Home » नेता जी, नसीहत नहीं रहनुमाई की दरकार है

नेता जी, नसीहत नहीं रहनुमाई की दरकार है

तेरी रहबरी का सवाल है
सलीम अख्तर सिद्दीकी
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने अपने बेटे अखिलेश यादव की सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। इससे पहले कई बार वह सरकार को नसीहतें दे चुके हैं। यह कहना मुश्किल है कि क्या वास्तव में मुलायम सिंह यादव सरकार से नाराज हैं या लोकसभा चुनाव का बिगुल बजने की पूर्व संध्या पर वह नसीहत देकर उस गुस्से को कम करना चाहते हैं, जो लोगों में सपा सरकार के प्रति बढ़ता जा रहा है? यह सवाल इसलिए भी वाजिब है, क्योंकि उन्होंने सार्वजनिक तौर पर सरकार पर छींटाकशी की है।
ऐसा नहीं है कि मुलायम सिंह यादव अखिलेश से मुलाकात नहीं करते होंगे। जो नसीहतें उन्होंने सार्वजनिक तौर पर दी हैं, वे घर पर भी दी जा सकती थीं। बहरहाल, हकीकत क्या है, यह मुलायम सिंह जानते होंगे, या अखिलेश, लेकिन सच यह है कि सपा सरकार से जो उम्मीदें प्रदेश की जनता ने लगायी थीं, वे मिट्टी में मिलती नजर आ रही हैं। सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर रही है। यदि मुलायम सिंह यह कहते हैं कि दो साल में जैसा काम होना होना चाहिए था, वैसा नहीं हुआ, तो वह इसमें भी गड़बड़ करते लगते हैं। काम हुआ ही कहाँ है? जो हुआ भी होगा, खराब कानून व्यवस्था और मुजफ्फरनगर दंगों के नीचे दबकर रह गया।
भले ही आज अखिलेश यादव अपनी सरकार की उपलब्धियों का बखान करते रहें, लेकिन ऐसे काम नहीं हुये, जो जनता को दिखाई देते। मुलायम सिंह जानते हैं कि लोकसभा चुनाव में जो भी वोट मिलेगा, वह प्रदेश सरकार के कामकाज के आधार पर ही मिलेगा, लेकिन कहीं कुछ काम हुआ हो तो वोट भी मिलेगा। सपा सरकार की सबसे ज्यादा फजीहत मुजफ्फरनगर दंगों में हुयी। दंगा होने पर जब तक सरकार ने यह सोचा कि क्या करना चाहिए, तब सपा सरकार के दामन पर ऐसा दाग लग चुका था, जिसे वह हर कोशिश से साफ करने में नाकाम रही है। दंगा पीड़ित, राहत शिविरों पर उनके मंत्रियों की बयानबाजी ने रही सही कसर पूरी कर दी। अब हालत यह है कि सपा से उसका समर्थक मुसलिम तो छिटक ही रहा है, अन्य जातियाँ भी किनारा करने लगी हैं।
तल्ख हकीकत यही है कि सपा सरकार के शपथ ग्रहण करने के दिन से ही उसके बदमिजाज कार्यकर्ताओं ने जो हरकतें शुरू की थीं, वे आज तक जारी हैं। यह कहा जा सकता है कि मीडिया का एक वर्ग सपा के छुटभैये नेता की छोटी हरकत को भी बड़ी बताकर प्रकाशित करता है, लेकिन सपा सरकार के कुछ बड़े नेताओं की हरकतें भी बड़ी हैं। हालिया उदाहरण कानुपर के विधायक इरफान सोलंकी का है। डॉक्टरों से उनका उलझना और उन्हें पुलिस से पिटवाना बड़ी गलत हरकत है। उस पर भी तुर्रा यह कि सपा विधायक के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। नतीजा यह होता है कि डॉक्टरों का विरोध उत्तर प्रदेश की सीमा पार करके पूरे देश में फैलने लगता है। डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से जिन मरीजों की जानें गयीं, उनका जिम्मेदार कौन है? सपा सरकार या हड़ताली डॉक्टर?
अगर लोग आज यह सवाल कर रहे हैं कि आजम खान की भैंसे चोरी होने पर प्रदेश की पुलिस इतनी सक्रिय हो सकती है, तो आम जनता के मामलों में क्यों नहीं हो सकती, सही कर रहे हैं। अपनी सरकार को नसीहत देने वाले मुलायम सिंह यादव को किसने रोका है इरफान सोलंकी के खिलाफ कार्रवाई करने को? सच तो यह है कि सपा सरकार के मंत्री, विधायक और हाल ही में बनाये गये दर्जा प्राप्त मंत्रियों की पूरी फौज बेलगाम हो गयी है। यह इंतहा थी कि एक दर्जा प्राप्त मंत्री मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों के राहत शिविरों में पहुँच कर अपना स्वागत करा आए। जैसे इतना ही काफी नहीं था, स्वागत की तस्वीरों को अपनी फेसबुक वॉल पर भी अपलोड कर दिया। दंगा पीड़ितों से अपना स्वागत कोई बेदिल इंसान ही करा सकता है। किसी भी मंत्री या विधायक के कार्यालय या निवास पर चले जायें, वहाँ का नजारा देखने पर नहीं लगता कि यह समाजवादी विचारधारा से ताल्लुक रखने वाले मंत्री या विधायक हैं।
दरअसल, सपा के मंत्रियों और विधायकों को लगता है कि वे न जाने के लिये आये हैं, इसलिए वे वह सब कुछ कर रहे हैं, जिससे सपा की साख को बट्टा लग रहा है। सच वही है, जो मुलायम सिंह यादव ने अपनी नसीहत में कहा है कि सरकार चापलूसों से घिर गयी है। सरकार के चारों ओर चापलूसों का घेरा इतना कड़ा है कि आम कार्यकर्ता सरकार से कटकर रह गया है। चापलूसी के इस घेरे को तोड़ना ही होगा, जिसे मुलायम सिंह यादव तोड़ सकते हैं या खुद अखिलेश यादव, जिन्होंने युवा होते हुए ऐसा कुछ नहीं किया, जिससे यह लगे कि युवा बदलाव लाने में सक्षम हैं।
एक तरह से देखें, तो हम बसपा सरकार का ‘एक्शन रिप्ले’ देख रहे हैं। बसपा सरकार से त्रस्त होकर ही उत्तर प्रदेश की जनता ने सपा को पूर्ण बहुमत से सत्ता सौंपी थी। दो साल आते-आते बसपा अपनी हार का बदला लोकसभा चुनाव में लेती नजर आ रही है। अब जब लोकसभा चुनाव का ऐलान हो गया है, तो नसीहतों की नहीं, रहनुमाई की जरूरत है और वह भी मुलायम सिंह यादव की। ऐसा नहीं हुआ तो जनता मुलायम सिंह से यह जरूर सवाल करेगी-
तू इधर उधर की न बात कर ये बता कि काफिला क्यूं लुटा।
मुझे रहजनों से गरज नहीं, तेरी रहबरी का सवाल है।।

About the author

सलीम अख्तर सिद्दीकी पत्रकारिता जगत का जाना पहचाना चेहरा हैं। देश के अनेक समाचार-पत्रों में सामायिक मुद्दों पर लेख लिखते हैं। आजकल दैनिक जनवाणी में कार्यरत हैं।

About हस्तक्षेप

Check Also

भारत में 25 साल में दोगुने हो गए पक्षाघात और दिल की बीमारियों के मरीज

25 वर्षों में 50 फीसदी बढ़ गईं पक्षाघात और दिल की बीमांरियां. कुल मौतों में से 17.8 प्रतिशत हृदय रोग और 7.1 प्रतिशत पक्षाघात के कारण. Cardiovascular diseases, paralysis, heart beams, heart disease,

Bharatendu Harishchandra

अपने समय से बहुत ही आगे थे भारतेंदु, साहित्य में भी और राजनीतिक विचार में भी

विशेष आलेख गुलामी की पीड़ा : भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रासंगिकता मनोज कुमार झा/वीणा भाटिया “आवहु …

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा: चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा : चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश Occupy national institutions : …

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

अच्छे नहीं, अंधेरे दिनों की आहट

मोदी सरकार के सत्ता में आते ही संघ परिवार बड़ी मुस्तैदी से अपने उन एजेंडों के साथ सामने आ रहा है, जो काफी विवादित रहे हैं, इनका सम्बन्ध इतिहास, संस्कृति, नृतत्वशास्त्र, धर्मनिरपेक्षता तथा अकादमिक जगत में खास विचारधारा से लैस लोगों की तैनाती से है।

National News

ऐसे हुई पहाड़ की एक नदी की मौत

शिप्रा नदी : पहाड़ के परम्परागत जलस्रोत ख़त्म हो रहे हैं और जंगल की कटाई के साथ अंधाधुंध निर्माण इसकी बड़ी वजह है। इस वजह से छोटी नदियों पर खतरा मंडरा रहा है।

Ganga

गंगा-एक कारपोरेट एजेंडा

जल वस्तु है, तो फिर गंगा मां कैसे हो सकती है ? गंगा रही होगी कभी स्वर्ग में ले जाने वाली धारा, साझी संस्कृति, अस्मिता और समृद्धि की प्रतीक, भारतीय पानी-पर्यावरण की नियंता, मां, वगैरह, वगैरह। ये शब्द अब पुराने पड़ चुके। गंगा, अब सिर्फ बिजली पैदा करने और पानी सेवा उद्योग का कच्चा माल है। मैला ढोने वाली मालगाड़ी है। कॉमन कमोडिटी मात्र !!

Entertainment news

Veda BF (वेडा बीएफ) पूर्ण वीडियो | Prem Kahani – Full Video

प्रेम कहानी - पूर्ण वीडियो | वेदा BF | अल्ताफ शेख, सोनम कांबले, तनवीर पटेल और दत्ता धर्मे. Prem Kahani - Full Video | Veda BF | Altaf Shaikh, Sonam Kamble, Tanveer Patel & Datta Dharme

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: