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डॉ सुनीलम को गिरफ्तार करने की तैयारी में मध्य प्रदेश सरकार

सुनीलम के खिलाफ वारंट और हजार रुपए का ईनाम
भोपाल। मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के लिए सिर दर्द बने किसान नेता डॉ सुनीलम को जेल भेजने की तैयारी हो रही है। वे मध्य प्रदेश में नोटा का अभियान चला रहे हैं जिससे कमलनाथ समेत कई उम्मीदवार संकट में है। इसलिए उन्हें चुनाव तक जेल भेजने की योजना बन रही है। जन आंदोलनों की अभियान समिति ने डॉ सुनीलम के खिलाफ इस साजिश की निंदा की है और सभी आंदोलनकारी ताकतों से इसका प्रतिकार करने की अपील की है।
हाल ही में डॉ सुनीलम के खिलाफ झाबुआ के सीजीएम न्यायालय द्वारा धारा 188, भादवि के तहत स्थायी वारंट जारी किया है तथा उनकी गिरफतारी कराने वाले व्यक्ति को 1000 रुपए का ईनाम देने की घोषणा झाबुआ पुलिस अधिक्षक द्वारा की गई है। झाबुआ थाने में डॉ. सुनीलम के विरूद्ध 2009 में तब मुकदमा दर्ज किया गया था जब वे गुजरात के गोधरा जिले की फैक्ट्रियों में झाबुआ के 750 से अधिक आदिवासीयों की सिलोसिस से मौत के बाद आदिवासियों को मुआवजा देने तथा कंपनीयों के मालिकों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे थे। तब धारा 144 के उल्लंघन करने के आरोप में उन पर धारा 188 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
                झाबुआ पुलिस द्वारा फरार घोषित कर ईनाम घाषित किए जाने का समय महत्वपूर्ण है। क्योकि डॉ. सुनीलम् को 6-7 अप्रैल को छिंदवाडा जिले का दौरा करना था। पहले तो उनके दौरे कार्यक्रम की सभाओं की अनुमति निरस्त की गई तथा नोटा के प्रचार की अनुमति रद्द कर दी गई। इसके बावजूद जब डॉ. सुनीलम छिंदवाडा जिले का दौरा करने पर अडे रहे तब झाबुआ पुलिस द्वारा स्थाई वारंट जारी कर दिया गया ताकि डाॅ सुनीलम की छिंदवाडा में गिरफ्तारी की जा सकें।
                गत् विधान सभा चुनाव में भी इसी तरह का वाक्या सामने आया था जब डाॅ सुनीलम को छिंदवाडा पहुचने पर स्थाई वारंट का हवाला देकर अदालत के समक्ष उपस्थित कराया गया था जिसके चलते वे दौरा नही कर सके थे तथा पूरा दिन 2 प्रकरणों में जमानत कराने में उन्हेाने अपना समय छिंदवाडा अदालत में गुजारा था। उस समय भी 2009 के स्थाई वारंट जारी किये गये थे।
                इसमें दिलचस्प तथ्य यह है कि डॉ. सुनीलम को मुलताई अदालत द्वारा 12 जनवरी 1998 को किसान आंदोलन पर हुये पुलिस गोली चालन के बाद 250 किसानों के साथ उन पर दर्ज किये गये 67 मुकदमों में से 3 मुकदमों में 52 वर्ष की सजा सुनाई गयी थी। डॉ. सुनीलम जब चार माह भोपाल जेल में थे तब मध्य प्रदेश सरकार नें डॉ. सुनीलम को जमानत दिये जाने का विरोध करते हुये एसडीओपी मुलताई के माध्यम सें जबलपुर उच्च न्यायालय के समक्ष 18 जनवरी 2013 को शपथ पत्र देकर आपत्ति दर्ज की थी। इस आपत्ति में डॉ. सुनीलम के खिलाफ लंबित 24 प्रकरणों का हवाला दिया गया था। जिसमें झाबुआ तथा छिंदवाडा के प्रकरणों का उल्लेख नहीं था। जिन प्रकरणों में डॉ. सुनीलम के खिलाफ स्थाई वारंट जारी किये गये इससे अधिक आश्चर्य जनक बात यह भी है कि 4 माह तक जेल में रहने के बावजूद छिंदवाडा तथा झाबुआ के वारंट भोपाल जेल तामिली के लिए नही पहुंचाए गये ।
                उल्लेखनीय है कि डॉ. सुनीलम देश भर में जनआंदोलनों का नेतृत्व करने वाले लोकसभा उम्मीदवारो के समर्थन में देश व्यापी दौरा कर रहे है।
                यह देखना दिलचस्प होगा कि डॉ. सुनीलम मध्य प्रदेश पुलिस उनके प्रदेश दौरे के समय गिरफतार करती है या देश के अन्य राज्यो में दौरे के समय उन्हे गिरफतार किया जाता है। डॉ. सुनीलम के मुताबिक उन्हे झाबुआ में उनके खिलाफ किसी भी प्रकरण के दर्ज होने की जानकारी नही है। उन्होने इस संवाददाता को बताया कि वे गत् 5 वर्षो में कम से कम 20 बार झाबुआ गये हैं। लेकिन उन्हे कभी भी इस प्रकरण का कोई भी नोटिस नहीं दिया गया। डॉ. सुनीलम बताते हैं कि मध्यप्रदेश पुलिस हर आंदोलन के बाद उन पर मुकदमा दर्ज करने की आदि हो चुकी है। अब तक मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा 133 मुकदमे दर्ज किये गये हैं। जिनमें से 25 प्रकरण लंबित है जबकि जेल से बाहर आने के बाद मुलताई अदालत द्वारा उन्हें दो मुकदमो में बरी किया जा चुका है। जनादेश न्यूज़ नेटवर्क

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