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बंगाल-मतदान के बाद हिंसा फिलहाल ट्रेलर है, बाकी फिल्म 19 मई के बाद

अंतिम चरण में फिर भूत नाच की तैयारी…
पुलिस अफसरों के साथ सांसद की बैठक का आरोप लगाया सूर्यकांत ने और कहा कि वफादार अफसरान को केंद्रीय वाहिनी को निष्क्रिय करने की जिम्मेदारी सौंपी गयी है…
जादू की छड़ी की तरह दीदी के पुलिस को देख लेने की धमकी का असर भी हो रहा है…
बाहुबल के अलावा धनबल भी कम नहीं है, फिरभी दीदी आलआउट खेल क्यों रही हैं, यह पहेली है…
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
कोलकाता (हस्तक्षेप)। बंगाल में वाम कांग्रेस गठबंधन के नेता सूर्यकांत मिश्र ने बेहद सनसनीखेज तरीके से आरोप लगाया है कि सत्ता दल के सांसद शुभेंदु अधिकारी ने पूर्व मेदिनीपुर के पुलिस अफसरान के साथ देर रात गुप्त बैठक करके अंतिम चरण में वोट लूटने का प्लान बनाया है और केंद्रीय वाहिनी को निष्क्रिय करने की जिम्मेदारी वफादार पुलिस अफसरान को सौंपी गयी है। इस सिलसिले में चुनाव आयोग को गठबंधन की ओर से बैठक के पूरे ब्योरे के साथ शिकायत की गयी है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरण का प्रचार अभियान मंगलवार को समाप्त हो गया। पूर्वी मेदनीपुर और कूच बिहार जिलों के 25 निर्वाचन क्षेत्रों में आगामी पांच मई को चुनाव होना है।
दीदी को अपनी प्रबल लोकप्रियता के बारे आत्मविश्वास बना हुआ है और अंतिम चरण के मतदान से पहले वे घूम घूमकर दावा कर रही हैं कि उन्हें बहुमत मिल चुका है।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए मैदान में उतरे 1961 उम्मीदवारों में से 244 करोड़पति हैं। करोड़पति उम्मीदवारों की सूची में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस 114 उम्मीदवारों के साथ शीर्ष स्थान पर है। बाहुबल के अलावा धनबल भी कम नहीं है, फिरभी दीदी आलआउट खेल क्यों रही है, यह पहेली है।
संघ परिवार ने उन्हें जिताने में कोई कसर भी नहीं छोड़ी है तो धर्मोन्मादी ध्रुवीकरण की वजह से समझा जाता है कि मुसलमानों ने दीदी के हक में ही वोट डाले हैं।
हालांकि संसद में भाजपा को खुल्ला मदद की तर्ज पर भाजपा के खिलाफ दीदी का जिहादी तेवर ममता राज को उखाड़ने की भाजपा नेताओं की तरह अब भी नूरा कुश्ती का जलवा बहार है। मसलन अंतिम चरण मतदान का चुनाव प्रचार समाप्त होने से कुछ घंटे पहले कूचबिहार के दिनहाटा में चुनावी सभा में ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा बंगाल को विभाजित करने की संकीर्ण राजनीति कर रही है।
सिर्फ चुनावी समीकरण के बीजगणित से चुनाव नहीं जाते, यह सच भी है और पिछले पांच साल सोते रहने के बाद वाम कांग्रेस जनाधार में इधर बारी फेरबदल हुआ हो, ऐसा भी नहीं है।
शारदा फर्जीवाड़ा का लोकसभा नतीजों पर असर हुआ ही नहीं और विपक्ष का सूपड़ा साफ हो गया है तो नारद स्टिंग मामले में दीदी के इकबालिया बयान के बावजूद कितना असर होगा कहना मुश्किल है। इसलिए विपक्ष के दावों से दीदी को सरदर्द कतई नहीं होगा।
बहरहाल, दीदी के सरदर्द का सबक है अचानक उनके मातहत पुलिस महकमे की हुक्मउदूली और राज्य सरकार के कर्मचारियों का असंतोष। अमन चैन के तहत भारी मतदान भी उनके लिए बहुत गुस्से की वजह है तो भूत बिरादरी के खिलाफ उनका गुस्सा एकदम जायज है। अंतिम चरण के मतदान में चुनाव जीतने के बाद देख लेने की धमकी के साथ हिंसा का जो ट्रेलर जारी है, उसका कुल मकसद अंतिम चरण में बढ़त हासिल करना है ताकि गुपचुप कोई धमाका अगर हुआ भी हो तो इसका असर कम किया जा सके।
जादू की छड़ी की तरह दीदी के पुलिस को देख लेने की धमकी का असर भी हो रहा है
खास कोलकाता महानगर में पुलिस की मौजूदगी में मतादान के बाद से लगातार विभिन्न इलाकों में दहशतगर्दी का जो आलम है, वह हैरतअंगेज है। राजनीतिक हिंसा अक्सर महानगरों को स्पर्श नहीं करती, यह मिथ टूट रहा है और दावानल वातानुकूलित लोगों को झुलसा देता है, इससे यही साबित होता है। आज रात ग्यारह बजे के आसपास कहीं कहीं आंधी पानी की वजह से तापमान और हवा में नमी घुचन में थोड़ी कमी की संभावना है लोकिन राजनीतिक हिंसा में कोई कमी के आसार फिलहाल नहीं है। अंतिम चरण के मतदान में फिर खुल्ला भूत नाच की तैयारी है।
दक्षिण कोलकाता के नये महानगरीय इलाके में बाघा जतीन, यादवपुर, कस्बा, हरिदेव पुर, पेयाराबागान वगैहर वगैरह इलाकों में दूध पीते बच्चे भी बख्शे नहीं गये और मुख्यमंत्री की धमकी के बाद पुलिस फिर वफादारी निभाने लगी है। मतदान के दौरान जो पुलिस सक्रिय रही और पूरे राज्य में तारीफ बटोरती रही, खास कोलकाता में सर्वत्र उस पुलिस की मौजूदगी के मध्य मतदान के बाद से भूत बिरादरी का तांडव चल रहा है। पुलिस मूक दर्शक है।
बाघा जतीन में विपक्ष को वोट देने वालों, विपक्षी एजेंटों और कार्यकर्ताओं के घरों दुकानों पर व्यापक तोड़फोड़ करते हुए धमकी दी गयी है कि यह तो फिलहाल ट्रेलर है, बाकी फिल्म 19 मई के बाद।
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