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नागपुर के आदेश पर ममता के साथ अन्ना मैदान में !

शेष नारायण सिंह
मुंबई। अन्ना हजारे अब ममता बनर्जी के लिये प्रचार करेंगे। जहाँ तक ममता के मुख्य क्षेत्र पश्चिम बंगाल का सवाल है वहाँ अन्ना हजारे की ऐसी हैसियत नहीं है कि वे कुछ वोट दिलवा सकें। वहाँ की राजनीति में बुनियादी मुद्दे मुख्य रहते हैं और उनके आधार पर ही चुनाव होता है लेकिन कुछ राज्यों में वे ममता बनर्जी की पार्टी को कुछ प्रतिशत वोट दिलवा सकते हैं। ऐसा लगता है कि ममता बनर्जी अपनी पार्टी को अब क्षेत्रीय पार्टी के वर्ग से निकाल कर राष्ट्रीय श्रेणी में डालना चाहती हैं। उसके लिये कुछ राज्यों में मौजूदगी और कुछ सीटों की ज़रूरत होती है। एक निश्चित प्रतिशत वोट मिल जायें तो ममता बनर्जी की पार्टी राष्ट्रीय पार्टी के रूप में मान्यता पा जायेगी। लेकिन इस राजनीति का एक अन्य निहितार्थ भी है।
जानकार बता रहे हैं कि जिन लोगों ने अन्ना हजारे का इस्तेमाल कांग्रेस को भ्रष्टाचार का समानार्थी शब्द बनाने के लिये किया था, वे ही अन्ना हजारे को इस बार भी आगे कर रहे हैं। अब यह तय हो गया है कि अन्ना हजारे की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम का मुख्य लाभ उनके भूतपूर्व चेला-इन-चीफ और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को मिल रहा है। यह वोट दिल्ली में अपना कमाल दिखा चुका है और मुख्य विपक्षी पार्टी को सत्ता से वंचित कर चुका है। अब जब करीब साढ़े तीन सौ सीटों पर अरविंद केजरीवाल चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं तो यह तय माना जा रहा है कि उनको कांग्रेस को भ्रष्ट मानने वाले आदर्शवादी लोग वोट दे सकते हैं। इसी वोट के सहारे भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के दावेदार, नरेंद्र मोदी भी अपना अभियान चला रहे हैं।
अन्ना हजारे ने साफ़ कहा है कि वे केजरीवाल और मोदी दोनों के खिलाफ ममता बनर्जी की पार्टी का प्रचार करेगें। इस बात की भारी संभावना है कि कांग्रेस विरोधी वोट भ्रष्टाचार विरोधी के रूप में अपनी छवि बना चुके अरविंद केजरीवाल के हिस्से जायेंगे। उन्होंने मुकेश अम्बानी को मुद्दा बनाकर कांग्रेस और भाजपा को एक ही खांचे में खड़ा करने की कोशिश की है। जिन लोगों को केजरीवाल से नुक्सान होने वाला है उसमें सबसे पहले नम्बर पर भाजपा है। दिल्ली विधानसभा के चुनाव के बाद साबित हो गया है कि तिकोना मुकाबला होने पर कांग्रेस से ज़्यादा भाजपा को नुक्सान होगा। आम तौर पर माना जाता है कि अन्ना हजारे के आगे पीछे वही लोग रहते हैं जो भाजपा के बंदे माने जाते हैं। अरविंद केजरीवाल की गिनती भी उसी श्रेणी में होती थी लेकिन अब वे बागी हो गये हैं।
अन्ना हजारे के मौजूदा संगी साथियों ने अन्ना हजारे को एक योजना के तहत मैदान में उतार दिया है। अब अरविंद केजरीवाल के उन वोटों को अन्ना हजारे ममता बनर्जी के उम्मीदवारों को दिलवायेंगे जो आम आदमी पार्टी को अन्ना हजारे के नाम के कारण मिलने वाले थे। इस तरह अन्ना हजारे एक तथाकथित ईमानदार मुख्यमंत्री को मदद भी कर देंगे और भाजपा की जो सीटें अरविंद केजरीवाल के कारण कम होने वाली हैं उनकी भी थोड़ी बहुत भरपाई हो जायेगी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अन्ना हजारे को रामलीला मैदान में जिस आरएसएस ने समर्थन दिया था वही अब उनको ममता के समर्थन में भेजकर पूरे देश में अरविंद केजरीवाल के वोट काटने की योजना पर काम कर रहा है।

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