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जिन्होंने ललित मोदी व विजय माल्या को भगाया, उनसे ईमानदारी की उम्मीद कैसी ?-मायावती

मोदी सरकार ने पैदा किया ‘अघोषित इमरजेंसी’ जैसा माहौल : मायावती

लखनऊ।  उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष मायावती ने देश में 500 व 1,000 रुपये के नोट बंद करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले को आर्थिक आपातकाल करार देते हुए कहा है कि उनकी नीयत साफ नहीं है। बसपा अध्यक्ष ने गुरुवार सुबह पार्टी कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि देश की सीमा पहले की तरह ही असुरक्षित है। मोदी सरकार से जनता मायूस है। सरकार का ध्यान किसानों की ओर न जाकर देश के बड़े-बड़े पूंजीपतियों की ओर है।

बसपा प्रमुख ने कहा कि लोगों का चुनाव से ध्यान हटाने के लिए बड़े नोटों को बंद करने का कदम उठाया गया है।

बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष, सांसद (राज्यसभा) व पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सुश्री मायावती की प्रेस वार्ता के मुख्य अंश):-

अपने देश का लगभग हर नागरिक यहाँ जीवन के हर क्षेत्र में व्याप्त व्यापक भ्रष्टाचार, अराजकता, कानून-व्यवस्था, पर्यावरण, स्वास्थ्य आदि से लेकर जनहित व जनकल्याण के लगभग हर मामले में सरकार की आपराधिक घोर लापरवाही के साथ-साथ यहाँ कानून का राज-काज ना होकर, कानून का पक्षपातपूर्ण व इसका जुगाड़ के हिसाब से इस्तेमाल होने के कारण काफी ज्यादा परेशान रहता है और इस अभिशाप से मुक्ति पाने के लिये ’’क़ानून द्वारा क़ानून का राज’’ चाहता है, ना कि ’’जिस की लाठी उसकी भैंस वाली जंगलराज की व्यवस्था’’ चाहता है।

इस क्रम में इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रत्येक देशवासी भ्रष्टाचार आदि पर अंकुश लगाने तथा भ्रष्टाचारियों पर सख़्त कानूनी कार्रवाई करने की भी अपेक्षा केन्द्र व राज्य सरकारों से करता है, परन्तु इस मामले में सरकारों का रवैया खासकर आमजनता की नजरों में स्वार्थभरा तथा इसकी आड़ में अपनी कमजोरियों व विफलताओं पर से उनका ध्यान बांटने वाला प्रदर्शित नहीं होना चाहिये, जो हमें परसों रात को, इस सन्दर्भ में केन्द्र की वर्तमान भाजपा सरकार व प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा लिये गये, उनके फैसले में साफतौर से झलकता हुआ नजर आ रहा है।

देश में आयेदिन बढ़ रहे भ्रष्टाचार व कालेधन पर वास्तव में सख्ती से शिकंजा कसने में यदि इनकी सही धारणा व खासकर यहाँ गरीब व ईमानदार लोगों के हितों में, उनके लिए कुछ कर गुजरने की नीति व नीयत साफ व ईमानदार होती, तो तब फिर इनको यहाँ अपने देश में छिपाये रखे कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए केन्द्र में अपनी पूर्ण-बहुमत की सरकार बनने पर, इतना लम्बे समय का अर्थात् लगभग ढाई वर्षों का इन्तजार नहीं करना पड़ता।

यह साफतौर से स्पष्ट हो जाता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केन्द्र में अपनी सरकार का लगभग आधा समय पूरा होने पर भी उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में अभी तक भी अपने लोकसभा चुनावी वायदों का लगभग एक चौथाई-हिस्सा कार्य भी पूरा नहीं किया है।

अर्थात् पूरे देश में, पिछली कांग्रेसी सरकार की तरह ही, केन्द्र की वर्तमान भाजपा सरकार में भी हर स्तर पर अभी भी देश के लोगों में जबरदस्त मायूसी छायी हुई है। और खासकर यहाँ गरीबी, महँगाई व बेरोजगारी आदि भी पहले जैसी ही बनी हुई है।

समाज में दलित, आदिवासी, पिछडे़ व मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक ये सभी लोग यहाँ विभिन्न स्तर पर जुल्म-ज्यादती के शिकार हो रहे हैं। साथ ही हर समय इनके ऊपर इनका आर.एस.एस. का डन्डा भी चलता रहता है।

इस समय किसान व छोटा व्यापारी एवं निर्माण-कर्ता आदि भी काफी ज्यादा दुःखी व पीडि़त है, अपने देश की सीमायें अभी भी पहले जैसी ही असुरक्षित बनी हुई है, सैनिक भी आयेदिन यहाँ लगातार शहीद हो रहे हैं।

केन्द्र की पिछली कांग्रेसी व वर्तमान भाजपा सरकार के भी चाल, चरित्र, चेहरा, नीति एवं नीयत आदि में हमें तिलभर भी परिवर्तन होता हुआ नजर नहीं आ रहा है।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा के आम चुनाव नजदीक आते हुये देखकर व अपनी इन सब कमियों पर से जनता का ध्यान बांटने के लिए इन्होंने अब अपनी सरकार के लगभग ढाई वर्ष बीत जाने के बाद यहाँ ठीक विधानसभा के आमचुनाव होने से कुछ समय पहले ही देश में कालेधन पर अंकुश लगाने के लिए जो परसों रात इमरजेन्सी लगाने जैसा वातावरण पैदा किया है।

साथ ही इसकी आड़ में जो गरीब व मध्यम वर्गीय लोगों को काफी गहरी आर्थिक चोट पहुँचाई है, तो इससे दुःखी होकर अब ये लोग यहाँ प्रदेश में जल्दी ही होने वाले विधानसभा आमचुनाव में इसकी बीजेपी एण्ड कम्पनी के लोगों को जरूर काफी सख्त सजा देंगे, चाहे प्रदेश में चुनाव होने से पहले यह पार्टी यहाँ अपनी कितनी भी परिवर्तन यात्रायें निकालने के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी परिवर्तन रैली आदि क्यों ना कर लें।

केन्द्र सरकार द्वारा परसों रात 500 व एक हजार रुपये के नोट सिरे से ही अचानक बन्द करने के फैसले को देखा जाये तो यह उस मानक पर पूरी तरह से सही नहीं उतरता है।

केन्द्र सरकार के इस फैसले से जो तस्वीर उभर कर देश की जनता के सामने आयी है तो वह यह है कि इससे पूरे देश में हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल है व हर तरफ हाहाकार मच गया है, क्योंकि उससे आमजनता का दैनिक जनजीवन काफी ज़्यादा प्रभावित हुआ है। हर आदमी इससे उलझ गया है।
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश की आम जनता में त्राहि-त्राहि मची
प्रधानमंत्री के इस प्रकार के फैसले से आमजनता के दैनिक जीवन के कार्य काफी ज्यादा बुरी तरह से प्रभावित हुये हैं और परसों रात को लोग अपने-अपने घरों से ऐसे बाहर निकल आये जैसेकि भूकंप आने पर लोग घबराकर अपनी जान बचाने के लिये अपने-अपने घरों से बाहर निकल पड़ते हैं।

पेट्रोल पम्पों पर लम्बी कतारें लग गयी। ए.टी.एम. पर लोग रात को काफी ज्यादा परेशान रहे, अस्पतालों में काम ठप्प हो गये, लोगों ने अपना-अपना कारोबार बन्द कर दिया।

दवा की दुकानों तक ने अपनी शटर गिरा दी तथा 500 व 1,000 का नोट रखने वालों को अपने घर जाने में परेशानी हुयी तथा लोग भूखे रहने तक को मजबूर हुये अर्थात कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक देश की आमजनता में त्राहि-त्राहि मची रही है और अभी भी मची हुई है।

देशहित का नहीं 500 व 1000 के नोट को बन्द करने का फैसला

वैसे तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार के अब तक के लगभग ढाई वर्षों के शासनकाल मे अनेकों ऐसे जनविरोधी व किसान-विरोधी फैसले लिये गये हैं जिनसे देश के बड़े-बड़े पूंजिपतियों व धन्नासेठों को ही अधिकांश फायदा हो रहा है, परन्तु 500 व 1,000 के नोट को तत्काल प्रभाव से बन्द करने का फैसला पहले आकलन में व्यापक जनहित व देशहित का नहीं लगता है क्योंकि इस बारे में हमारी पार्टी का यह मानना है कि सरकार के जिस फैसले से खासकर देश का गरीब, मजदूर, कर्मचारी, किसान व हर मेहनतकश तबका परेशान हो जाये और उसे खाने तक के लाले पड़ जायें, तो ऐसे फैसले को व्यापक जनहित व देशहित का फैसला नहीं कहा जा सकता है।

हर देशवासी की पेशानी पर चिन्ता की छोटी-बड़ी लकीरे पड़ गई हैं

अपने इस फैसले की घोषणा करते हुये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि लोगों को सरकार के इस फैसले से खुश होकर देश में ईमानदारी का उत्सव मनाना चाहिये, परन्तु इनके इस फैसले से हर देशवासी की पेशानी पर चिन्ता की जो छोटी-बड़ी लकीरे पड़ गई हैं तो भला फिर ऐसे में कौन कोई उत्सव कैसे मना पायेगा, यह भी सोचने वाली बात है।

इसके साथ ही केन्द्र सरकार अपने इस फैसले के बारे में यह कहती है कि इससे खासकर कालेधन पर लगाम लगेगा, परन्तु क्या देश की लगभग 125 करोड़ जनता, जिसमें लगभग आधी से ज्यादा आबादी यहाँ गरीब, मजदूर, छोटे व्यापारियों व मेहनतकश जनता की है, तो क्या उनके पास कालाधन है जो उन्हें भी इस प्रकार से परेशान होने को मजबूर किया जा रहा है।

इस प्रकार बीजेपी व प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार का यह फैसला कुल मिलाकर देश व जनहित में कम और किसी को तकलीफ में देखकर आत्मसंतोष प्राप्त करने वाला ज्यादा लगता है। वैसे भी केन्द्र की वर्तमान भाजपा सरकार आज तक ना तो अपने चुनावी वायदे के मुताबिक अपनी सरकार बनने के 100 दिन के भीतर विदेशों से कालाधन वापस लाकर उसे देश के प्रत्येक गरीब परिवार के हर सदस्य को 15 से 20 लाख रुपये देने का अपना यह चुनावी वायदा निभा पायी है, और ना ही किसी भी बड़े भ्रष्टाचारी को आज तक कोई सख़्त सज़ा ही दे पायी है या दिलवा पायी है।

जिन्होंने ललित मोदी व विजय माल्या को भगाया, उनसे ईमानदारी की उम्मीद कैसी ?

साथ ही, जिस भाजपा की सरकार में बैठे लोगों ने ललित मोदी व विजय माल्या जैसे महाभ्रष्टाचारी लोगों को देश से भगाने का काम किया हो, तो फिर ऐसी सरकार से भ्रष्टाचार से सख्ती से व पूरी ईमानदारी पूर्वक लड़ने की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

इतना ही नहीं बल्कि केन्द्र की वर्तमान भाजपा सरकार देश मंे अब तक भ्रष्टाचारियों की अप्रत्यक्ष तौर पर मदद करने के क्रम में ही नई-नई योजना लागू करती रही है और उनके कालेधन को सफेद बनाने का उन्हें भरपूर मौका भी देती रही है और साथ ही उन लोगों के नाम तक जानने का अधिकार देश की जनता को नहीं दिया गया है। फिर भी, उस कालेधन का जो पैसा सरकारी खजाने में आया है उसको तो कम-से-कम देश के अति-गरीबों, बेसहारा व असहाय लोगों में बांटने का यह जन-कल्याणकारी कार्य इस सरकार को करना चाहिये था, लेकिन वह भी नहीं किया गया है।

इसके अलावा, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अमित शाह द्वारा 500 व 1,000 रुपये के नोट के चलने का अचानक ही बंद करने के परसों रात के फैसले का इसे ’सर्जिकल स्ट्राइक’ कह कर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सराहना करना वास्तव मेे इनकी यह अंधभक्ति होने का ही बयान प्रतीत होता है। जबकि भाजपा अध्यक्ष को यह मालूम होना चाहिये कि ’सर्जिकल स्ट्राइक’ का कार्य क्षेत्र बहुत ही सीमित व लक्षित होता है।

मोदी की सरकार को अपनी सोच, मानसिकता व कार्यशैली को व्यापक जनहितैषी बनाने की जरुरत

अगर देश के 500 या 1,000 बड़े-बड़े पूंजिपतियों व धन्नासेठों के यहाँ ही एक साथ छापेमारी होती तो फिर यह देश में इनका यह वास्तव में कालेधन के खिलाफ ’सर्जिकल स्ट्राइक’ माना जा सकता था और तब फिर पूरे देश की आमजनता निश्चित ही इसकी सराहना भी करती, परन्तु जिस सरकारी फैसले से देश की समस्त आमजनता ही परेशान हो जाये व देश की लगभग 125 करोड़ की आबादी ही अफरा-तफरी का शिकार हो जाये तथा हर गृहस्थी व्याकुल हो जाये, उसे ’सर्जिकल स्ट्राइक’ कहकर उसकी प्रशंसा भला यहाँ कैसे की जा सकती है?

इसलिए केन्द्र सरकार को चाहिये कि वह व्यापक जनहित व देशहित के ऐसे फैसले ले जिससे अपने देश का आम-जनजीवन प्रभावित ना हो और साथ ही फिर विभिन्न कानूनो का सख़्ती से व ईमानदारी पूर्वक अनुपालन करके उस लक्ष्य को भी प्राप्त किया जा सकता है अर्थात् प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार को अपनी सोच, मानसिकता व कार्यशैली को यहाँ व्यापक जनहितैषी बनाने की जरुरत है।

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