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धर्म को हथियार बनाकर दलितों से उनके जीने के अधिकार को ही छीन लिया जाता है

                   लखनऊ। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के बजाना (अहिरवार) गांव में 30 अप्रैल 2014 को हुए मतदान के दौरान अस्सी वर्षीय दलित जंगी लाल से दबंगों द्वारा ‘मूर्ति पर हाथ रखवा कर पूछा- किसे दिया वोट? जवाब नहीं देने पर ले ली जान’। लोकसभा चुनाव के दरम्यान दलित समुदाय के लोकतांत्रिक व मानवाधिकार हनन से जुड़ी इस घटना के समूचे प्रकरण की न्यायिक जांच की मांग करते हुए जर्नलिस्ट यूनियन फॉर सिविल सोसाइटी (जेयूसीएस) ने तक के परिवार को पुलिस सुरक्षा व पीड़ित परिवार को 20 लाख मुवाबजा देने की मांग की है।
जेयूसीएस की तरफ से केन्द्रीय निर्वाचन आयोग के लिखे पत्र में सामाजिक कार्यकर्ता और स्वतंत्र पत्रकार राघवेन्द्र प्रताप सिंह, लक्ष्मण प्रसाद, शरद जायसवाल, प्रबुद्ध गौतम, हरे राम मिश्र, अनिल यादव, मोहम्मद आरिफ, वरुण, ऋषि कुमार, गुफरान सिद्दीकी, शाह आलम व अवनीश ने लिखा है कि दिनांक 1 मई 2014 को दैनिक भास्कर के वेब संस्करण पर एक खबर प्रकाशित हुई थी ‘मूर्ति पर हाथ रखवा कर पूछा- किसे दिया वोट? जवाब नहीं देने पर ले ली जान’। इस खबर में लिखा है कि उत्तर प्रदेश में झांसी-ललितपुर लोकसभा क्षेत्र के बजाना गांव में 80 साल के बुजुर्ग की हत्या केवल इसलिए कर दी गई क्योंकि उसने दबंगों को यह नहीं बताया कि वोट किसे दिया है। 30 अप्रैल को दबंगों के वार से घायल जंगी लाल ने 1 मई की देर रात दम तोड़ दिया। उनसे दंबग जानना चाह रहे थे कि उन्होंने वोट किसे दिया था। उन्हें मंदिर ले जा कर भगवान की मूर्ति छू कर जवाब देने के लिए कहा गया। जवाब नहीं मिलने पर उन पर हमला किया गया था। खबर में लिखा है कि मारे गए बुजुर्ग जंगी लाल के बेटे रमेश ने कहा कि वो लोग पिता को मार चुके हैं। अब उसे भी जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, मामला वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। इस खबर में ‘रमेश ने बताया कि पहले से ही एक पार्टी विशेष को वोट देने के लिए दबाव डाला जा रहा था। बाजना में अधिकतर दलित रहते हैं। उसने बताया कि पूरे गांव के लोगों से कसम खिलवाई जा रही थी। उन पर दबाव बनाया जा रहा था, जो लोग उनकी बात नहीं मान रहे थे, उन्हें बूथ तक पहुंचने ही नहीं दिया गया’। ( http://www.bhaskar.com/article-ht/UP-voting-day-murder-jhansi-crime-news-4600020-PHO.html)
पत्र में कहा गया है, “इसी वेब साइट पर ‘कैसे हुई घटना’ उपशीर्षक से प्रकाशित खबर में लिखा है ‘ 30 अप्रैल को 80 साल के जंगी लाल अहिरवार गांव में ही प्राइमरी पाठशाला में बने पोलिंग बूथ से मतदान करके घर लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें गांव के ही पृथ्वी यादव ने रोका और पूछा कि वोट किसे दिया। जंगी लाल ने इस बात का कोई जवाब नहीं दिया। इस बात से गु्स्साए लोग उन्हें जबरन गांव में ही बने एक मंदिर में ले गए। वहां भगवान की मूर्ति पर हाथ रखकर यह बताने के लिए कहा कि किसे वोट दिया। बुजुर्ग ने कसम खाने से मना कर दिया तो, उसके सिर पर लाठी से हमला कर दिया। उन्हें महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां गुरुवार की रात उनकी मौत हो गई’।“( http://www.bhaskar.com/article-ht/UP-voting-day-murder-jhansi-crime-news-4600020-PHO.html?seq=2 )
दलित समुदाय को वोट डालने से रोकने संबन्धी कुछ और भी समाचार इस वेब साइट पर हैं जो यह बताते है कि दलित समुदाय को वोट से वंचित करने की अन्य स्थानों पर भी कोशिश की गई। जिसका वेब लिंक निम्न है-http://www.bhaskar.com/article-ht/UP-voting-day-murder-jhansi-crime-news-4600020-PHO.html?seq=3
 सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकारों ने कहा है कि उपरोक्त समाचार यह दर्शाते हैं कि इस मुल्क में आज भी आम दलित अपनी मर्जी से कहीं वोट नहीं दे सकते, अपना मुखिया नहीं चुन सकते। जिस तरह इस पूरे प्रकरण में दलित समुदाय के जंगी लाल को मंदिर में मूर्ति पर हाथ रखवाकर पूछा गया और उसके बाद उन पर जानलेवा हमलाकर उनकी हत्या की गई यह घटना हमारे समाज में व्याप्त अंधविश्वास और रुढ़िवाद को भी उजागर करती है, जिसमें धर्म को हथियार बनाकर एक दलित समुदाय के व्यक्ति से उसके जीने के अधिकार को छीन लिया जाता है। इतना ही नहीं पूरे के पूरे दलित कस्बे को वोट देने से रोक दिया जाता है, जिसके तहत वे वोटिंग के समय तक नजरबंद रहते हैं।
जेयूसीएस के कार्यकारिणी सदस्यों ने कहा है कि हमारा लोकतंत्र प्रत्येक नागरिक को वोट देने का अधिकार मुहैया कराता है। वह किसे अपना वोट देगा यह उसकी मर्जी है। इस बावत पूछताछ, दबाव और धमकी तथा मनचाहे व्यक्ति को वोट न देने पर जान लेवा हमला करना नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। जिस तरह समाचार बताता है कि पूरे बजाना कस्बे के दलितों को किसी खास पार्टी को ही वोट करने के लिए धमकाया गया था। यह लोकतंत्र के विकास और उसकी सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक संकेत हैं। उपरोक्त खबर इस मुल्क में दलितों के हालात को उजागर करती है और सवाल उठाती है कि जब उनसे उनके वोट देने तक के अधिकारों को छीना जा रहा है तो ऐसे में क्या उनके अन्य अधिकार सुरक्षित हैं?
पत्र की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के  मुख्यमंत्री, केन्द्रीय अनसूचित जाति जन जाति आयोग के अध्यक्ष, , नई दिल्ली, राज्य अनसूचित जाति जन जाति आयोग के अध्यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राज्य चुनाव आयुक्त, व डीजीपी उत्तर प्रदेश को भी दी गई है।

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