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पुरस्कार के बहाने शुभम श्री की कविता ‘पोएट्री मैनेजमेंट’-यह कविता ‘कविता’ के धंधे पर सवाल उठाती है

शैलेन्द्र कुमार शुक्ल
शुभम श्री की कविता ‘पोएट्री मैनेजमेंट’ को अभी भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार से नवाजा गया। पुरस्कार की घोषणा के बाद कविता पर लगातार विवाद जारी है। बौद्धिक खेमे के लोग सहमति और असहमति लगातार दर्ज करा रहे हैं। उनकी इस कविता को उभरते आलोचक कविता न मनाने की पेशकश कर रहे हैं वहीं कुछ सजग साहित्यिक इसमें कविता की नई प्रतिध्वनि सुन रहे हैं। इस बार भारत भूषण पुरस्कार के लिए निर्णायक का दायित्व हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार उदय प्रकाश को दिया गया था। उन्होने ‘जलसा-4’ में प्रकाशित कविता ‘पोएट्री मैनेजमेंट’ को चुना। उनके इस चुनाव पर इधर लगातार बाबेला खड़ा हो रहा है।
आखिर क्या है इस कविता में इसे देखना भी जरूरी होगा। तो पढ़िये, पोएट्री मैनेजमेंट-

कविता लिखना बोगस काम है!
अरे फालतू है!
एकदम

बेधन्धा का धन्धा!
पार्ट टाइम!
साला कुछ जुगाड़ लगता एमबीए-सैमबीए टाइप
मज्जा आ जाता गुरु!
मने इधर कविता लिखी उधर सेंसेक्स गिरा
कवि ढिमकाना जी ने लिखी पूंजीवाद विरोधी कविता
सेंसेक्स लुढ़का
चैनल पर चर्चा
यह अमेरिकी साम्राज्यवाद के गिरने का नमूना है
क्या अमेरिका कर पाएगा वेनेजुएला से प्रेरित हो रहे कवियों पर काबू?
वित्त मंत्री का बयान
छोटे निवेशक भरोसा रखें!

आरबीआई फटाक रेपो रेट बढ़ा देगी
मीडिया में हलचल
समकालीन कविता पर संग्रह छप रहा है
आपको क्या लगता है, आम आदमी कैसे करेगा सामना इस संग्रह का?
अपने जवाब हमें एसएमएस करे
अबे, सीपीओ (चीफ पोएट्री ऑफिसर) की तो शान पट्टी हो जाएगी!
हर प्रोग्राम में ऐड आएगा
रिलायंस डिजिटल पोएट्री
लाइफ बनाए पोएटिक
टाटा कविता
हर शब्द सिर्फ़ आपके लिए
लोग ड्राईंग रूम में कविता टाँगेंगे
अरे वाह बहुत शानदार है
किसी साहित्य अकादमी वाले की लगती है
नहीं जी, इम्पोर्टेड है
असली तो करोड़ों डॉलर की थी
हमने डुप्लीकेट ले ली
बच्चे निबन्ध लिखेंगे
मैं बड़ी होकर एमपीए करना चाहती हूँ
एलआईसी पोएट्री इंश्योरेंस
आपका सपना हमारा भी है
डीयू पोएट्री ऑनर्स, आसमान पर कटऑफ
पैट (पोएट्री एप्टित्युड टेस्ट) की परीक्षाओं में
फिर लडकियाँ अव्वल
पैट आरक्षण में धांधली के खिलाफ
विद्यार्थियों ने फूँका वीसी का पुतला
देश में आठ ने काव्य संस्थानों पर मुहर
तीन साल की उम्र में तीन हज़ार कविताएँ याद
भारत का नन्हा अजूबा
ईरान के रुख से चिंतित अमेरिका
फ़ारसी कविता की परम्परा से किया परास्त!

ये है ऑल इण्डिया रेडिओ
अब आप सुनें सीमा आनंद से हिंदी में समाचार
नमस्कार!!
आज प्रधानमन्त्री तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय काव्य सम्मेलन के लिए रवाना
इसमें देश के सभी कविता गुटों के कवि शामिल हैं
विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि भारत किसी भी कीमत पर काव्य नीति नहीं बदलेगा
भारत पाकिस्तान काव्य वार्ता आज फिर विफल हो गई
पाकिस्तान का कहना है कि इक़बाल, मंटो, और फ़ैज़ से भारत अपना दावा वापस ले
चीन ने आज फिर ने काव्यलंकारों का परीक्षण किया
सूत्रों का कहना है कि यह अलंकार फ़िलहाल दुनिया के सबसे शक्तिशाली
काव्य संकलन पैदा करेंगे
भारत के प्रमुख काव्य निर्माता आशिक़ आवारा जी का आज तड़के निधन हो गया
उत्तरप्रदेश में आज फिर दलित कवियों पर हमला
उधर खेलों में भरत में लगातार तीसरी बार
कविता अंत्याक्षरी का स्वर्ण पदक जीत लिया है
भारत ने सीधे सेटों में ६-५, ६-४, ७-२ से यह मैच जीता
समाचार समाप्त हुए!

आ गया आज का हिंदू, हिंदुस्तान टाइम्स, दैनिक जागरण, प्रभात ख़बर
युवाओं पर चढ़ा पोएट हेयर स्टाइल का बुख़ार
कवयित्रियों से सीखें ह्रस्व दीर्घ के राज़
३० वर्षीय एमपीए युवक के लिए घरेलू, कान्वेंट एजुकेटेड, संस्कारी वधू चाहिए
२५ वर्षीय एमपीए गोरी, स्लिम, लम्बी कन्या के लिए योग्य वर सम्पर्क करें

गुरु मज़ा आ रहा है
सुनाते रहो
अपन तो हीरो हो जाएँगे
जहाँ निकलेंगे वहीं ऑटोग्राफ़
जुल्म हो जाएगा गुरु
चुप बे
थर्ड डिविज़न एम ए
एमपीए की फ़ीस कौन देगा?
प्रूफ़ कर बैठ के
ख़ाली पीली बकवास करता है!

यह कविता ‘कविता’ के धंधे पर सवाल उठाती है।

यह कविता के ठेकेदारों का मज़ाक उड़ाती हुई एक ऐसा व्यंग्य रूपक हमारे सामने खड़ा करती है जिससे कविता की मार्केट में बनियों की सारी चाल-बाजी रंगे हाथों पकड़ ली गई हो। इन पकड़े गए गुलफामों पर फबती कसती हुई इसकी पंक्तियाँ जोरदार मजा लेती हैं। इसकी भाषा इस व्यंग्यात्मकता के लिए एकदम सटीक जान पड़ती है।
आज कविता के समाज को पहचाना और समाज में कविता की आवश्यकता को देखना या समझना बहुत जरूरी है। यह कविता यह सोचने समझने की पहल करती है।
आखिर एक कवि कविता क्यों लिखता है, उसे इस पर भी सोचना चाहिए, यहाँ यह सवाल भी दिखाई दे जाता है। आज काव्य-प्रयोजन और काव्य-हेतु अपने समय के साथ बदले हैं तो कविता भी बदलेगी।
इस बदलते काव्य-बोध पर अगर हो हल्ला हो रहा है तो यह प्रमाणित होता है कि वाकई में यह हिंदी कविता में एक नई करवट है।                  

            शुभम श्री कवितायें कविता की बनी ढेरों परिभाषाओं के ढांचों में नहीं अटती।
वह कविता के आलोचक रामचन्द्र शुक्ल की परिभाषा में तो बिलकुल ही नहीं अटती, लेकिन वह आगे की जो बात सोचते हैं उस पर भी विचार किया जाना चाहिए-

‘सभ्यता की वृद्धि के साथ-साथ ज्यों-ज्यों मनुष्यों के व्यापार बहुरूपी और जटिल होते गए उसके मूल रूप बहुत कुछ आच्छन्न होते गए।’

यह बात कविता के साथ भी लागू होगी। आज यह कविता विवाद का कारण बनी इस कारण के पीछे कोई बड़ी भारी उथल-पुथल नहीं है। साहित्यिक जगत में कविता की दुनिया ने भी समय के अनरूप एक बदलाव महसूस किया है। यह बदलाव अगर ध्यान से देखें तो हिंदी कविता की नई पीढ़ी जो इस नए दशक में उभर कर सामने आई है, उसमें लगातार दिख रहा है। पुरानी परिभाषाओं को दिमाग में बैठाये लोग इतनी जल्दी नहीं समझ पा रहे हैं वही इस विवाद का कारण है।

कुछ साहित्यिक बुद्धिजीवी जो इस बदलाव को जान समझ भी रहे हैं फिर भी बवाल काटे हैं यह उनकी व्यक्तिगत कमजोरी है।
मनोज पाण्डेय की एक फेसबुक अपडेट कि ‘वे सारे पुरस्कार संदिग्ध है जो अब तक मुझे नहीं दिये गए’ इस प्रकरण की सच्चाई बयान करती है।
            इस पुरस्कार ने एक शानदार विवाद को जन्म दिया, यह विवाद इस पुरस्कार से ज्यादा कीमती जान पड़ता है। जब इसी के आस-पास उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान की ओर से दिये जाने वाले कीमती पुरस्कारों पर कोई बात-चीत न कर रहा हो तो इसकी प्रासंगिकता समझ में आती है।

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