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‘धर्म’ को कलंकित करते ये धर्माधिकारी

तनवीर जाफ़री
 

शताब्दियों से हमारा देश धर्म परायण लोगों का देश रहा है। भारतवर्ष में एक से बढ़क़र एक अवतारी महापुरुषों ने जन्म लिया। तमाम चमत्कारी सन्त-महात्मा व महापुरुष इस धरती पर पैदा हुये। अनेक सन्त,फकीर जो दूसरे देशों से चलकर भारत भूमि पर पधारे उन्हें भी भारतवर्ष के लोगों ने पूरा मान-सम्मान दिया तथा आज तक देते आ रहे हैं। यदि यह कहा जाये कि भारत वर्ष के लोगों में धार्मिक आस्था व विश्वास की दीवानगी सर चढ़क़र बोलती है तो यह कहना भी गलत नहीं होगा। और सम्भवत: इन्हीं प्राचीन धर्म व विश्वास सम्बंधी विशेषताओं के कारण ही भारत को विश्वगुरु भी कहा जाता रहा होगा।

बहरहाल, धार्मिक आस्था और विश्वास का यह सिलसिला अब भी न केवल बदस्तूर जारी है बल्कि इसमें बहुत तेज़ी से इज़ाफा भी होता जा रहा है। रोज़ नए-नए धर्मगुरु टेलीविज़न अथवा समाचार पत्रों में विज्ञापन के माध्यम से ‘अवतरित’ होते दिखाई दे रहे हैं। जिसे देखो वही जनता को लम्बा-चौड़ा प्रवचन ‘पिलाने’ को तैयार बैठा है। कोई जीने की कला अपने अनुयाईयों को सिखा रहा है तो कोई अपने प्रवचनों के माध्यम से अपने भक्तों को नशा छोड़ऩे की हिदायत करता नज़र आ रहा है। कोई कट्टरपंथी विचारधारा का पाठ पढ़ा रहा है तो कोई सर्वधर्म सम्भाव की अलख जगा रहा है। कोई स्वयम् को ईश्वर का अवतार बता रहा है तो कोई स्वयम् ही भगवान होने का दावा ठोंक रहा है। कुल मिलाकर धार्मिक आस्थाओं व विश्वास का जो नज़ारा शताब्दियों पहले भारत में दिखाई देता रहा होगा, मीडिया के माध्यम से उससे भी ज़बरदस्त धार्मिक ज्ञान वर्षा इन दिनों होती देखी जा सकती है।

धर्माधिकारियों व धर्मोपदेशकों की ऐसी बाढ़ तथा उनके द्वारा 24 घंटे किसी न किसी चैनल पर अथवा किसी न किसी शहर में लगे भव्य पंडालों में किये जा रहे धार्मिक प्रवचनों के बाद वास्तव में होना तो यह चाहिये था कि कम से कम हमारे देश से बुराईयों का तो अब तक पूरी तरह खात्मा हो जाता। प्रत्येक व्यक्ति सच्चा, ईमानदार,चरित्रवान, सदाचारी तथा ईश्वर का भय रखने वाला परोपकारी व्यक्ति बन जाता। परन्तु इन तथाकथित धर्मोपदेशकों व धर्माधिकारियों की बाढ़ आने के बाद तथा इनके प्रवचनों सम्बंधी होने वाले आयोजनों में होने वाली बेतहाशा बढ़ोत्तरी के बाद देखा तो यह जा रहा है कि समाज में बुराईयाँ पहले से कई गुणा ज़्यादा बढ़ चुकी हैं। लोगों का चरित्र गिरता जा रहा है। झूठ, बेईमानी,लूट-खसोट, व्याभिचार, अय्याशी तथा अमानत में ख्यानत जैसे अधार्मिक कृत्यों का बाज़ार गर्म है। बाप-बेटी, भाई-बहन जैसे पवित्र रिश्ते कलंकित होने जैसी अविश्वसनीय लगने वाली खबरें सुनने को मिल रही हैं। गुरु-शिष्या का रिश्ता दागदार होता सुनाई दे रहा है। और तो और हमारे देश में वे साधू-सन्त, फकीर जो कि दूसरों को ईश्वर के निकट पहुँचने का मार्ग बताते हैं इन्हीं समुदाय के लोग दुराचार व व्याभिचार के आरोपों में फँसते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजि़मी है कि जब गुरु, धर्मोपदेशक, सन्त-फकीर तथा दूसरों को सद्मार्ग का पाठ पढ़ाने वाले तथाकथित धर्माधिकारी स्वयम् चरित्रहीन व अय्याश प्रवृति के होंगे तो ऐसे लोगों द्वारा दी जाने वाली धार्मिक शिक्षा आखिर कितनी कारगर होगी? ईश्वर भी ऐसे लोगों के प्रवचनों तथा इनके माध्यम से इनके अनुयाईयों द्वारा माँगी गयी दुआओं को आख़िर कैसे और क्योंकर पूरी करेगा?

धर्म को कलंकित करने वाले इस प्रकार के चरित्रहीन, कलंकी धर्माधिकारी किसी एक धर्म अथवा विश्वास के नहीं बल्कि इत्तेफाक से सभी धर्मों में देखे जा सकते हैं। अभी पिछले दिनों दिल्ली में महरौली के समीप तीन पाखण्डी मौलवियों को एक साथ गिरफ़तार किया गया। अधेड़ उम्र के यह तीनों मौलवी लड़कियों को इस्लामी तालीम देने के नाम पर अपने पास बुलाते थे। फिर उन लड़कियों को बहला-फुसला कर उनके साथ दुराचार किया करते थे। आज ‘अल्लाह’ के यह बन्दे जेल की सलाखों के पीछे हैं। इसी प्रकार पिछले दिनों कश्मीर घाटी से दिल दहला देने वाला ऐसा ही एक समाचार प्राप्त हुआ। कश्मीर के बडग़ाम जि़ले में दरवेश गुलज़ार अहमद बट्ट नाम का एक व्यक्ति जो कि शक्ल-सूरत व वेशभूषा से तो पक्का मौलवी नज़र आता था परन्तु उसके चेहरे के पीछे एक दुराचारी राक्षस छुपा हुआ था। वह बडग़ाम में इस्लामी शिक्षा केन्द्र के नाम पर एक संस्थान तथा होस्टल संचालित करता था। अपने इस्लामी अध्ययन केन्द्र के सम्बंध में वह स्थानीय अखबारों में विज्ञापन भी देता था। इतना ही नहीं बल्कि स्थानीय केबल नेटवर्क पर निर्धारित समय पर उसके धार्मिक प्रवचन भी प्रसारित होते थे। वह अपने अनुयाईयों को यह बताने की भरपूर कोशिश करता था कि वह एक सिद्ध फकीर है तथा उसे ईश्वरीय ज्ञान भी प्राप्त है। वह यह भी बताता था कि वर्तमान दौर के समस्त मौलवियों व धर्मगुरुओं ने जब अल्लाह से किसी वास्तविक सिद्ध फकीर के धरती पर अवतरित होने की दुआ माँगी उसके बाद ही वह अल्लाह की ओर से इस धरती पर अवतरित हुआ है। अब ज़रा इस तथाकथित पाखण्डी एवं व्याभिचारी ‘अवतारी पुरुष’ की काली करतूतों पर गौर फ़रमाईये।

यह शैतान दुराचारी मौलवी अपने हॉस्टल की मासूम बच्चियों का यह कहकर यौन शोषण करता था कि वह उन्हें ‘पवित्र’ कर रहा है। यह मनहूस मौलवी अपने इस पाखण्ड को सही बताने के लिये अबोध बच्चियों को अरबी की कहावतें भी सुनाया करता था। यह शैतान उन बच्चियों से कहता कि उसके साथ सेक्स करने से लड़कियाँ केवल पवित्र ही नहीं होंगी बल्कि ऐसा करने पर उन्हें दोज़ख (जहन्नुम) की आग भी नहीं जला पायेगी। वह कहता कि वह इतना बड़ा अवतारी पुरुष है कि उसके साथ शारीरिक सम्बंध बनाने पर सबको गुनाहों से छुटकारा मिल जायेगा। इस प्रकार अपने धार्मिक अध्ययन केन्द्र व अपनी हबशी दाढ़ी व टोपी की आड़ में इस राक्षसी प्रवृति के व्यक्ति ने घाटी में अब तक 200 से अधिक लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाया। आज वह ‘अवतारी पुरुष’ भी जेल की सलाखों के पीछे हैं। मज़े की बात तो यह है कि दरवेश गुलज़ार अहमद बट्ट नामक इस व्याभिचारी मौलवी के काले कारनामों का पर्दाफाश करने वाला व्यक्ति भी मोहम्मद अमीन नाम का एक मौलवी ही है। मौलवी अमीन का कहना है कि दरवेश गुलज़ार कुरानी आयतों को तोड़-मरोड़ कर पेश करता था तथा केवल लोगों पर अपना प्रभाव जमाने के लिये यह कहा करता था कि उसे ईश्वरीय ज्ञान प्राप्त है। बहरहाल, उस पाखण्डी मौलवी की हवस का शिकार हो चुकी कई कन्याओं की डॉक्टरी जाँच की जा चुकी है जिसमें मौलवी द्वारा उन बच्चियों के साथ दुराचार किये जाने की पुष्टि हो चुकी है। परन्तु आश्चर्य की बात तो यह है कि उसके काले कारनामों से पर्दा हटने के बावजूद अब भी उस शैतान मौलवी के कुछ समर्थक पीड़ित लड़कियों के घरों पर धमकी भरे फ़ोन कर रहे हैं तथा मौलवी का विरोध न करने की चेतावनी भी दे रहे हैं।

इसी प्रकार के कई किस्से हिन्दू धर्म से सम्बंधित कई सन्तों-महात्माओं तथा आश्रम संचालकों व धर्मोपदेशकों के बारे में अकसर सुनायी देते हैं। इनमें से कई पाखण्डी धर्माधिकारी तो जनता के विरोध करने व पुलिस की सक्रियता के चलते क़ानून के शिकंजे में आ जाते हैं तो कई ऐसे भी हैं जो अपने समर्थकों के संख्या बल के दम पर व अपने प्रभाव के चलते अथवा अपने अकूत पैसों के बल पर स्वयम् को कानून के शिकंजे में फँसने से बचा ले जाते हैं। गत् वर्षों में ऐसी कई घटनाएं सामने आयीं जिसमें कई भगवाधारी, पाखण्डी सन्त-महात्मा, व्याभिचार,सेक्स, अय्याशी तथा यौन उत्पीड़ऩ जैसे मामलों में फँसते दिखाई दिये। दिल्ली में तो गत् वर्ष एक इतना विशाल सेक्स रैकेट पकड़ा गया जो कि धर्म की आड़ में लड़कियों की सप्लाई का काम करता था। साईं बाबा जैसे महान समर्पित सन्त के नाम पर द्विवेदी नाम का एक युवा पाखण्डी सन्त लड़कियों के आयात-निर्यात का बड़ा रैकेट संचालित करता था। व्याभिचारी सन्त के बेनकाब होने सम्बंधी ताज़ातरीन घटना अहमदाबाद के समीप कलोल नामक तहसील के सईज नामक गांव की है। यहाँ स्वामी नारायण सम्प्रदाय के तथाकथित ‘स्वामी नीलकण्ठ जी महाराज’ एक कॉलगर्ल के साथ निर्वस्त्र होकर रंगरेलियाँ मनाते पकड़े गये। निश्चित रूप से स्वामी नारायण सम्प्रदाय देश का एक अत्यन्त सम्मानित व प्रतिष्ठित धार्मिक सम्प्रदाय माना जाता है।

परन्तु इसी सम्प्रदाय में तमाम सन्त रूपी ऐसे काले भेड़िय़ों ने प्रवेश पा लिया है जो समय-समय पर इस सम्प्रदाय को अपनी काली करतूतों से कलंकित करते रहते हैं। खबरों के अनुसार स्वामी नीलकण्ठ नाम का यह पाखण्डी प्रत्येक सप्ताह दलालों के माध्यम से एक नई कॉलगर्ल अपने दुराचार हेतु मँगवाया करता था। इसके बदले में वह दलालों को दस लाख रुपये भी दिया करता था। इस पाखण्डी सन्त द्वारा यह सिलसिला गत् कई वर्षों से चलाया जा रहा था। इसका भण्डाफोड़ उस समय हुआ जबकि उन्हीं दलाल युवकों में से एक ने कॉलगर्ल के साथ मिलीभगत कर पाखण्डी नीलकण्ठ स्वामी की अश्लील  वीडियो तैयार कर ली। इस समुदाय के कई सन्तों पर पहले भी इस प्रकार के दुराचार करने के आरोप लग चुके हैं। कई पाखण्डी सन्त पकड़े भी जा चुके हैं। अहमदाबाद में तो इसी सम्प्रदाय के एक दुराचारी सन्त को तब गिरफ्तार किया गया था जबकि उसने आश्रम में चाय देने वाली एक लड़क़ी को अपनी हवस का शिकार बनाया था।

भारत जैसे विशाल देश में ऐसी खबरें प्राय: आये दिन आती रहती हैं। और इन खबरों को सुनने के बाद जहाँ इस बात का विश्वास हो जाता है कि अय्याश प्रवृत्ति के ऐसे धर्माधिकारी जहाँ धर्म को कलंकित कर रहे हैं वहीं इनके चलते आम लोगों में भी धर्म के प्रति तथा वास्तविक धर्मगुरुओं व धर्मोंपदेशकों के प्रति विश्वास में कमी आती जा रही है।

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‘धर्म’ को कलंकित करते ये धर्माधिकारी

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