Home » दिल्ली-यूपी के बॉर्डर पर पहुँचते ही हाँफने लगी सुनामी

दिल्ली-यूपी के बॉर्डर पर पहुँचते ही हाँफने लगी सुनामी

तीसरे दौर के मतदान के बाद साफ हो गयी तस्वीर
शेष नारायण सिंह
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के तीसरे दौर के बाद यह साफ हो गया है कि इस चुनाव में कहीं कोई लहर नहीं है। दिल्ली, हरियाणा, केरल की सभी सीटों और उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र आदि राज्यों की कुछ सीटों पर मतदान के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि कहीं कोई लहर नहीं है। दिल्ली के चुनावों के बारे में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के हवाले से एक अंग्रेजी अखबार में खबर छपी है कि पार्टी दिल्ली में केवल तीन सीटों पर जीत की उम्मीद कर रही है जबकि आम आदमी पार्टी की तरफ से दावा किया गया है कि उनकी पांच सीटों पर जीत पक्की है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जिन दस सीटों पर चुनाव हुये हैं, वहाँ भी भाजपा के लोग बहुत आशावान नहीं हैं। नरेंद्र मोदी के आसपास एक लहर बनाने की कोशिश कर रहे भाजपा नेताओं को निराशा हुयी है क्योंकि मुजफ्फरनगर के साम्प्रदायिक विवाद के बावजूद भी भाजपा के समर्थन में ऐसी हवा नहीं बन सकी जिस से चुनाव जीता जा सके।
इस बात में कोई शक नहीं है कि भाजपा के महासचिव अमित शाह की कोशिशों का नतीजा यह है कि जिस पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अजीत सिंह के साथ चुनाव लड़ने की वजह से वोट मिलते थे वहाँ हर सीट पर भाजपा बिना किसी गठबंधन के मुख्य लड़ाई में है। हरियाणा में भी भाजपा को ओम प्रकाश चौटाला के परिवार की पार्टी से दूरी बनाने का नुकसान हो गया है। जिस पार्टी से भाजपा ने हरियाणा में समझौता किया, वह पार्टी राज्य में कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोक दल के सामने कमजोर नजर आ रही थी। दिल्ली की सभी सीटों पर 1984 वाली लहर के टक्कर का मतदान हुआ लेकिन इस बार सभी सात सीटों पर कांग्रेस कमजोर नजर आई।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का दावा है कि दिल्ली की तीन सीटों पर कांग्रेस की जीत निश्चित है। भाजपा के विश्लेषण के बाद पार्टी में बहुत निराशा है और दावा किया जा रहा है कि पश्चिमी दिल्ली, दक्षिण दिल्ली और उत्तर पूर्वी दिल्ली में पार्टी की जीत पक्की है। साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा की जीत की पक्की भविष्यवाणी की जा रही है। भाजपा के नेता स्वीकार कर रहे हैं कि दिल्ली में मोदी लहर तो नहीं चली लेकिन आप के पक्ष में कांग्रेसी मतदाताओं का रुझान देखा गया।
आम आदमी पार्टी के आतंरिक आकलन में उनके नेता पांच सीटों पर अपनी जीत की संभावना मान रहे हैं। उनका कहना है कि नई दिल्ली और दक्षिण दिल्ली में उनकी पार्टी कमजोर है। नई दिल्ली सीट पर कांग्रेस की संभावना जताई जा रही है जबकि दक्षिण दिल्ली को भाजपा के खाते में माना जा रहा है। कांग्रेस का परम्परागत वोट बैंक लगभग पूरी तरह से आम आदमी पार्टी की तरफ चला गया है। मुस्लिम और गरीब आदमियों के वोट बहुत बड़ी संख्या में आम आदमी पार्टी में गये हैं।
पश्चिमी उतर प्रदेश की दस सीटों पर हर सीट पर मुकाबला भाजपा से ही है लेकिन अलग-अलग सीटों पर जाट, गूजर और मुस्लिम मतदाताओं के वोट अलग- अलग उम्मीदवारों को मिलने के कारण जीत की संभावना मुश्किल हो गयी मसलन गौतमबुद्धनगर में कांग्रेस उम्मीदवार के भाजपा में चले जाने की वजह से मुकाबला सीधा हो गया था। बहुजन समाज पार्टी के पूर्व उम्मीदवार के समाजवादी पार्टी में चले जाने के कारण गूजरों में एकता भी देखी गयी और समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार की जीत की संभावना बढ़ गयी है। हालाँकि मुकाबला भाजपा से ही है। सहारनपुर में कांग्रेस का उम्मीदवार मजबूत है जबकि, मुजफ्फरनगर में बहुजन समाज पार्टी के कादिर राना के पक्ष में माहौल दिखा। इस सीट पर भाजपा ने बहुत बड़े पैमाने पर प्रचार किया था कि यहां दलित भी कादिर राना के खिलाफ वोट करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
अजीत सिंह की सीट पर भी मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर और भाजपा प्रत्याशी को जाटों में वह समर्थन नहीं मिला जिसके कारण उनकी भी जीत की सम्भावना कम हो गयी। इस सीट पर समाजवादी पार्टी की स्थिति भी मजबूत है लेकिन अजीत सिंह की जीत की संभावन बताई जा रही है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर लगातार नजर लगाए रहने वाले एक जानकार ने बताया कि इन दस सीटों पर मुसलमानों ने उन्हीं सीटों पर बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार को वोट दिया है जहां समाजवादी पार्टी कमजोर है वरना मुस्लिम मतदाता आम तौर पर साइकिल पर ही रहा है। इसका कारण यह बताया गया कि हालांकि मुजफ्फरनगर के दंगे के दौरान राज्य सरकार के अधिकारियों ने गैर जिम्मेदाराना काम किया था लेकिन बाद में जब मुलायम सिंह यादव ने कमान संभाली तो मुसलमानों की नाराजगी को संभाल लिया और अब मुसलमानों में समाजवादी पार्टी से नाराजगी नहीं है। इस तरह से दंगों के बावजूद भी कहीं कोई लहर नहीं है। उत्तर प्रदेश में लड़ाई फिर पहले जैसे ही है।

About हस्तक्षेप

Check Also

भारत में 25 साल में दोगुने हो गए पक्षाघात और दिल की बीमारियों के मरीज

25 वर्षों में 50 फीसदी बढ़ गईं पक्षाघात और दिल की बीमांरियां. कुल मौतों में से 17.8 प्रतिशत हृदय रोग और 7.1 प्रतिशत पक्षाघात के कारण. Cardiovascular diseases, paralysis, heart beams, heart disease,

Bharatendu Harishchandra

अपने समय से बहुत ही आगे थे भारतेंदु, साहित्य में भी और राजनीतिक विचार में भी

विशेष आलेख गुलामी की पीड़ा : भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रासंगिकता मनोज कुमार झा/वीणा भाटिया “आवहु …

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा: चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा : चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश Occupy national institutions : …

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

अच्छे नहीं, अंधेरे दिनों की आहट

मोदी सरकार के सत्ता में आते ही संघ परिवार बड़ी मुस्तैदी से अपने उन एजेंडों के साथ सामने आ रहा है, जो काफी विवादित रहे हैं, इनका सम्बन्ध इतिहास, संस्कृति, नृतत्वशास्त्र, धर्मनिरपेक्षता तथा अकादमिक जगत में खास विचारधारा से लैस लोगों की तैनाती से है।

National News

ऐसे हुई पहाड़ की एक नदी की मौत

शिप्रा नदी : पहाड़ के परम्परागत जलस्रोत ख़त्म हो रहे हैं और जंगल की कटाई के साथ अंधाधुंध निर्माण इसकी बड़ी वजह है। इस वजह से छोटी नदियों पर खतरा मंडरा रहा है।

Ganga

गंगा-एक कारपोरेट एजेंडा

जल वस्तु है, तो फिर गंगा मां कैसे हो सकती है ? गंगा रही होगी कभी स्वर्ग में ले जाने वाली धारा, साझी संस्कृति, अस्मिता और समृद्धि की प्रतीक, भारतीय पानी-पर्यावरण की नियंता, मां, वगैरह, वगैरह। ये शब्द अब पुराने पड़ चुके। गंगा, अब सिर्फ बिजली पैदा करने और पानी सेवा उद्योग का कच्चा माल है। मैला ढोने वाली मालगाड़ी है। कॉमन कमोडिटी मात्र !!

Entertainment news

Veda BF (वेडा बीएफ) पूर्ण वीडियो | Prem Kahani – Full Video

प्रेम कहानी - पूर्ण वीडियो | वेदा BF | अल्ताफ शेख, सोनम कांबले, तनवीर पटेल और दत्ता धर्मे. Prem Kahani - Full Video | Veda BF | Altaf Shaikh, Sonam Kamble, Tanveer Patel & Datta Dharme

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: