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बहुत हुआ नारी पे वार कभी न आयेगी मोदी सरकार

संजीव कुमार “अंतिम”
दिल्ली में बीते वर्ष हुए बलात्कार और हत्या का नाम ले लेकर महिलाओं को सम्मान देने की दुहाई देने वाले गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी ने कभी अपने खुद के गिरेबान को झांक कर देखने की कोशिश ही नहीं की। गुजरात में वर्ष 2001 में लिंग अनुपात 920 (प्रति 1000) था जो कि 2011 में घटकर 918 हो गया है (सामाजिक आर्थिक समीक्षा, गुजरात सरकार 2012-13, पृ.स.4)। जबकि इसी दौरान कुल भारत का लिंग अनुपात 933 से बढ़कर 940 हो गया था(20 जुलाई 2013 एशियन ऐज)। गुजरात में 0 से 6 वर्ष के बच्चों में लिंग अनुपात इसी काल के दौरान मामूली तौर पर 883 से बढ़कर 886 हुआ है (सामाजिक आर्थिक समीक्षा, गुजरात सरकार 2012-13, पृ.स. N-VII )।

गुजरात में भारत के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक कुपोषित महिलाएं हैं। गुजरात में 55 प्रतिशत महिलाएं रक्तहीनता की शिकार हैं (फ्रंट लाइन 23 फरवरी 2013)। गुजरात में वर्ष 1991 से 2001 के दौरान प्रजनन के दौरान माताओं की मृत्यु में 48% की गिरावट दिखी थी जबकि अगले दस वर्षों अर्थात वर्ष 2001 से 2011 के दौरान ये गिरावट मात्र 26% की हुई थी (सामाजिक आर्थिक समीक्षा, गुजरात सरकार 2012-13, पृ.स. 50)। हाल ही में जारी गुजरात के मानव विकास रिपोर्ट में महिला साक्षरता के मामले में गुजरात को पूरे भारत में 19वां स्थान मिला है। वर्ष 2001 से 2011 के दौरान गुजरात में स्त्री साक्षरता में 3% से भी कम की सुधार देखने को मिली है जबकि इसी दौरान पुरुषों में ये सुधार 7% से भी अधिक दिखी है (20 जुलाई एशियन ऐज)। शिक्षा के क्षेत्र में लैंगिक असमानता गुजरात में राष्ट्रीय औसत से लगभग 20% अधिक है जबकि 11 से 14 वर्ष के आयु वाले बच्चों में ये विभेद राष्ट्रीय औसत से ढाई गुना अधिक है(अतुल सूद तालिका 9.3, पृ.स. 269)।

अगर हम गुजरात में शिक्षा में लैंगिक असमानता के धार्मिक पक्ष को देखें तो पता चलता है कि इस क्षेत्र में गुजरात का मुस्लिम समुदाय हिन्दुओं से कहीं आगे है और यहाँ तक लिंग अनुपात के मामले में भी मुसलमानों की स्थिति हिन्दुओं से बेहतर है (सच्चर समिति रिपोर्ट, पृ.स. 287-89)।

अब जाहिर है कि जब इस तरह के आंकड़े मोदीजी के पास दिखाए जायेंगे तो या तो वो सर खुजायेंगे या आंकड़े इक्कठा करने वालों को पाकिस्तान, अमेरिका और ना जाने कहाँ कहाँ का एजेंट संबोधित कर उन्हें पाकिस्तान भागने की धमकी दे डालेंगे और भविष्य में सच्चर समिति के जैसे धर्म के आधार पर किसी प्रकार का कोई समिति बनाने पर रोक लगा देंगे। पर क्या मोदीजी कैग पर भी प्रतिबन्ध लगाएँगे?

मनरेगा पर कैग की रिपोर्ट के अनुसार गुजरात ने मनरेगा को लागू करने में बहुत ही उदासीनता दिखाई है। इस सम्बन्ध में मनरेगा के तहत महिला मजदूरों को फायदा पहुंचाने के सन्दर्भ में गुजरात का प्रदर्शन, राष्ट्रीय प्रदर्शन की तुलना में बिलकुल आधा है। मनरेगा के मजदूरों में उनके द्वारा किये गए कार्यों और मजदूरी के प्रति जागरूकता फ़ैलाने के मामले में तो गुजरात का प्रदर्शन बिहार और ओड़िसा से भी ख़राब है ( http://www.icisa.cag.gov.in/performance%20audit/performance%20audit%20reports/performance%20audit%20%20report%20on%20national%20rural%20employment%20guarantee%20act/introduction.pdf http://www.accountabilityindia.in/accountabilityblog/2640-highlights-cag-performance-audit-mgnrega)।

2004-05 से 2009-10 के दौरान गुजरात में विनिर्माण क्षेत्र में वृद्धि की दर 9.6% थी जबकि इस क्षेत्र में महिलाओं के लिए रोजगार की दर -22.18% रही) (अतुल सूद, तालिका  8.1)।

वैसे भी मोदीजी तो उस विचारधारा में विश्वास करने वाले शख्स हैं जो महिलाओ को सिर्फ सम्मान की दृष्टि से देखते हैं और उन्हें घर के अन्दर सम्मान का नुमायन्दा बनाकर रहने देना चाहते हैं।

(This article is part of my report on Gujarat’s model of development. I prepared this report for a student forum (Jagriti Natya Manch) which consist students from JNU, DU, IIMC. I am one of the founding members of this forum)

About the author

संजीव कुमार, लेखक रंगकर्मी व सामाजिक कार्यकर्ता हैं व छात्रों के मंच “भई भोर” व “जागृति नाट्य मंच” के संस्थापक सदस्य हैं।

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