देवी नहीं देवयानी

देवेन्द्र सुरजन

देवयानी खोब्रागडे को वापिस दिल्ली बुलाकर सरकार ने ठीक किया है और अब उन पर वही अनुशासनात्मक कारवाही की जानी चाहिए जो अमेरिका में होती। देवयानी का बर्ताव साफ़ सुथरा बिलकुल नहीं है और हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि नौकरानी संगीता रिचर्ड भी भारतीय है और उसकी ओर तो कोई देख ही नहीं रहा है। देवयानी खोब्रागडे पिछली दो पीढ़ियों से अनुसूचित जाति की होकर भी क्रीमीलेयर वर्ग की है और उनको किसी तरह की छूट कम से कम जातिगत आधार पर नहीं दी जानी चाहिए। विदेश सेवा की अधिकारी होने की वजह से उनको अधिकारियों का समर्थन मिलना स्वाभाविक है लेकिन यह सरकार का दायित्व है कि वह नौकरानी संगीता रिचर्ड के बारे भी न्याय संगत विचार करे।

देवयानी के पहले न्यूयार्क कोंसुलेट प्रभुदयाल के साथ भी ऐसी ही घटना हुयी थी। उन पर भी न्यूयार्क पुलिस ने इसी तरह का मामला कायम किया था और वे भी स्थानान्तरण पाकर ही अपनी प्रतिष्ठा बचा पाये थे। अमेरिका जाने और वहाँ बस जाने का लोभ आम तौर पर भारतीयों में देखा जाता है। अपने रुतबे के मुताबिक देवयानी ने कम वेतन पर निजी नौकरानी रखने के लिये फर्जी दस्तावेजों को बनाने और पेश करने का कुचक्र रचा तो संगीता रिचर्ड ने इसी फर्जीवाड़े से अमेरिका में बस जाने की कामना की। अक्सर यह देखा जाता है कि भारत से लोग नौकर बन कर येन केन प्रकारेण अमेरिका पहुँच तो जाते हैं लेकिन जब वापिसी का वक़्त आता है या वहीं कोई दूसरी बेहतर नौकरी मिलने का इंतज़ाम हो जाता है तो वर्तमान मालिक के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट कर शोषण और यातना देने का केस बनवा दिया जाता है और पुलिस संरक्षण पाकर नौकर खिसक लेता है। देवयानी देवी नहीं है यह पक्का है और नौकरानी के प्रति उनका ‘खूब रगड़े’ जैसा व्यवहार भी असम्भव नहीं है लेकिन अब भारत सरकार को संगीता रिचर्ड के बारे में भी यह तस्दीक करना चाहिए कि वह कितनी कर्णप्रिय है और कितनी कर्कश क्योंकि दस्तावेजों के फर्जीवाड़े में वह भी बराबरी की दोषी है।

[author image=”https://fbcdn-sphotos-c-a.akamaihd.net/hphotos-ak-ash3/558864_569432449758991_677937811_n.jpg” ] देवेन्द्र सुरजन, लेखक प्रतिष्ठित “देशबंधु” अखबार समूह के पूर्व निदेशक हैं[/author]