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परेशान व हताश क्यों हैं बेनी विरोधी

अरविन्द विद्रोही

केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा फिर सुर्ख़ियों में हैं और आश्चर्य की बात यह है कि जितनी सुर्खियाँ, चर्चा बेनी अपने परंपरागत-पेशेवर विरोधियों की बदौलत बटोर लेते हैं उतनी सुर्खी व चर्चा अपने विषय में कराने के लिए राजनेताओं को ना जाने कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं।

पिछले दिनों बेनी प्रसाद वर्मा के इस्पात मंत्रालय की राष्ट्रीय इस्पात उपभोक्ता समिति के नामित सदस्यों का जमावड़ा उत्तर-प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पाँच सितारा होटल ताज़ में हुआ। शहरी इलाकों के साथ-साथ बहुतायत में ग्रामीण-पिछड़े इलाकों के लोगों को जिसमें पत्रकार बिरादरी के लोग भी शामिल हैं, को अपने समर्थकों के बीच, ग्रामीण जनों के बीच विकास पुरुष की उपाधि से विभूषित बेनी प्रसाद वर्मा की अनुशंसा से इस्पात मंत्रालय की राष्ट्रीय इस्पात उपभोक्ता समिति का सदस्य बनाया गया। इसी समिति की बैठक का आयोजन मंत्रालय के द्वारा किया गया। इस्पात मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार इस बैठक का आयोजन विधिपूर्वक ही हुआ है तो इस बैठक के आयोजन पर हो-हल्ला के पीछे क्या कारण हो सकते हैं ?

दरअसल कुछ राजनेता अति बेबाक और अपनी धुन के पक्के होते हैं। वे बोलते भी जमकर हैं और करते भी जमकर हैं। बाराबंकी के बेनी प्रसाद वर्मा भी बेबाक और धुन के पक्के व्यक्तित्व के स्वामी हैं। बेनी प्रसाद वर्मा उन राजनेताओं में से हैं जो बोलते हैं तो विपक्षियों के पास उनकी बात का जवाब नहीं होता है और जो भी करते हैं वो लाजवाब ही होता है। इस्पात मंत्रालय में हजारों लोग राष्ट्रीय इस्पात उपभोक्ता समिति सदस्य नामित हो गये, क्या यह पहली बार हुआ है कि बेनीप्रसाद वर्मा ने हजारों लोगों को अपने मंत्रालय में सदस्य नामित किया है। दूरसंचार मंत्री रहते हुये भी उन्होंने ग्रामीण इलाके के लोगों को मंत्रालय में जिम्मेदारी-लाभ दिया था और इस बार भी दिया। इस्पात मंत्रालय की राष्ट्रीय इस्पात उपभोक्ता समिति समिति की बैठक में सदस्यों को आने-जाने का किराया, स्थानीय यात्रा भत्ता आदि व उपहार देना मंत्रालय के नियमानुसार सही है। बेनी प्रसाद वर्मा एक ऐसे नेता हैं कि अपने मंत्रालय की बारीक़ जानकारी हासिल करके उस मंत्रालय का फायदा आम जन और अपने विश्वस्तों को देने में तनिक भी कोताही नहीं करते हैं। दुर्भाग्य तो यह है कि बेनी प्रसाद वर्मा से राजनैतिक-सामाजिक-आर्थिक लाभ उठा चुके तमाम लोग उनपर सिर्फ इसलिए हमलावर होते रहते हैं कि बेनी प्रसाद वर्मा अपने राजनैतिक फायदे के लिये अपने मंत्रालय का धन खर्च कर रहे हैं। क्या राजनैतिक फायदे के लिये ही सही विकास कार्य करना और ग्रामीण पृष्टभूमि के लोगों को भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय की राष्ट्रीय इस्पात उपभोक्ता समिति का सदस्य बना देना, उनको पाँच सितारा होटल में आयोजित बैठक में बुला लेना बेनी प्रसाद वर्मा का गुनाह हो गया है ? क्या ग्रामीण पृष्ठभूमि के सदस्य बने लोगों को मंत्रालय के नियमानुसार किराया, उपहार देकर कोई विधि विरुद्ध कार्य हुआ है ? सवाल यह भी है कि आखिर कब तक कार्य करने वालों को कठघरे में खड़ा करने का दुष्चक्र रचा जाता रहेगा। वस्तु स्थिति तो यह है कि इस्पात मंत्री रहते बेनी प्रसाद वर्मा के द्वारा कराये गए तमाम इकाइयों की शुरुआत, सोलर लाइट वितरण, हैण्ड पाईप लगवाने, सड़क निर्माण और अब ग्रामीण इलाकों के लोगों को राष्ट्रीय इस्पात उपभोक्ता समिति के सदस्य रूप में जोड़ कर उनको सम्मान, जिम्मेदारी व लाभ देने के कारण बेनी प्रसाद की बढ़ती लोकप्रियता से उनके विरोधी परेशान व हताश हैं।

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