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पूंजीपतियों के अच्छे दिन और मजदूरों के बुरे दिन आने वाले हैं

सोनभद्र। आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने कहा है कि अच्छे दिन अडाणी, अम्बानी, टाटा और बिडला जैसे कारपोरेट घरानों के और बुरे दिन हम ठेका मजदूरों के आने वाले हैं। गुजरात में कत्लेआम कर, दमन के बूते मजदूर आंदोलन को खत्म कर दिया गया।
आज यहां ठेका मजदूरों के नाम जारी एक अपील में कहा गया है कि दलों और नेताओं का नहीं-जनपक्षधर नीतियों के विकल्प के लिए, नियमितीकरण और वेतनमान के लिए अपनी ताकत दिखाएं!
ठेका मजदूरों के नाम जारी अपील इस प्रकार है
राबर्ट्सगंज (सु0) संसदीय क्षेत्र से सीपीआई (एम) समर्थित आइपीएफ (आर) के प्रत्याशी एस0 आर0 दारापुरी पूर्व आई0जी0 को कैमरा वाला बटन दबाकर विजयी बनाएं!
दोस्तों,
अन्य दलों के लिए यह आम चुनाव महज एक सीट जीतने या हारने का मामला हो सकता है लेकिन ठेका व आउटसोर्सिंग मजदूरों के लिए यह जीवन मरण का सवाल है। आप देख रहे है कि संसद से लेकर अनपरा-ओबरा, हिण्डालकों, रेनूसागर, कोयला और तमाम क्षेत्रों में एक ही स्थान पर सालों से काम कर रहे ठेका और आउटसोर्सिंग मजदूरों व स्कीम कर्मियों के नियमितिकरण और उनके बेहतर जीवन के लिए सम्मानजनक वेतनमान का सवाल भाजपा-कांगे्रस, सपा-बसपा जैसे दलों के एजेण्डे में नहीं है। यहीं नहीं पूत के पांव पालने में ही दिखाती नई नवेली पार्टी आम आदमी पार्टी ने भी अपने दिल्ली में बीते 49 दिनों के कार्यकाल में इस सवाल पर किए अपने वायदें को पूरा नहीं किया यहां तक कि इसकी याद दिलाने के लिए आंदोलन में उतरे मजदूरों पर दमन ढाया और एस्मा तक लगा दिया। आप यह समझ लीजिए कि अच्छे दिन आने वाले है का नारा लगाने वाली मोदी सरकार के कथित सुशासन का मात्र एक ही मतलब है अच्छे दिन अडाणी, अम्बानी, टाटा और बिडला जैसे कारपोरेट घरानों के और बुरे दिन हम ठेका मजदूरों के आने वाले हैं। इनके गुजरात में कत्लेआम कर, दमन के बूते मजदूर आंदोलन को खत्म कर दिया गया। आज गुजरात में काम करने वाला मजदूर सबसे कम मजदूरी पाता है और अपने शरीर में एड्स जैसी बीमारी लेकर आता है।
वहीं आपने देखा है कि पिछले दस वर्षो से ठेका और आउटसोर्सिग मजदूरों, आगंनबाड़ी, आशा जैसी स्कीम वर्करों के नियमितीकरण, सम्मानजनक वेतनमान, ईपीएफ, बोनस समेत उनके कानूनी अधिकारों के लिए हमने न्यायालय से लेकर सड़क तक संघर्षो के बदौलत मजदूरों के जीवन में बेहतरी को लाने का काम किया है। अभी हाल ही में संसद के अंतिम सत्र में आइपीएफ के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने दिल्ली में जंतर-मंतर पर दस दिवसीय उपवास किया और इससे पहले पिछले वर्ष जून माह में लखनऊ में विधानसभा के सम्मुख भी दस दिन का उपवास किया था। दोस्तों, आप यह समझ लीजिए कि ये मुद्दें सरकारों के बनने और बिगड़ने से हल होने वाले नहीं है। आप खुद ही देख रहे हैं नीतियों के मामले में दलों के बीच का फर्क खत्म हो गया है, इसलिए दलों और नेताओं के विकल्प की नहीं आज जरूरत जनपक्षधर नीतियों के विकल्प को बनाने की है। इस चुनाव में आप सबकी राय और सलाह के बाद हमने मानवाधिकार कार्यकर्ता व उ0 प्र0 पुलिस के पूर्व आई0 जी0 एस0 आर0 दारापुरी को राबर्ट्सगंज संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया है।
हम चाहते है कि राबर्ट्सगंज लोकसभा क्षेत्र एक माडल क्षेत्र बने और 543 में कम से कम एक आदमी लोकसभा में जाएं जो इन सवालों पर देश का ध्यान आकृष्ट कराए और इन्हें हल कराए। इसीलिए हम अपील करेंगे कि इस चुनाव में अपनी जिदंगी की बेहतरी के लिए अपनी ताकत दिखाए और अपना मत कैमरा वाले बटन पर दें।
निवेदक
दिनकर कपूर, प्रदेश संगठन प्रभारी, आइपीएफ, अवधराज सिंह, जिलाध्यक्ष सीटू व सदस्य जिला कमेटी सीपीएम, राजेश सचान प्रदेश महामंत्री वर्कस फ्रंट, सुरेन्द्र पाल अध्यक्ष ठेका मजदूर यूनियन, रमेश खरवार विधानसभा प्रभारी आइपीएफ, शिव प्रसाद उपाध्याय जिलाध्यक्ष नौजवान सभा, कन्हैया गुप्ता, तेजधारी गुप्ता, मणिशंकर पाठक, मोहन प्रसाद, गामा उपाध्याय, गणेश प्रसाद ओबरा इकाई एवं समस्त ठेका मजदूर।

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