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ठेंगे पे सियासत … लफ़्फ़ाज़ी की हुकूमत !

ससुरा जइसन काश्मीर दखल कर लीन्हीं,  वइसन ही बंगाल आउर दिेहलिवा दखल कर लिहिस, धखत रह। एको सीट इधर उधर होने दे बै चैतू, फिर वही पताका हिंदी हिंदू हिदुस्तान, सारे जहां से अच्छा कत्लगाह यह।
चैतू बै कहां कहां भटकल ह, कथे कथे जात ह। बड़का मउका आ गइल हो।
चनाजोर गरम खबर हके आरआरऐश वैलेंटाइन डे मनावल चाहे ।
मीडिया खबर ह के 14 फरवरी को आने वाले वैलेंटाइन डे अर्थात प्रणय दिवस पर अखिल भारतीय हिन्दू महासभा प्यार करने वाले जोड़ों को विवाह बंधन में बांधने का कार्य करेगी।  हालांकि यह धर्मान्तरण कार्यक्रम का ही एक हिस्सा होगा,  लिहाजा महासभा ने प्रणय दिवस जैसा विशेष दिवस चुना है।
बताया गया है कि महासभा अपने इस कार्यक्रम के तहत अंतरजातीय जोडों का स्वागत करेगी और इसके लिये महासभा ने अपने कार्यालय में शादी कराने का भी निश्चय किया है।
महासभा के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश कौशिक ने बताया कि प्रणय दिवस को प्रेम विवाह दिवस के रूप् में मनाया जायेगा,  ताकि यह दिन यादगार साबित हो सके।
हमउ सोच रहल वानी के आपण गुरुजी जो हर साल मंदाकिनी नंदाकिनी मनमोहिनी दर्शन खातिरे कड़ाके की सर्जी मा पच्चीस साल से गंगासागर बिना नहाय जावत रहिन, उनर क्रिया कर्म भी हो जाई।
विधर्मी आबादी हो हमार दप्तर आस पास भौते।
आरआरऐश बंगाल मा वैलेंटाइन डे मनावल रहि तो भागवत महाराज हमार गुरुजी खातिर दुल्हन कोई खोजि निकालो।
जौन विधर्मी होय, उकर घर वापसी हो जाई तो फिन केसरिया हो जायई सगरा बंगाल।
राहुल सिन्हा साहेब, सिद्धार्थ सिंह भागमबाग किरपा कर दी तो शारदा फर्जीवाड़ा मध्ये हमउ खातिर एको गुरुमाता मिल जाइब।
उदय प्रकाश भइया बड़का लेखक हुआ करै बै चैतू।
फेसबुक ओपन करते ही उनर फोटू धांसू और ई उनर झन्नाटा  मंतव्य के ठेंगे पे सियासत … लफ़्फ़ाज़ी की हुकूमत ! फटाके से लिख दिहिस, यूज करलन वानी।
एकदम सटीक चित्र है जनता जनार्दन को ठेंगा का।
सगरे खिलाड़ी राजनीति के बुरबक बनाये जात ।
बनाये जात त हम कहां तक खनै रहबै गढ़वा आपण खातिर।
गिरै का कोई हद्द होईबे चाहि।
वक्त आ गइलन, डढ़वा से निकर बै , चैतू।
जो खना है, सो तोप दे उनर कब्र बनाइके।
फिर नाच उसपर दमादम मस्त कलंदर।
हमार वोट उनर नोटे आगे फेल ह।
ससुरा जइसन काश्मीर दखल कर लीन्हीं, वइसन ही बंगाल आउर दिेहलिवा दखल कर लिहिस, देखत रह।
एको सीटइधर उधर होने दे बै चैतू, फिर वही पताका हिंदी हिंदू हिदुस्तान, सारे जहां से अच्छा कत्लगाह यह।
आइडिया खातिर उदय भाई का आभार। पहिले उनर दर्शन फिर आपण रामलीला। महाभारत गीता महोत्सव और वैलेंटाइन डे एकमुश्त।
कहत वानी देहलिवा मा फर्स्ट क्लास चुनाव बा।
मतबल के उथे जौन चुनाव होइखे, उ डिजिटल बायोमैट्रिक रोबोटिक क्लोनी ड्रोन वगैरह वगैरह जो होई सो होई।
विकास गाथा का मजा ई ह कि परिभाषा और पैमाना बदल दी तो ग्रोथे ग्रोथ ह, उत्पादने उत्पादन ह फिन कागजो मा गरीबी उन्मलन क्रिया कर्म निबट जाई।
जनता जनार्दन वास्ते ठेंगा तय होइबै करै ह।
मसलन जीडीपी के बेस ईयर में बदलाव किया गया है। सरकार ने बेस ईयर वित्त वर्ष 2005 से बदलकर वित्त वर्ष 2012 किया है। अब जीडीपी आकलन में ग्लोबल मार्केट प्राइस पर फोकस रहेगा।
एकर दूसरा पहलू भी देख लीज्यो महाराज के वाकस दर तेज हो गइलन पण जनवरी में घरेलू इंडस्ट्री की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है।
ना जाने सुषमा को मिशेल से छुपाइके किस गरज से देहलिवा से हटाइके किरण जलवा बिखेरे फेंकू शो मस्त चल रहल वानी।
ई कहत है प्याजे माफिक राजनय है।
स्ट्रैटेजिक गोलबंदी अमेरिका और इजराइल सातथे तो कैलाश मानरोवर मा मोदी की जयजात्रा खातिरे चाइना साथे कारोबारी वार्ता हेतु  दलित महिला सुजाता सिंह को विदेश सचिव पदमुक्त कर दिहिस ।
फिन जयशंकर जो चाइना एक्सपर्ट बाड़न, सुषमा साथ उथे नत्थी कर दिहिस।
सुषमा नाही बाकी ससुर सगरे मंत्री सांसद, वित्तमंत्री , सीरियल बहू, परधानमंत्री कैंप डाल ह देहलिवा मा के फर्स्टक्लास राजधानी के सुपर नागरिकों के लिए फर्स्ट क्लास सरकार चुनल चाहि।
उ सगरे देश के ध्वस्त जनपदों के जइसन भूक्खड़ नंगो जनता नाही।
ना पीपली लाइव शो गुंजाइशो है।
नत्थू बेभाव, बैमौत धमाको मा मर जाई तो कछु लाइव ना होई।
थोड़ भौत मजा शाजिया इल्मी की केसरिया बहार जो जस्टिस काटजू ने बिखेरी , फिन  क्रेनकी जो हवा पंक्चर होई और कौनो निर्मल सिंह का बाइट मिलल, ई गरम मसाला है।
बाकीर चिकन कबाबो ह।
आपैक चुनाव घोषणा पत्र देख लीजौ, बाकीर देश मा आम नागरिकौ के किस्मत मा एइसन धूम धड़का का।
बाकी जो ठेंगा हुइबे करै बारकीर देश खातिर, वहींच ठेंगा देहलिवा में खूंटी बन गइलन।
पिछलका चुनाव मा जइसन ठेंगा देखलन, ई चुनाव मा फिर वहींच ठेंगा।
बंगाल मा नाटक जम रहल बा।
मुक्त मुकुल तो बंद मातंग।
दीदी जेहादे मा।
दीदी जो माटी उत्सव करलन बाड़न, उमा विभीषण फसल लहलहायो के कोलकाता मा केसरिया लहरायो।
मतुआ पुत्तर सुब्रत ठाकुर कहलन बाड़ा के पिटा गयो रे। सिमपैथी लहर वानी।
भीतरघात अंदेशा आउरे बा।
देहलिवा मा संतन दरबारे झगड़ा भारी।
भीतरघाते वाइरल बंगाल मार्फते संक्रमित ह।
सबै किरण बेदी को धूल चटावल वास्ते गोलबंद बा, दुश्मनो खेमे मा ई जोर हल्ला ह।
बाकीर बंगाल मा टोल फ्री नंबर घुमाइक केके बीजेपी हो गइलन, कुछो पता नाही।
बुक फेयरवा मा केसरिया ड्राइव पुरकश हो।
भारत अमेरिकी दोस्ती का परचम लहरायो।
देहलिवा मा सबै राम हनुमान होइखे चाहि त सीता मिया क वनवास चाहि।
त ओबामा का जलवा भी चाहि।
फर्स्ट क्लास का कहत बै चैतू, देहलिवा ग्लोबल हो गइलन।
मेट्रो सवारी करकै वैतरनी तर गइलन दिल्लीर वातानुकूलित आम आदमी।
बंगाल मा सबसे बढ़िया खबर तो ई ह के जो बाच्चा लोग भूख हड़ताल पर पांचे दिन बंद ह एशएशशी बिल्डंग मा और मीडिया बाइट ना मिलल, नौकरी मिलल के नाही मिलल कह ना सकत, पण अब उनन को भी मीडिया कवरेज मिलल हो।
चैतू तोर मस्त जलबा बै के होक आलोड़न , होक कलरव गड़बड़झाला हुई गवा।
बेरोजगार भाई बहन वास्ते सड़क मा उतर गइलन स्टुडेंट सगरे।
पाशे आछे जादवपुर।
बुक फेयर मा कल ही भारत अमेरिका ब्रिज बनाउल कातिर राजनय पर किताबो एक अमेरिकी राजदूत तान दिहिस।
सुबहोसुबह अखबार बांचिकै सविता बाबू मचल गयी रहिस।  ताना जो मारन भूल गइलन, उकर जलवा बिखरल कहत का के उनका बुक फेयरवा मा जाइब चाहि।
ससुरा पचास लाख एक करोड़ फ्लैटवा मा रहलन बाड़न सखीवृंद सगरी रोजै कारौ मा पिकनिक मना रहिस बुक फेयरवा मा।
रामकृष्ण चरणामृत पढ़ रहिस सविता बाबू।
के चाहि के मिशन मा घर वापसी जरुरी बा।
हम तो पति वति नइखे अबहुं।
लिव इन ह।
फ्रेंडली गवर्नेंस ह।
मुक्त बाजार त जौन दुकान मा जेकर मन करै, जावै, हम काहे रोकी।
पहेली हमर खातिर ई ह के हिंदुत्व खातिर जौन ई मिशन ह, उमा दुई दुई दफा अर्जी डालै पर हिंदुत्व ह्रदय सम्राट को दीक्षा काहे ना मिलल।
बूझो तो बताइयो।
तेली दर्शन अबहुं राजदर्शन हो गइलस सो मिशन रेड कार्पेट सजा रहिस।
पहेली हमर खातिर ई ह के जौन मछुआरा कन्या रानी रासमणि रही, जिनने दक्षिणेश्वर मा रामकृ्ष्ण धाम बनावल ह ।
फिन जां विवेकानंद अवतार होई।
उनर नामोनिसान नाही बेलुर मा।
दक्षिमेश्वर मा मंदिरसम्मुखे जौन रासमणि मंदिर ह, उथे कोई माल चढ़बै ना करै, चैतू बै।
इथे उ नजारा होय , उथे पुरखौती  मा जो नजारा होय।
आदिवासी पुरखौती मा समा गइलन।
सैकड़ों आदिवासी गांव उजाड़।
जल जंगल जमीन उजाड़।
मस्त कारोबार तेज बत्तीवाला।
दुलारो बाबा चमकल ह।
बांधलि आश्रमे मस्त मस्त।
वैलेंटाइन डे टालू आहे।
चमचमाचम उ बहाऱ वइसन के हिंदी बांग्ला तमामो न्यूज चैनल ब्राउज करके हार गइलन हम, ससुरे हर कहीं शापिंग माल वानी।
कोनो ना कोनो ताबीजयजंत्र मंत्र आयुर्वेद महिमा बिखेरत ह।
न्यूज सिरे से गायब।
पर्दा मा स्क्रालिंगओ गायब।
टोल फ्री नंबर ह।
मुक्त बाजार मा एको नंबर ठोंकिके जो चाहि बेच देब।
मुक्त बाजार मा एको नंबर टोंकिके जो चाहि खरीद लेबो।
मुहब्बतो नीलाम ह।
गुजरात वाइब्रेंट अब दिशा ह, दशा ह।
डालरो मा कारोबार होइबे करै गुजरातमा।
देश बेचल वास्ते वहींच एक्सचेंजवा बन रहिल सेजवा मा।
अबहुं आरआरऐश का नयका फंडा होय।
लव जेहाद इति।
घर वापसी जारी बा।
अबहुं जौन वैलेंटाइल ढेर विरोध करत रहि, मराल पुलिस बजरंगी होइखै रहि, उ आयुर्वेदिक कैंसर मधुमेह चिकित्सा के वैदिकी गणित और वैदिकी साइंस के वैदिकी इतिहास वृतांत जइसन अब वैलंटाइन डे मनावल चाहि।
प्रेम पुजारी तो उ आसाराम बापू भी रहै।
रामदेवो बाबा कपाल भाति योग मार्फते आयुर्वेद कारपोरेट बन गइलन।
त अबहु वैलेंटाइन डे वैदिकी हो गइल।
प्रेम त चाहि तो विधर्मी पार्टनर पटाये चाहि।
फिन उनर घर वापसी उपरांते विवाह वैध, प्रेम वैध।
धर्मांतरण धर्म स्वतंत्रता बन गइल।
सर्वधर्म प्रार्थना जारी रहिस।
ससुरे अंतरजातीय प्रेम आउर अंतरजातीय विवाह कै एइसन कैंपेन करै तो बाबासाहेब आंबेडकर तर जइहैं, जातो पांतो ना रहै।
अंतरजातीय विवाहे खातेर लव नाही।
अंतरजातीय विवाह वास्ते वैलेंटाइन डे नाही।
मनुस्मृति अनुशासन बहाल चाहि।
पलाश विश्वास

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