Home » बाटला हाऊस कांड में डीसीपी आलोक कुमार की भूमिका को क्यों छुपाया गया- रिहाई मंच

बाटला हाऊस कांड में डीसीपी आलोक कुमार की भूमिका को क्यों छुपाया गया- रिहाई मंच

लखनऊ में हुये शिया सुन्नी फसाद सरकार की साजिश – रिहाई मंच
अलविदा की नमाज में आतंकवाद के नाम पर कैद निर्दोषों की रिहाई के लिये दुआ माँगने की अपील
 लखनऊ 1 अगस्त। रिहाई मंच ने लखनऊ में शिया-सुन्नी के नाम पर हुयी हिंसक घटनाओं और तोड़-फोड़ को सपा सरकार की सोची समझी साजिश का नतीजा बताया है।

मंच का आरोप है कि मुसलमानों के सपा से दूर होते जाने और मुस्लिम समुदाय द्वारा उसे 2014 में सबक सिखाने की तैयारी से डरी सरकार ने मुसलमानों के बीच सामुदायिक संघर्ष कराकर वोटों को बिखेरने की रणनीति के तहत ऐसा किया है। रिहाई मंच ने लखनऊ की अमन पसंद अवाम से अपील किया कि वो सरकार की ऐसी साजिशों पर नजर रखे और किसी भी कीमत पर शहर का माहौल न बिगड़ने दें। क्योंकि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आयेंगे सपा भाजपा को मजबूत करने के लिये इस तरह के आपराधिक हथकंडे अपनायेगी।

रिहाई मंच के प्रवक्ताओं शाहनवाज आलम और राजीव यादव ने कहा कि बाटला हाउस फर्जी मुठभेड़ मामले में जिस तरह पुलिस डीसीपी आलोक कुमार की मौका ए वारदात, एल 18 पर मौजूदगी को शुरू से ही छुपाती रही है उससे इस शक को और बल मिलता है कि इंस्पैक्टर मोहन चंद शर्मा की हत्या के पीछे पुलिस की कोई सोची समझी साजिश है। उन्होंने कहा कि बटला कांड के ठीक बाद जारी तस्वीरों और वीडियो फुटेज में डीसीपी आलोक कुमार को हाथ मंे रिव्लावर लिये दिखाया गया लेकिन बावजूद इसके न तो एफआईआर में और ना बाकी तफ्तीशों में ही उनकी मौजूदगी दर्ज की गयी। जिसका सीधा मतलब है कि पुलिस किसी गहरे राज को छुपाने के लिये उनकी उपस्थिति को छुपाना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस द्वारा इंस्पैक्टर मोहन चंद शर्मा का पोस्टमॉटर्म रिपोर्ट न देना इस आशंका को और पुष्ट करता है कि मोहन चंद शर्मा की हत्या डीसीपी आलोक कुमार की रिव्लावर से हुयी है। उन्होंने माँग की कि अगर सरकार सचमुच लोकतंत्र और न्याय में यकीन रखती है तो उसे बटला हाऊस कांड के दिन, 19 सितम्बर 2008 के डीसीपी आलोक कुमार की दिनचर्या और मोबाइल कॉल डिटेल सावर्जनिक करना चाहिए ताकि जनता बटला कांड की सच्चाई जान सके। रिहाई मंच के नेताओं ने कहा कि अभियोजन पक्ष द्वारा यह कहानी गढ़ना कि शहजाद ने मोहन चंद शर्मा की हत्या करने के बाद पिस्तौल गंग नहर में फेक दिया, भी आलोक कुमार द्वारा मोहन चंद शर्मा की हत्या किये जाने के शक को पुष्ट करता है। क्योंकि पुलिस द्वारा जाँच में इस बात का उल्लेख बिल्कुल ही नहीं किया गया कि उसने शहजाद द्वारा गंग नहर में फेंके गये असलहे की बरामदगी के लिये क्या-क्या कोशिशें की और जिन गोताखोरों का इस्तेमाल किया गया उनके नाम क्या थे।

हाजी फहीम सिद्दीकी और सैयद मोईद अहमद ने कहा कि मौलाना तारिक कासमी की रिहाई, मौलाना खालिद मुजाहिद की पुलिस कस्टडी में हत्या और उनके हत्यारे पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी को लेकर रिहाई मंच का 22 मई से चल रहा अनिश्चितकालीन धरना अमन व अमान के साथ शांति पूर्ण तरीके से आज बहत्तर दिन पूरे कर लिये लेकिन प्रदेश की अखिलेश सरकार ने अभी तक वादे के मुताबिक मानसून सत्र न बुलाकर आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट पर कोई अमल नहीं किया। रमजान का मुबारक महीना जो कि इबादत का महीना है। इस महीने में भी तमाम इंसाफ पसन्द हिंदू व मुसलमाना दोनों ही इस नांइंसाफी के खिलाफ काधें से काधां मिलाकर आवाज उठा रहे हैं। अल्लाह ताला रोजदार की दुआवों को कुबूल फरमाता है कल जुमा अलविदा है, इस मौके पर तमाम इमाम ए मसाजिद से गुजारिश है कि वो जुमें के खुतबे के वक्त जो बेगुनाह जेलों में बंद हैं उनकी रिहाई के लिये इजतिमाई दुआ फरमाएं। रिहाई मंच जो कि इस नाइंसाफी के खिलाफ जिद्दोजहद कर रहा है उसकी कामयाबी की भी दुआ करें। मौजूदा सपा की नाकाम सरकार सोलह महीने की मुद्दत में 33 फसाद हो चुके हैं, अल्लाह ऐसी सरकार से निजात दिलाए। तमाम अहले ईमान गुजारिश है कि अपनी मसरुफियत में से थोड़ा वक्त निकालकर रिहाई मंच की इस तहरीक में शामिल हों, यह भी एक जम्हूरी जिहाद है।

धरने के समर्थन में आए शोषित समाज दल के नेता केदारनाथ सचान ने कहा कि सपा मनुवादी एजेण्डे के तहत अल्पसंख्यकों, पिछड़ों और दलितों के खिलाफ राज्य प्रायोजित हिंसा करवाकर भाजपा को मजबूत करना चाहती है। इससे अवाम को सावधान रहना होगा।

मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पाण्डे ने कहा कि सपा सरकार जिस तरीके से आरडी निमेष कमीशन की रिपोर्ट को लेकर गैरजिम्मेदाराना रवैया अपनाए हुये है वो इस मुल्क की सुरक्षा के लिये उचित नहीं है। क्योंकि इस सवाल को सिर्फ इतने तक रखकर नहीं देखना चाहिए कि इससे बेगुनाहों पर जो आतंकी का ठप्पा लगा है वो हट जायेगा बल्कि इसे इस स्तर पर देखना चाहिए कि आतंकवाद को लेकर सरकारों की क्या नीति है और सुरक्षा एजेंसियाँ चाहे वो आईबी हो, एटीएस या एसटीएफ हो वो किस तरह से वैश्विक टेरर पालिटिक्स के आधार पर भारत के मुसलमानों पर हमलवार हैं।

धरने को सम्बोधित करते हुये इलाहाबाद से आये ऑल इंडिया स्टूडेन्ट एसोसिएशन (आइसा) के प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि सपा सरकार अल्पसंख्यक, पिछड़ा व दलित विरोधी है। इस बात को स्पष्ट तरीके से देखा जा सकता है कि दो दिनों पहले इसी विधानसभा धरना स्थल पर जब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में त्रिस्तरीय आरक्षण की माँग को लेकर हजारों छात्र प्रदर्शन कर रहे थे उन पर तथाकथित पिछड़े वर्ग की सरकार उनकी माँग को मानने बजाये लाठी चलवाती है, आज यूपी सरकार ने प्रतापगढ़ के ईमानदार सीओ जियाउल हक की हत्या करवाने वाले दोषी रघुराज प्रताप सिंह को सीबीआई से क्लीन चिट दिलवा दिया। जिस तरीके से सपा के रंग में रंगे होर्डिग से प्रदेश की राजधानी को पाटा जा रहा है कि ‘सत्य परेशान हो सकता है पर पराजित नहीं’ वो इस प्रदेश सरकार की विकृत सामंती सोच को दर्शाता है कि किस तरह वो अन्याय करके उसको न्यायोचित ठहराने की कोशिश कर रही है। जिस तरीके से पिछले 72 दिनों से आतंकवाद के नाम पर बेगुनाहों की रिहाई के सवाल पर रिहाई मंच संघर्ष कर रहा है ऐसे में मुस्लिम समाज को यह बात समझ लेनी चाहिए कि जिस सामाजिक न्याय और मंडल कमीशन की राजनीति से पैदा हुयी सपा पिछड़े वर्ग की नहीं हुयी वो मुसलमानों की कभी नहीं हो सकती है।

धरने को सम्बोधित करते हुये डॉ. अली अहमद कासमी ने कहा कि सरकार ने जिस तरीके से हम रोजदारों को रिहाई मंच की मांगों को न माँग कर धरने पर बैठने के लिये मजबूर किया है उसका खामियाजा सपा को भुगतना पड़ेगा। बेगुनाहों की रिहाई के इस आंदोलन को तोड़ने के लिये सपा सरकार ने रिहाई मंच का टेंट नहीं उखड़वाया बल्कि आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों की आवाज को खामोश करने की कोशिश की उसका जवाब हमने यहीं दे दिया कि हमने हर मुश्किलात में इस संघर्ष को चलाया और बेगुनहों की रिहाई तक यह मुहिम चलती रहेगी।

इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान और मुस्लिम मजलिस के जैद अहमद फारुकी ने कहा कि सरकारें जनता का ध्यान बुनियादी सवालों से हटाने के लिये कभी आतंकवाद का हौव्वा खड़ा करती हैं तो कभी दंगे का सहारा लेती है। जिस तरीके से सपा सरकार ने दंगों को हथियार बनाया है यह एक पुरानी चाल थी जिसे आज जनता समझ चुकी है। लेकिन सत्ता के नशे में चूर सपा को समझ में नहीं आ रहा है। इसलिये आने वाले चुनाव में ही उसे इसका खामियाजा नहीं भुगतना पड़ेगा उसका अस्तित्व भी खत्म हो जायेगा।

रिहाई मंच के नेता हरेराम मिश्र ने परिवहन निगम संविदा/नियमित कर्मचारी संघर्ष मोर्चा उत्तर प्रदेश के विधान सभा पर चल रहे धरने का समर्थन करते हुये कहा कि जिस तरीके से सार्वजनिक क्षेत्रों को बेचने की अखिलेश यादव तैयारी कर रहे है उसकी भरपाई लैपटाप रुपी लेमन चूस से नहीं हो सकती। ऐसे में परिवहन से जुड़े कर्मचारियों की माँग प्रदेश सरकार तत्काल मांने।

उत्तर प्रदेश की कचहरियों में सन् 2007 में हुये सिलसिलेवार धमाकों में पुलिस तथा आईबी के अधिकारियों द्वारा फर्जी तरीके से फँसाये गये मौलाना खालिद मुजाहिद की न्यायिक हिरासत में की गयी हत्या तथा आरडी निमेष कमीशन रिपोर्ट पर कार्रवायी रिपोर्ट के साथ सत्र बुलाकर सदन में रखने और खालिद के हत्यारों की तुरन्त गिरफ्तारी की माँग को लेकर रिहाई मंच का अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को 72 वें दिन भी जारी रहा।

धरने में भारतीय एकता पार्टी (एम) के सैयद मोईद अहमद, संदीप पांडे, शिबली बेग, तुगरल, मोहम्मद सुलेमान, केदार नाथ सचान, पीसी कुरील, भवननाथ पासवान, ब्रजेश दिक्षित, एहसानुल हक मलिक, मौलाना कमर सीतापुरी, डॉ अली अहमद कासमी, असदुल्ला, अमित मिश्रा, राजकुमार, मुख्तार अहमद, सुनील मौर्या, हाजी फहीम सिद्दिीकी, हरे राम मिश्रा, बब्लू यादव, मोहम्मद फैज, शाहनवाज आलम और राजीव यादव आदि शामिल रहे।

About हस्तक्षेप

Check Also

भारत में 25 साल में दोगुने हो गए पक्षाघात और दिल की बीमारियों के मरीज

25 वर्षों में 50 फीसदी बढ़ गईं पक्षाघात और दिल की बीमांरियां. कुल मौतों में से 17.8 प्रतिशत हृदय रोग और 7.1 प्रतिशत पक्षाघात के कारण. Cardiovascular diseases, paralysis, heart beams, heart disease,

Bharatendu Harishchandra

अपने समय से बहुत ही आगे थे भारतेंदु, साहित्य में भी और राजनीतिक विचार में भी

विशेष आलेख गुलामी की पीड़ा : भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रासंगिकता मनोज कुमार झा/वीणा भाटिया “आवहु …

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा: चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा : चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश Occupy national institutions : …

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

अच्छे नहीं, अंधेरे दिनों की आहट

मोदी सरकार के सत्ता में आते ही संघ परिवार बड़ी मुस्तैदी से अपने उन एजेंडों के साथ सामने आ रहा है, जो काफी विवादित रहे हैं, इनका सम्बन्ध इतिहास, संस्कृति, नृतत्वशास्त्र, धर्मनिरपेक्षता तथा अकादमिक जगत में खास विचारधारा से लैस लोगों की तैनाती से है।

National News

ऐसे हुई पहाड़ की एक नदी की मौत

शिप्रा नदी : पहाड़ के परम्परागत जलस्रोत ख़त्म हो रहे हैं और जंगल की कटाई के साथ अंधाधुंध निर्माण इसकी बड़ी वजह है। इस वजह से छोटी नदियों पर खतरा मंडरा रहा है।

Ganga

गंगा-एक कारपोरेट एजेंडा

जल वस्तु है, तो फिर गंगा मां कैसे हो सकती है ? गंगा रही होगी कभी स्वर्ग में ले जाने वाली धारा, साझी संस्कृति, अस्मिता और समृद्धि की प्रतीक, भारतीय पानी-पर्यावरण की नियंता, मां, वगैरह, वगैरह। ये शब्द अब पुराने पड़ चुके। गंगा, अब सिर्फ बिजली पैदा करने और पानी सेवा उद्योग का कच्चा माल है। मैला ढोने वाली मालगाड़ी है। कॉमन कमोडिटी मात्र !!

Entertainment news

Veda BF (वेडा बीएफ) पूर्ण वीडियो | Prem Kahani – Full Video

Veda BF – Official Movie Trailer | मराठी क़व्वाली, अल्ताफ राजा कव्वाली प्रेम कहानी – …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: