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पदोन्नति में आरक्षण बिल : भाजपा देश को जातीय संघर्ष में झोंक रही है- डॉ. राकेश सिंह राना

पदोन्नति में आरक्षण बिल : भाजपा देश को जातीय संघर्ष में झोंक रही है- डॉ. राकेश सिंह राना

सिकन्दराराऊ (हाथरस)। समाजवादी पार्टी के पूर्व विधान परिषद सदस्य डॉ. राकेश सिंह राना ने पदोन्नति में आरक्षण के सम्बन्ध में 117 वां संविधान संशोधन बिल पर भारतीय जनता पार्टी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि सवर्ण और अन्य पिछड़ा वर्ग की गर्दन पर भाजपा ने छुरी चला दी है।
बता दें मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संसदीय पैनल ने पदोन्नति में आरक्षण संबंधी 117वें संविधान संशोधन बिल पर अपनी रिपोर्ट विगत 11 अगस्त2016 को केंद्र सरकार को भेज दी है। समझा जा रहा है कि केंद्र सरकार इस बिल को मौजूदा शीतकालीन सत्र में पारितकराने जा रही है।

लोकसभा में यह बिल भाजपा के समर्थन से 2012 में पारित कराया जा चुका है।
इस बिल के विरोध में कर्मचारियों ने बीती 11 नवंबर को विरोध प्रदर्शन भी आयोजित किए थे।
उन्होंने सवाल किया कि भाजपा बताए वह माननीय सर्वोच्च न्यायालय के प्रति सम्मान का भाव रखती है अथवा नहीं। उन्होंने माँग की कि भाजपा यह भी स्पष्ट करें कि भविष्य में इस मामले में और कितनी बार संविधान संशोधित किया जायेगा? उन्होंने इस बिल का विरोध कर रहे शासकीय कर्मचारियों को अपना समर्थन देने की घोषणा की।

संसद का शीतकालीन सत्र प्रारम्भ होने पर पदोन्नति में आरक्षण के सम्बन्ध में भाजपा की नीयत पर सवार उठाते हुए डॉ. राकेश सिंह राना ने कहा-
सर्वोच्च न्यायालय का फैसला लागू किया जाना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है किन्तु केन्द्र सरकार इस पर घटिया राजनीति कर रही है। भाजपा ने दिसंबर 2012 में राज्यसभा में 117 वां संविधान संशोधन बिल पारित कर सवर्ण और अन्य पिछड़ा वर्ग के कर्मचारियों के साथ घोर अन्याय किया।
उन्होंने माँग की कि भाजपा स्पष्ट घोषणा करे कि केन्द्र सरकार लोकसभा में 117वें संविधान संशोधन बिल को नहीं रखेगी और पदोन्नति में आरक्षण अवैधानिक करार देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पूरे देश में लागू करेगी।

डॉ. राकेश सिंह राना ने कहा कि भाजपा ने सामाजिक न्याय के नाम पर पदोन्नति में आरक्षण बिल का राज्यसभा में 2012 में समर्थन किया था।
उन्होंने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण देकर अनुसूचित जाति/जनजाति के अति कनिष्ठ कार्मिकों को उनसे 20-25 साल वरिष्ठ सामान्य व अन्य पिछड़े वर्ग के कार्मिकों का बॉस व सुपरबॉस बनाना कौन सा सामाजिक न्याय है? 
समाजवादी नेता ने प्रश्न किया कि भाजपा के सामाजिक न्याय की परिभाषा में  सामान्य व अन्य पिछड़े वर्ग के 78 प्रतिशत कर्मचारियों के लिये कोई स्थान है या नहीं?

उन्होंने कहा एक बार नौकरी पाने बाद सभी कर्मचारियों के वेतन, भत्ते, सुविधायें और अधिकार समान हो जाते हैं फिर जातिगत आधार पर अनुसूचित जाति/जनजाति के कर्मचारियों को अलग से पदोन्नति में आरक्षण देना क्या  संविधान की धारा 14, 15 व 16 में प्रदत्त समता के अधिकार का स्पष्ट उल्लंघन नहीं है? जहाँ तक दलितों के उत्थान की बात है तो नौकरी पाते वक्त उन्हें आरक्षण के बल पर नौकरी मिल ही जाती है। उन्होंने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण के लिए संविधान संशोधन लाना क्या माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का अपमान नहीं है ?
आरक्षण बिल का विरोध कर रहे कर्मचारियों का समर्थन
डॉ. राकेश राना ने भाजपा से कहा कि वह पदोन्नति में आरक्षण के लिए संविधान संशोधन लाने का अपने चुनाव घोषणापत्र में उल्लेख करे और यह बताए कि उसने 2014 के अपने लोकसभा चुनाव घोषणा पत्र में यह उल्लेख क्यों नहीं किया कि सरकार बनने पर वह अनुसूचित जाति/जनजातिके कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण प्रदान कर सामान्य व पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों का गला घोंटेगी। उन्होंने सवाल किया कि चुनाव घोषणा पत्र में उल्लेख किये बिना पदोन्नति में आरक्षण बिल लाना क्या अपने मतदाताओं की पीठ में छुरा भोंकना नहीं है? 
डॉ. राना ने पदोन्नति में आरक्षण बिल का विरोध कर रहे कर्मचारियों का समर्थन करते हुए कहा कि पदोन्नति में आरक्षण देने से सामाजिक संतुलन बिगड़ रहा है और संविधान संशोधन बिल 17जून‘95 से लागू होने से 21  वर्ष पूर्व से ज्येष्ठता सूचियाँ बदली जायेंगी जिससे प्रशासनिक अराजकता उत्पन्न हो जायेगी। ऐसे में 117वें संविधान संशोधन बिल को लोक सभा रखने की कोशिश सामाजिक विघटन व प्रशासनिक अराजकता को बढ़ावा देगा और देश के सामाजिक ढांचे में जहर घोलने व जातिगत संघर्ष को बढ़ावा देने का काम करेगा।

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