस का चौहान …..
पटियाला हाउस के चौहान ने राष्ट्रवाद का ऐसा सुर बांधा है कि सब उलट-पुलट हो गया….. अब हमें अमर मणि त्रिपाठी, रेल गाड़ी की पटरियां उखाड़ते आंदोलनकारी, बसें फूँकते हुड़दंगी, अपनी कार से दो-चार को ठोंक देने की क्षमता रखने वाले सलमान खान, प्रकाश शुक्ला और ददुआ की प्रतिमा विस्थापित करने वाले विधायक, एक युवक को लतिया रहे ओपीशर्मा, बैंकों से करोड़ों का कर्ज लेकर डकार जाने वाले उद्योगपति, किसानों की खाद बेच कर अपना मकान टाइलों से सजा देने वाले सज्जन पुरुष, सरकारी अस्पतालों की दवाइयाँ बेच कर डकार भी न लेने वाले डॉक्टर, डिग्री कॉलेज को बमपुलिस बना देने वाली वो प्रिंसिपल, दो मुसलमान लड़कों को मोहल्ले से निकाल देने वाले देश भक्त , सरकारी और सार्वजनिक सेवाओं को तबाह कर देने वालीं शख्सियत और ऐसे न जाने कितने चेहरे मसलन हैदराबाद के निज़ाम, ग्वालियर के सिंधिया और न जाने कौन कौन राष्ट्रवादी नज़र आ रहे हैं…….
राष्ट्र द्रोहियों में तो आज महात्मा गांधी को भी शामिल कर लिया जाता क्योंकि आज़ादी के बाद उन्होंने ब्रिटेन से महायुद्ध की एवज में मिले धन में से चौसठ करोड़ रुपये पाकिस्तान को दिलवाने के लिए अनशन जो किया था….. अंगेजों से लड़ते हुए मरे टीपू सुलतान को आप क्यों भूल जाते हैं, उस से बड़ा देशद्रोही भला है कोई……
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को इस लिए याद किया जा रहा है क्योंकि उन्हें स्तालिन के सोवियत संघ न जा पाने की मज़बूरी में हिटलर के जर्मनी जाना पड़ा …. भगत सिंह इसलिए अछूत हैं क्योंकि वो घोषित कम्युनिस्ट थे……. कल टीवी पर सिन्हा जी ने फरमाया कि हमारे यहां पहले राष्ट्र आया फिर हम राष्ट्रवादी बने…. इसके लिए उन्होंने कोई वैदिक श्लोक भी गुनगुनाया…. उनको बताने को मन कर रहा है कि हम भारतीयों में तो राष्ट्वाद की कल्पना कभी थी ही नहीं….. जिस देश में छह सौ रियासतें हों और और जिस देश में दो किलोमीटर से लेकर दो सौ किलोमीटर वाला हर टुकड़ा एक देश हो, जहां जेल में पड़ा बलात्कारी इसलिए चुनाव जीतता हो क्योंकि वोट उसकी जाति वालों ने दिए, जहां एक वर्ग इसलिए पूरे शहर को जहन्नुम बना दे क्योंकि उनके वर्ग के एक बन्दे का क़त्ल हो गया, वहां हमें वैदिक श्लोक गुनगुना कर बताया जा रहा है कि हम राष्ट्रवाद के मामले में पश्चिम से बहुत आगे हैं …..
जबकि हमारे देश में है कोई टोनी ब्लेयर जैसा नेता जो प्रधानमंत्री के पद से हटने के बाद टैक्सी से स्टेशन पहुंचे और लाइन में लग कर टिकट ले ….. आज़ाद भारत में मधु लिमये, राम मनोहर लोहिया या त्रिपुरा के मुख्यमंत्री, दो-चार नाम और … बस…. पश्चिम का राष्ट्रवाद नागरिक को राष्ट्र से जोड़ता है तभी तो वो कोई भी भी नियम कानून तोड़ने से पहले अपने अंदर झाँक लेता है …. और हमारे राष्ट्रवाद का सम्बन्ध केवल जुगाड़ और अपना भला करने से है और हर तरह का कानून तोड़ने से है …. मोदी जी देश में सौ स्मार्ट सिटी बनाने के काम पर लगे हुए है …. अच्छा होता कि वो पहले देशवासियों को अच्छा नागरिक बना दिए होते ….. या उस तरफ बढ़ने की प्रेरणा दे दिए होते ……
अब अंत में मोदी से एक बात पूछ ली जाए कि वो पाकिस्तान किस खुशी में गए थे….. आपको अपने पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री का हश्र मालूम नहीं था क्या …. क्या आपको यह भी मालूम नहीं कि पाकिस्तान में लोकतंत्र की कोई हैसियत नहीं….. जब लोकतंत्र केवल मुखौटा है तो वहां नवाज़ शरीफ की क्या औकात है इतना तो जान लेना चाहिए था आपको … ओबामा ने आपकी पीठ थपथपा दी आप खुश … उसी ओबामा ने आपको अंगूठा दिखा कर पाकिस्तान को पकड़ा दिए लड़ाकू विमान….. जय हिन्द

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