Home » समाचार » धर्मांतरण अब जिहाद है

धर्मांतरण अब जिहाद है

भारत जिहाद के भूगोल में शामिल हो चुका है और अब जिहाद का दूसरा नाम धर्मांतरण है। हमने छह साल तक मेरठ के दंगे देखे हैं और बरेली में भी साल भर रहा हूं। सिखों के सफाये के वक्त भी मैं मेरठ में था तो इंदिरा गांधी की हत्या के तुरंत बाद सफदर जंग अस्पताल से दिल्ली को धू-धू जलते मेरे पिता ने देखा था, जो मेरठ में भी कर्फ्यू और गोली मारो आदेश के मध्य मेटिकल कालेज के टीबी वार्ड में बंद थे महीने भर, लगभग अकेले और आग और धुआं का सिलसिले में उन्हें कोई फर्क महसूस न हुआ था।
हमने दंगो के उन अनुभवों को कहानियों में दर्ज किया है और ऐसी ही कहानियों का संग्रह है अंडे सेंते लोग। एक उपन्यास भी है, उनका मिशन। फुरसत है नहीं वरना कुछ टुकड़े वहीं से डाल देता।
वैसे दिन प्रतिदिन जो हो रहा है और जो अमन चैन की फिजां है, भोगे हुए यथार्थ के मुकाबले वे हकीकत बयां करती कहानियां भी बासी कढ़ी है। अब शहरों की दंगाई भीड़ राजकाज के मध्य देहातों को तबाह करने लगी है और तबाह खेतों और खलिहानों में, बंद कल-कारखानों में दंगों की लहलहाती फसल है जिसे धर्मांतरण अभियान मुकम्मल जिहाद की शक्ल दे रहा है।
इसी सिलसिले में आने वाली कयामत का जरा अंदाजा भी लगाइयेगा क्योंकि बीबीसी की एक स्टडी में गुरुवार को सामने आया है कि सिर्फ नवंबर में जिहाद के नाम पर दुनिया भर में हो रही हिंसा में करीब 5 हजार लोगों की मौत हो चुकी है।
स्टडी के मुताबिक 664 आतंकवादियों ने करीब 14 देशों पर हमले किए, जिनमें चार देशों- इराक, अफगानिस्तान, सीरिया, नाइजीरिया के हालात सबसे गंभीर हैं। इस देशों में हुई हिंसा में सबसे ज्यादा लोगों की मौत हुई है। बीबीसी ने यह स्टडी इंटरनैशनल सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ रैडिकैलाइजेशन (आईसीएसआर) के साथ की, जिसका मकसद यह जानना था कि एक महीने में जिहादी हिंसा में कितने लोगों की मौतें हुईं।
आतंकवादियों से बड़े आतंकवादी वे ही तो
आंतकवादियों से बड़े आतंकवादी तो वे हैं जो बजरिये राजनीति और सत्ता नस्ली वर्चस्व जनसंहार संस्कृति के धारक वाहक राष्ट्रनेता वगैरह-वगैरह हैं।
ताजा खबर यह है कि अभी कथित धर्मांतरण को लेकर विवाद थमा भी नहीं था कि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने आज यह कहकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया कि ‘भारतीय नागरिकों की इच्छा’ के अनुरूप बाबरी मस्जिद स्थल पर राम मंदिर का निर्माण होना चाहिए। यह धर्मातंरण, शुद्धिकरण, घर वापसी का संघ परिवारी अभियान राम राज्य के लिए भयादोहन कार्यक्रम भी है,जाहिर है।
प्रणव उवाच, आपातकाल परिणामों से अनजान इंदिरा
साथ ही सबसे मजेदार खबर तो यह है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि 1975 में जो आपातकाल लगाया था, उसके सिलसिले में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी इसकी अनुमति देने वाले संवैधानिक प्रावधानों से वाकिफ नहीं थी तथा सिद्धार्थ शंकर राय के सुझाव पर उन्होंने यह निर्णय लिया था।
गोडसे राष्ट्रभक्त था?
वैसे एक तमाशा यह भी कि राज्यसभा में गुरुवार को कांग्रेस के सदस्यों ने महात्मा गांधी की हत्या के दोषी नाथूराम गोडसे को महाराष्ट्र में एक समारोह के दौरान महिमामंडित किये जाने का भारी विरोध किया तथा इस मुद्दे पर हुए हंगामे के कारण सदन की बैठक को दो बार स्थगित करनी पड़ी।
हुआ यह कि बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने अपने एक बयान में कहा है कि नाथूराम गोडसे राष्ट्रभक्त थे। उन्होंने कहा कि गोडसे राष्ट्रभक्त था और गांधी जी ने भी राष्ट्र के लिए बहुत कुछ किया। महात्‍मा गांधी की तरह ही गोडसे भी राष्‍ट्रभक्‍त थे। हालांकि अपने इस बयान के महज कुछ घंटों के भीतर ही उन्‍होंने यू टर्न ले लिया। सांसद ने अपने बयान से पलटते हुए कहा कि गोडसे देशभक्‍त नहीं था।
गौरतलब है कि 30 जनवरी, 1948 को गांधी की हत्या के बाद से गोडसे संघ परिवार के महानायक हैं और उनके साथ सत्ता शेयर करने में राजनीतिक मंच शोयर करने में तमाम विचारधाराओं और तमाम रंग बिरंगे क्षत्रपों को कभी शर्म आयी हो, ऐसा कोई रिकार्ड बना नही है। संघ परिवार की ओर से गोडसे का सार्वजनिक महिमामंडन कोई नया नहीं है।
बाबरी विध्वंस, सिखों के नरसंहार और गुजरात के हत्यारों के महिमामंडन से जाहिर है यह धतकरम कोई बड़ा नहीं है।
बहरहाल संसद में नूरा कुश्ती जारी है। और आगरा में धर्मांतरण के मुद्दे पर उठे विवाद के बीच गुरुवार को लोकसभा में चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने हंगामा किया। वहीं, सरकार ने आज कहा कि अगर सभी दल सहमत हों तब धर्मांतरण पर प्रतिबंध लगाने के लिए वह कानून भी ला सकती है। वहीं, संसदीय कार्यमंत्री एम वैंकेया नायडू के आरएसएस को लेकर बयान पर लोकसभा में खासा हंगामा हुआ, बाद में पूरी विपक्ष ने सदन से वाकआउट किया।
मुसलमानों के बाद अब ईसाई भी हिंदू बनाये जायेंगे। फिर बौद्धों, सिखों और जैनियों की बारी ? क्रमशः.
 O- पलाश विश्वास

About हस्तक्षेप

Check Also

media

82 हजार अखबार व 300 चैनल फिर भी मीडिया से दलित गायब!

मीडिया के लिये भी बने कानून- उर्मिलेश 82 thousand newspapers and 300 channels, yet Dalit …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: