Home » समाचार » तृणमूल समर्थक एक्जिट पोल में मोदी-दीदी गठबंधन का खुलासा

तृणमूल समर्थक एक्जिट पोल में मोदी-दीदी गठबंधन का खुलासा

तृणमूल के हक में 184 सीटों का दावा और भाजपा को नौ सीटें जबकि वामदलों को सिर्फ 62 और कांग्रेस को 32 सीटें…
कोलकाता से राहुल सिन्हा, हावड़ा से रूपा गागुली और मयुरेश्वर से लाकेट चटर्जी को सीटें दे दी मां माटी मानुष ने…
दक्षिण बंगाल में दीदी का किला जस का तस हो तो भाजपा को नौ सीटें कैसे दी जा रही हैं, पहेली यह है…
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
कोलकाता (हस्तक्षेप)। बंगाल में अंतिम चरण का मतदान पूरा होते न होते मां माटी मानुष का एक एक्जिट पोल जारी करके दीदी की सत्ता में वापसी का ऐलान कर दिया गया है।
पक्ष-विपक्ष के ऐसे दावे में नया कुछ नहीं है और दीदी ने पांचवे चरण में ही कह दिया था कि उन्हें बहुमत हासिल हो गया है और उन्हें पूर्व मेदिनीपुर में सोलह में से सोलह चाहिए तो कूच बिहार की नौ सीटें भी चाहिए बोनस बतौर।
इस बोनस के लिए उनने पूर्व मेदिनीपुर सांसद शुभेंदु अधिकारी के हवाले छोड़कर कूचबिहार में तंबू गाढ़ लिया।
इस एक्जिट पोल में खास बात है कि तृणमूल को 183 सीटें दी गयी हैं तो भाजपा को नौ सीटें,जबकि भाजपा के किसी नेता ने सार्वजनिक तौर पर ऐसा कोई दावा नहीं किया और वे अब भी एकाधिक सीट की बातें कर रहे हैं।
इस एक्जिट पोल को जारी करने वाले ब्लॉग पर दावा किया गया है कि ये किसी दल से संबंधित नहीं है बल्कि एक आम आदमी की पहल है। ब्लॉग के परिचय में यह कहकर “Aam Aadmi who want to see corruption free India” बेहद खूबसूरत मज़ाक भी किया गया है। ब्लॉग पर दिए गए परिचय में कहा गया है –

“MA MATI MANUSH” or “MAA MATI MANUSH” (Mother Motherland Public) is a blog related to West Bengal & India in which W.B’s ‘Aam Aadmi’(common people) ‘s views & recent developments are written. In this blog CPIM’s Harmad(COMMUNISTS GOONS) things & Congress’s corruption is exposed. It’s not any party’s official blog, It is just a passion of an Aam Aadmi who want to see corruption free India.. This Blog supports #IndiaFirst .”
एक्जिट पोल के मुताबिक चुनाव नतीजे इस प्रकार हैंः
TMC likely to get 183 seats(+/- 15) with 45% vote share,
Lefts may get 67 seats (+/- 10) with 32% vote share,
Congress will get around 32 seats (+/- 5) with 8% voteshare while
BJP can win 9 seats (+/- 4)with 11% vote share only
वाम नेताओं को भी यह शक आखिर तक सता रहा था कि परंपरागत कांग्रेस के वामविरोधी वोटर उसके हक में वोट डालेंगे या नहीं, तो इस एक्जिट पोल में भी वाम और कांग्रेस के वोट जोड़े नहीं गये हैं।
इस एक्जिट पोल में तृणमूल के हक में 183 सीटें 45 फीसद वोटरों के समर्थन के दावे के साथ दी गयी हैं वहीं वामदलों के हक में 32 फीसद वोट के साथ 62 सीटें और कांग्रेस के हक में आठ फीसद वोटर के साथ 32 सीटें दिखायी गयी हैं।
जबकि भाजपा के वोट पिछले लोकसभा चुनाव के सत्रह फीसद से काफी कम सिर्फ ग्यारह फीसद दिखाये गये हैं।
अब एक्जिट पोल के मुताबिक आठ फीसद वोट के साथ कांग्रेस के 32 सीटों और 11 फीसद वोट के साथ भाजपा को मात्र नौ सीटों के बीजगणित को सुलझाना हमारे बस में नहीं है।
फिर आठ फीसद वोट के साथ कांग्रेस की 32 सीटों के मुकाबले वामदलों  को 32 फीसद वोट के साथ 62 सीटें ही क्यों है, यह समझना बहुत मुश्किल काम है।
हालांकि मतदान निष्पक्ष और स्वतंत्र होने के दावे के सच निकलने पर सत्ता दल और वाम दलों और कांग्रेस के वोट अलग-अलग भी मानें तो दोनों पक्षों के बीच वोटों का अंतर कमसकम तेरह फीसद पिछले चुनावों के रिकार्ड के मुताबिक बहुत ज्यादा है।
हकीकत में यह अंतर दो तीन फीसद से ज्यादा नहीं होना चाहिए।
खास बात है कि इस एक्जिट पोल में खास कोलकाता में और हावड़ा में एक-एक सीट भाजपा को दी गयी है यानी जोड़ासांको से राहुल सिन्हा और हावड़ा से रूपा गांगुली की जीत सत्ता पक्ष ने मान ली है।
इसके अलावा अलीपुर द्वार में दो, नदिया, उत्तर 24 परगना, वर्धमान, बीरभूम और पश्चिम मेदिनीपुर में एक-एक सीट भाजपा को सत्ता पक्ष के इस एक्जिट पोल में दी गयी है।
इसका मतलब है कि बीरभूम के मयुरेश्वर से लाकेट चटर्जी की जीत भी पक्की मानी जा रही है। खास बात है कि जिला या राज्य स्तर पर भाजपा ने अभतक ऐसा कोई दावा नहीं किया है।
कोलकाता और हावड़ा के अलावा बीरभूम और पश्चिम मेदिनीपुर के दीदी के सबसे मजबूत गढ़ में भाजपा के खाते में एक-एक सीटडालने का मतलब बहुत गहरा है। कमसकम ये चार सीटें भाजपा को तृणमूल की मदद बिना मिलना असंभव है।
जमीनी स्तर पर भाजपा को दक्षिण बंगाल में बीस फीसद तक वोट मिलने के आसार हैं, तो इससे सीटें कितनी और बढ़ सकती हैं भाजपा की, इस एक्जिट पोल के विशेषज्ञों से पूछा जाना चाहिेए।
फिर भाजपा को अगर बीस फीसद तक वोट मिल गये तो क्या तब भी तृणमूल कांग्रेस को 45 फीसद, वामदलों को 32 फीसद और कांग्रेस को आठ फीसद वोट भी मिल सकते हैं और उनकी सीटें दावे के मुताबिक उतनी ही रहेंगी, ये सावल भी मौजूं हो सकते हैं।
दूसरा यह कि अगर वाम 32 और कांग्रेस आठ का जोड़ हो और भाजपा बीस हो तो भी क्या 45 फीसद तृणमूल वोट का गणित बना रहेगा। अगर तृणमूल का वोट फीसद 2 से 3 फीसद घट गया और वह वाम कांग्रेस से जुड़ गया और भाजपा के वोटभी बढ़ गये तो क्या होगा, कोई जवाब 19 मई के बाद ही मिलेगा।
वैसे इस एक्जिट पोल में बीरभूम समेत उत्तर बंगाल की बढ़त मान ली गयी है और तृणमूल को कूच बिहार में चार, जलपाईगुड़ी में चार, अलीपुरद्वार में 1, दार्जिंलिंग में 2, उत्तर दिनाजपुर में 2, दक्षिण दिनाजपुर में 3, मालदा और मुर्शिदाबाद में दो-दो ही सीटें दी गयी हैं तो बीरभूम में सात सीटों का दावा है। यानी बीरभूम को लेकर उत्तर बंगाल में सिर्फ 27 सीटें दीदी को उत्तर बंगाल से मिलने की उम्मीद है यानी बाकी बंगाल में दीदी को बहुमत से ज्यादा 157 सीटें मिल रही हैं। इसका मतलब है कि दक्षिण बंगाल में दीदी का किला जस का तस हो तो भाजपा को नौ सीटें कैसे दी जा रही है, पहेली यह है।

About हस्तक्षेप

Check Also

media

82 हजार अखबार व 300 चैनल फिर भी मीडिया से दलित गायब!

मीडिया के लिये भी बने कानून- उर्मिलेश 82 thousand newspapers and 300 channels, yet Dalit …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: