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जयललिता – बनना था वकील, बन गईं अभिनेत्री फिर नेत्री

जयललिता – बनना था वकील, बन गईं अभिनेत्री फिर नेत्री
तमिलनाडु की अम्मा जे जयललिता अब हमारे बीच नहीं हैं। भले ही उन्होंने राजनीति के सफर में आखिरी सांस ली हो, लेकिन बचपन से ही उनका ख्वाब एक कामयाब वकील बनना था। जयललिता की किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और उनके करियर की शुरुआत फिल्मों से हुई।
राजनीति में अपना लोहा मनवा चुकीं अम्मा का फिल्मी करियर भी बेहद शानदार रहा है।
कर्नाटक के अयंगर परिवार में जन्मी जयललिता की पढ़ाई बेंगलुरू और चेन्नई के कांवेंट स्कूलों से हुई।
जब वो महज दो साल की थीं, तब उनके पिता का देहांत हो गया। आर्थिक स्थिति डगमगाने की वजह से जयललिता की मां ने तमिल फिल्मों में अभिनय करना शुरू कर दिया, साथ ही जयललिता ने भी चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर अपना फिल्मी करियर शुरू किया।

1964 में जब जयललिता महज 15 साल की थीं, तो उन्हें कन्नड़ फिल्म चिन्नाड़ा गोम्बे में लीड रोल मिला।
धीरे-धीरे वह तमिल फिल्मों की अग्रणी अभिनेत्रियों में भी शुमार हुईं और इसी दौरान उन्हें तमिल फिल्म के मशहूर अभिनेता एमजी रामचंद्रन का साथ मिला। जयललिता उनकी फिल्मों को देखकर ही बड़ी हुई थीं और जब वो कोई भी उनकी फिल्म देखकर आती थीं, तो घर में भाई के साथ एमजी का रोल अदा करती थीं।
उनकी हसरत थी कि रामचंद्रन के साथ काम करने का उन्हें मौका मिले और उनकी ये हसरत बहुत जल्द पूरी हो गई।
1965 से 1972 के दौर में उन्होंने अधिकतर फिल्में एमजी रामचंद्रन के साथ कीं।
फिल्मी पर्दे पर जयललिता और रामचंद्रन की जोड़ी को बेदह पसंद किया गया।
रामचंद्रन तमिल फिल्म के बादशाह होने के साथ ही राजनीति के भी बादशाह थे। इसी वजह से जयलिता के साथ उनके पर्दे की जोड़ी को असल जिंदगी में खूब उछाला गया।

चर्चे आम हो गए कि रामचंद्रन और जयललिता के प्रेम संबंध हैं।
1970 में एक दौर ऐसा भी आया जब पार्टी के लोगों के दबाव में एमजीआर ने दूसरी अभिनेत्रियों के साथ काम करना शुरू कर दिया। वहीं जयाललिता भी दूसरे अभिनेताओं के साथ फिल्मी पर्दे पर दिखने लगीं।
करीब 10 सालों तक इन दोनों ने एक साथ कोई फिल्म नहीं की। भले ही पर्दे पर उनकी जोड़ी को दूर कर दिया गया हो, लेकिन असल जिंदगी में वो हमेशा साथ रहे।
1968 में जयललिता ने हिन्दी फिल्म इज्जत में भी काम किया और इस फिल्म में उनके हीरो थे धर्मेंद्र। यह जयललिता की इकलौती हिंदी फिल्मं थी।
तमिल दर्शकों को जयललिता और रामचंद्रन को पर्दे पर एक साथ देखने की इतनी आदत हो गई थी कि एमजी और जया को एक बार फिर साथ आना पड़ा।

1973 में जया और एमजीआर एक बार फिर पर्दे पर साथ दिखे।
इन दोनों ने कुल मिलाकर 28 फिल्मों में साथ काम किया।
1980 में जया ने अपनी आखिरी तमिल फिल्म में काम किया।
जयललिता ने कुल मिलाकर 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। उन्हें तीन बार फिल्म फेयर के बेस्ट साउथ अभिनेत्री के अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है।

 

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