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देशद्रोही हैं संविधान को नकार कर पूँजीवादी नीतियाँ चलाने वाले – जस्टिस सच्चर

सोशलिस्ट पार्टी का द्विवार्षिक राष्टीय अधिवेशन बीते 17-18 मई 2013 को त्रिवेन्द्रम, केरल, में सम्पन्न हुआ। मुख्य अतिथि जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने अपने उद्घाटन भाषण में पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुये कहा कि पुनर्गठित सोशलिस्ट पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन केरल में होने का विशेष महत्व है। केरल के साथ समाजवादी आन्दोलन का पुरान व गहरा रिश्ता है। यहीं त्रावणकौर में थानु पिलै के नेतृत्व 1954 में पहली सोशलिस्ट सरकार बनी थी। उस सरकार के शासनकाल में हुयी पुलिस फायरिंग में 8 नागरिक मारे गये थे। डॉ. लोहिया ने ‘लोकतन्त्र में गोलीबारी’ का सख्त विरोध करते हुए थानु पिलै सरकार को इस्तीफा देने के लिये कहा था। उस मुद्दे पर सोशलिस्ट पार्टी विघटन का शिकार हो गयी थी लेकिन लोहिया अपनी माँग से पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा आज जबकि देश पुलिस राज्य में बदलता जा रहा है, संप्रग सरकार पूँजीवादी नीतियों को परवान चढ़ा रही है, साम्प्रदायिक ताकतें मजबूत हो रही हैं, सोशलिस्ट पार्टी ही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने देश के संविधान को नकार कर पूँजीपतियों के हित में नीतियां बनाने वाली संप्रग सरकार को देशद्रोही करार देते हुए सोशलिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं से उसे उखाड़ फेंकने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो भी राजनीतिक पार्टी और सरकार देश के संविधान की उल्लंघना करके नवउदारवादी नीतियों को आगे बढ़ती हैं वे सभी देशद्रोही हैं।

अध्यक्षीय उद्बोधन में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भाई वैद्य ने कहा कि दो साल पहले सोशलिस्ट पार्टी की पुनर्स्थापना नवउदारवादी नीतियों का जड़मूल से विरोध कर समाजवादी व्यवस्था स्थापित करने के उद्देश्य से की गयी थी। इस दौरान पार्टी ने अपनी विचारधारात्मक पहचान कायम करते हुये देश के 20 राज्यों में विस्तार किया है। देश की राजनीति में आने वाला समय सोशलिस्ट पार्टी का होगा यह तय है।

पार्टी के महासचिव डॉ. प्रेम सिंह ने कहा कि अगले 6 महीनों में देश के बाकी राज्यों में पार्टी की इकाइयों का गठन हो जायेगा। केरल में पार्टी की मजबूत हकाई बन चुकी है जिसका फायदा अगले विधानसभा चुनाव में होगा।

पार्लियामेंटरी बोर्ड के चेयरमैन पन्नाला सुराणा ने कहा कि आगामों आम चुनाव में पार्टी लगभग सभी राज्यों में अपने उम्मीदवार उतारेगी।

अधिवेशन में राजनीति, अर्थनीति, शिक्षानीति, स्वास्थ्य नीति, विदेशनीति, आंतरिक सुरक्षा नीति, पर्यावरण नीति आदि पर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किये गये। पार्टी ने साफ कहा कि विकास के पूँजीवादी मॉडल की जगह समाजवादी मॉडल लागू करना होगा। सभी को केजी से पीजी तक मुफ्त, समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। पार्टी ने उत्तर-पूर्व से अफ्सपा हटाने, आधुनिक भारत की पहली महिला अध्यापिका सावित्री बाई फुले को भारतरत्न देने और बहादुर शाह जफर के अवशेष रंगून से वापस लाने की माँग की।

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