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फिर बोला पाकिस्तान- हाँ, जारी रखेंगे कश्मीरी अलगाववादियों से बात !

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर। पाकिस्तान ने एक बार फिर साफ कहा है कि भारत से वार्ता करने के लिए वह कश्मीरी अलगाववादियों से सलाह-मशविरा बंद नहीं करेगा।

संयुक्त राष्ट्र में बुधवार को पाकिस्तान की तरफ से कही गई इस बात को भारत ने तुंरत खारिज कर दिया।

Pakistan has said that negotiations with India and consult with the Kashmiri separatists will not stop. Pakistan said in the United Nations on Wednesday and India immediately rejected this.

प्रतिष्ठित समाचारपत्र देशबन्धु में प्रकाशित खबर के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी ने कहा कि कश्मीर मसले के शांतिपूर्ण हल के लिए कश्मीरी अलगाववादियों से सलाह-मशविरा अत्यावश्यक है। उन्होंने कहा, ” (भारत से) वार्ता के लिए इस सलाह-मशविरे को रोकने की पूर्व शर्त न केवल अस्वीकार्य है बल्कि यह विपरीत नतीजे देने वाली भी है।”

भारतीय राजनयिक अभिषेक सिंह ने पाकिस्तान की इस बात को खारिज करते हुए इसे भारत के अंदरूनी मामले में दखलंदाजी बताया।

लोधी ने बीते महीने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ द्वारा सुझाए गए चार सूत्री शांति फार्मूले को दोहराया। उन्होंने कहा कि भले ही भारत से सकारात्मक प्रतिक्रिया न मिल रही हो लेकिन फिर भी “पाकिस्तान सभी मुद्दों पर बात करने के लिए तैयार है।”

भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन के प्रथम सचिव अभिषेक सिंह ने महासभा में लोधी के प्रस्ताव को खारिज कर दिया। उन्होंने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के जवाब को दोहराया, “हम चार सूत्र नहीं चाहते। हम सिर्फ एक सूत्र चाहते हैं-आतंकवाद छोड़ दो और फिर हम बैठकर बात करते हैं।”

सिंह ने याद दिलाया कि स्वराज ने कहा था, “भारत बातचीत चाहता है। लेकिन, बातचीत और आतंकवाद एक साथ नहीं हो सकते।”

सुषमा ने कहा था कि पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) स्तर की बातचीत में आतंकवाद पर चर्चा करते हैं। अगर इस चर्चा का सकारात्मक नतीजा निकला तो फिर सभी मुद्दों पर द्विपक्षीय बात के लिए भारत तैयार है।

भारत-पाकिस्तान की एनएसए स्तर की बात इसलिए नहीं हो सकी थी क्योंकि पाकिस्तान बातचीत से पहले कश्मीरी अलगाववादियों से मिलने पर अड़ गया था।

शरीफ के चार सूत्री फार्मूले में ताकत के इस्तेमाल की बात न करने, कश्मीर को विसैन्यीकृत करने, सियाचिन ग्लेशियर से सेना हटाने और नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम को औपचारिक रूप देना शामिल है।

लोधी ने कश्मीर मुद्दे पर कहा कि बजाए जनमत संग्रह कराने के “कश्मीर के लिए लोगों पर भीषण अत्याचार किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि नियंत्रण रेखा पर बढ़ते तनाव को खत्म करने की जरूरत है।

संयुक्त राष्ट्र के काम से संबद्ध रपट पर मलीहा लोधी के भाषण के बाद संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि असोक कुमार मुखर्जी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि पाकिस्तान की सम्मानित प्रतिनिधि ने उस मुद्दे को उठाया जिसका आज की बहस से कोई लेना-देना ही नहीं है।”

उन्होंने कहा, “हमारे बीच राजनयिक संबंध है। इस तरह के मुद्दे इसी संबंध के दायरे में उठने चाहिए न कि कहीं और।”

जवाब देने के हक का इस्तेमाल करते हुए अभिषेक सिंह ने कहा, “ये बातें इसलिए और भी विचित्र हो जाती हैं कि इन्हें एक ऐसा देश कह रहा है जिसने भारत के जम्मू एवं कश्मीर के एक भाग पर अवैध कब्जा कर रखा है। इस तरह की बातें भारत के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी है। इसलिए हम इन्हें खारिज करते हैं।”

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