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दुनिया के पागलों एक हो

पुण्‍य प्रसून अब हंसते हैं तो नकली लगते हैं
बिहार में तीन चरण का मतदान पूरा होने पर आज महीने भर में पहली बार मैंने प्राइम टाइम पर टीवी खोला। सबसे पहले बाबा रामदेव का सामान बेचती भाजपा सांसद हेमा मालिनी दिखाई दीं। उसके बाद आज तक पर बेहद घटिया कॉमेडी और मिमिकरी करते शेखर सुमन दिखे।
ज़ी न्‍यूज़ पर बैठे सुधीर चौधरी के चेहरे से ग़लाज़त टपक रही थी, लिहाजा उस पर ठहरने का सवाल ही नहीं पैदा हुआ। फिर एनडीटीवी पर पहुंचे तो देखे कि नीरजा चौधरी भाजपा के प्रवक्‍ता संबित पात्रा के तर्क की सराहना कर रही थीं। टाइम्‍स नाउ पर कांग्रेसी प्रवक्‍ता अजय कुमार सीधे अजायबघर से निकल कर आए लग रहे थे। भाजपा के श्रीकांत शर्मा उनसे तुम-तुम कर के बात कर रहे थे, लेकिन वे पीली बंडी पहने पता नहीं क्‍यों ऐंवेई खुश हो रहे थे।
आज पहली बार अलग-अलग चैनलों पर इधर बीच प्रधानजी का भाषण देता चेहरा दिखा। पता नहीं क्‍यों, वे थके हुए और खीझे हुए लग रहे थे। रैलियों में जबरन मज़ाक कर रहे थे। राहुल गांधी अब भी बउचट लगते हैं। दस बजे अरनब गोस्‍वामी ने अमित शाह का विशेष इंटरव्‍यू लिया। अमित शाह पहले की ही तरह उज्‍जड्ड लग रहे थे। अरनब ज़रूर थोड़ा सटके हुए थे। अमित शाह बार-बार दो-तिहाई बहुमत की बात कह कर डरा रहे थे। मुझे अमित शाह के चुनावी गणित पर पूरा भरोसा है। उन्‍हें देखकर ”खलनायक” का गाना याद आता है, ”चोली के पीछे क्‍या है…।” अमित शाह की चोली ईवीएम है। मसक गई तो सारे ज्ञानियों का आकलन तेल लेने जा सकता है कि भाजपा हार रही है। मुझे वाकई शक़ हो रहा है।
बहरहाल, सीएनएन-आइबीएन पर रामविलास पासवान का इंटरव्‍यू भी जबरन और फर्जी था। यह आदमी अब वैसे भी भरोसे के काबिल नहीं रहा। पुण्‍य प्रसून का प्रोग्राम मैंने जान-बूझ कर नहीं देखा। अब वे हंसते हैं तो नकली लगते हैं। साढ़े दस बजे मैं चुपचाप ”भाभीजी घर पर हैं” वाले चैनल पर कट लिया। वहां तिवारी और भरभूती को करवाचौथ का व्रत रखे देखकर अच्‍छा लगा। सक्‍सेना ”पागल यूनियन जिंदाबाद” का प्‍लेकार्ड लेकर घूम रहा था। कह रहा था कि देश भर के पागलखानों में इलेक्ट्रिक शॉक देने वाली मशीनें खराब हो गई हैं। यूनियन की मांग है कि मशीनें बदली जाएं। उसे सुनकर अचानक दाढ़ी वाले बाबा याद आए, ”दुनिया के पागलों एक हो।”
अभिषेक श्रीवास्तव

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