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जलेस-मुनाफे की हवस ने प्राकृतिक संसाधनों की लूट को और तेज किया

जलेस का प्रांतीय सम्मेलन कल भिलाई में, राजेश जोशी भी रहेंगे
रायपुर। जनवादी लेखक संघ का प्रांतीय सांगठनिक सम्मेलन कल भिलाई में सेक्टर-10 स्थित कॉफ़ी हाउस सभागार में होने जा रहा है. इस सम्मलेन में प्रसिद्ध कवि तथा जलेसं के राष्ट्रीय सचिव राजेश जोशी और मध्यप्रदेश जलेसं के संरक्षक रामप्रकाश त्रिपाठी भी शिरकत करेंगे.
सम्मेलन में पूरे प्रदेश से लगभग 100 लेखकों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों के भाग लेने की संभावना है, जिसमें कपूर वासनिक, विजय सिंह, भास्कर चौधरी, मुमताज, शाकिर अली, रजत कृष्ण, बसंत त्रिपाठी, शरद गौड़, सूरज प्रकाश राठोड़, के. रविन्द्र, अजय चंद्रवंशी, विनोद साव आदि प्रमुख हैं.
आज यहां जारी एक वक्तव्य में सम्मेलन की आयोजक इकाई दुर्ग की ओर से नासिर अहमद सिकंदर ने कहा कि साम्राज्यवादी वैश्वीकरण के दौर में मनुष्य की निजी जिंदगी और उसके सरोकारों पर जिस तरह बाज़ार और उपभोक्तावाद को हावी करने के रास्ते खोजे जा रहे हैं, उसी का नतीजा है कि साहित्य से भी विचारधारा को बाहर करने की कोशिशें हो रही है. इसीलिए देश में आज वामपंथ और दक्षिणपंथ के बीच, प्रगतिशील-जनवादी मूल्यों और प्रतिक्रियावादी-फासीवादी ताकतों के बीच तथा संस्कृति और अपसंस्कृति के बीचा का संघर्ष तेज हो गया है.

संस्कृतिकर्मी मानव समाज के समक्ष उपस्थित चुनौतियों से अपने संस्कृतिकर्म के जरिये जूझ रहे हैं
उन्होंने कहा कि मुनाफे की हवस ने प्राकृतिक संसाधनों की लूट को और तेज किया है और मनुष्य की अस्मिता पर ही संकट खड़ा कर दिया है. इस संकट की अभिव्यक्ति न केवल राजनीति के क्षेत्र में, बल्कि साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में भी हो रही है. यही कारण है कि सहिष्णुता बनाम असहिष्णुता, गाय बनाम दलित-अल्पसंख्यकों के मानवाधिकार, राष्ट्रवाद बनाम अंधराष्ट्रवाद जैसे राजनैतिक मामले भी साहित्य की परिधि में आ गए हैं और संस्कृतिकर्मी मानव समाज के समक्ष उपस्थित इन चुनौतियों से अपने संस्कृतिकर्म के जरिये जूझ रहे हैं.
नासिर ने बताया कि अपने स्थापना काल से ही जलेसं प्रगतिशील-जनवादी मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं तथा आम जनता की एकता का पक्षधर रहा है. आज जब सामंतवादी-साम्राज्यवादी, सांप्रदायिक-फासीवादी ताकतों द्वारा मानव सभ्यता के इन्हीं मूल्यों पर हमला किया जा रहा है, छत्तीसगढ़ में जनवादी लेखक संघ ने उन तमाम लेखकों, कलाकारों और बुद्धिजीवियों को एकजुट करने का संकल्प लिया है, जो मनुष्य को मनुष्य की तरह देखते-सम्मान करते हैं तथा श्रम के शोषण के खिलाफ लड़ाई में एक समतावादी समाज के निर्माण का सपना देख रहे हैं. यह सम्मेलन इन्हीं लेखकीय दायित्वों पर विचार-विमर्श करेगा.

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