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नायब जिला काजी की शहादत पर फफक उठा बदायूँ

बुधवार, 5 मार्च 2014
नायब जिला काजी की शहादत की खबर पर जिले में माहौल गमजदा हो गया। शहर का बाजार शोक में बंद कर दिया गया। दरगाह से लेकर उनके आवास तक अनुयायियों की भीड़ लग गई। अधिकारी भी सांत्वना देने दरगाह पहुंचे।
मौलाना शेख उसैदुल हक की शहादत की खबर देर शाम बदायूं वालों तक पहुंची। इस बीच शेख साहब के आवास में मातम की चीखें गूंजने लगीं। उस वक्त घर में कोई पुरुष सदस्य नहीं था।
बता दें कि जिला काजी के अलावा शेख साहब के छोटे भाई अतीफ मियां कादरी भी इनके साथ बगदाद गए थे। जबकि छोटे भाई शेख अज्जाम साहब किसी काम से पिथौरागढ़ जा रहे थे। उन्हें खबर मिली तो रास्ते से ही लौट आए।
इसके साथ ही दरगाह के प्रवक्ता तसनीम हसन कादरी भी इस खबर को सुनकर सन्न रह गए। वह दरगाह परिसर पहुंचे और वहां से असलियत का पता लगाने में जुट गए। इस बीच धर्मगुरू के जिस मुरीद ने भी खबर सुनी वह दरगाह की ओर दौड़ा चला आया।
जैसे-जैसे रात हुई दरगाह और आवास पर लोगों की भीड़ बढ़ती चली गई। डीएम सीके त्रिपाठी को सूचना मिली तो उन्होंने हकीकत जानने के लिए सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र प्रसाद यादव और सीओ सिटी सत्यसेन यादव को भेजा। इन अधिकारियों ने दरगाह परिसर पहुंचकर जानकारी जुटाई और शोक में शरीक हुए।
घंटाघर के आसपास का बाजार आनन-फानन बंद होता चला गया और तमाम व्यापारी भी पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंच गए। कई अन्य धर्मों के लोग भी इस दुख की घड़ी में इस प्रतिष्ठित परिवार के साथ खड़े दिखाई दिए।

 
कम उम्र में हासिल किया था बड़़ा मर्तबा
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मौलाना उसैदुल हक कादरी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। वह जिला काजी के बड़े बेटे थे। उनकी शिक्षा मिस्र देश में हुई थी। बेहद कम उम्र में उन्होंने उर्दू समेत कई भाषाओं का ज्ञान हासिल कर लिया था। अब तक वह दर्जनों पुस्तकें लिख चुके थे।
जलसों में उनकी तकरीर देश में अमनो-अमान को समर्पित होती थी। दूसरे धर्मों के तमाम विद्वान भी उनकी विद्वता के कायल थे। सभी को सम्मान देना और हर किसी से मधुर व्यवहार के लिए उन्हें जाना जाता था। शायद यही वजह रही कि काफी कम उम्र में उन्हें नायब जिला काजी का ओहदा नसीब हुआ।
उनकी शहादत ने उनके मुरीदों के अलावा तमाम लोगों को भी झकझोर दिया है जो उनकी काबिलियत से वाकिफ थे।
साभार- अमर उजाला
http://www.amarujala.com/news/states/uttar-pradesh/budaun/Badaun-88793-119/

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