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मई दिवस पर जर्मन लेखक हाइनरिश ब्योल की प्रसिद्ध दंतकथा तृप्त मछुआरा

तृप्त मछुआरा  
लेखक– हाइनरिश ब्योल
(मूल जर्मन से अनूदित, अनुवादक-प्रतिभा उपाध्याय)
यूरोप के पश्चिमी तट के एक बंदरगाह पर मैले कुचेले कपड़े पहने एक आदमी अपनी मछली पकड़ने की नाव में लेटा हुआ ऊंघ रहा था। आकर्षक पोशाक पहने एक पर्यटक पिक्चर लेने के लिए अपने कैमरे में रंगीन रील डाल रहा था : नीला आकाश, हरा समुद्र, बर्फ से ढकी सफ़ेद लहरों की शांतिपूर्ण क़तार, काली नौका, मछली पकड़ने के लिए लाल टोपी ।

क्लिक। और एकबार क्लिक। चूंकि सभी अच्छी चीज़ें तीन होती हैं, तीसरी बार क्लिक।

कर्कश,  विपरीत आवाज़ के कारण वहाँ ऊंघने वाला मछुआरा जाग जाता है। वह सोता हुआ ही उठ बैठता है और नींद में ही अपनी सिगरेट सुलगाता है,  लेकिन इससे पहले कि यह समझ में आये कि वह क्या ढूंढ रहा है, उत्साही पर्यटक ने उसकी नाक के नीचे सिगरेट का एक पैकेट रख दिया, सीधे उसके मुंह में नहीं,  बल्कि उसके हाथ में सिगरेट थमा दी  और चौथी बार क्लिक करते ही शीघ्र उत्साह से उसने सिगरेट लाइटर बंद कर दिया।

अत्यधिक विनम्रता के चलते एक अजीब सी स्थिति पैदा हो गयी, जिसे वह स्थानीय भाषा में बातचीत के माध्यम से पाटने का प्रयास करता है।

” आज आपके दिन की शुरुआत अच्छी होगी।”

मछुआरे ने असहमति में सिर झटका।

किसी ने मुझे बताया है कि मौसम सुहावना है।

मछुआरे ने सिर हिलाया।

आपको बाहर नहीं जाना पड़ेगा ।

मछुआरे के सिर हिलाने से पर्यटक की बेचैनी बढ़ती जा रही थी। इस बेचारे मैले कुचैले कपड़े वाले आदमी के दिल में ज़रूर कुछ है और एक अच्छा मौका हाथ से गँवा देने के कारण उसे निराशा हुई है।

ओह, मुझे अफ़सोस है, आपकी तबियत ठीक नहीं है क्या?

अंत में इशारे छोड़कर मछुआरे ने मुंह खोलकर बातचीत की ।

उसने कहा ” मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। इससे बेहतर मुझे कभी नहीं लगा।”

वह उठकर खड़ा हो गया, थोड़ा तना, मानो यह दिखाना चाहता हो कि वह कितना पहलवान है।

मुझे बहुत अच्छा लग रहा है ।

पर्यटक के चहरे का भाव और विदीर्ण हो गया। वह अपने प्रश्न को अधिक दबा नहीं सकता, अन्यथा उसका दिल बैठ जाने का खतरा है।

फिर आप बाहर क्यों नहीं जाते?

मछुआरे ने तपाक से उत्तर दिया : “क्योंकि मैं आज सुबह ही बाहर जाकर आया हूँ”।

क्या दिन की शुरुआत अच्छी थी?

इतनी अच्छी थी कि मुझे अब दोबारा बाहर जाने की ज़रूरत ही नहीं है। मैंने अपनी टोकरी में चार झींगा मछलियाँ रख ली हैं और लगभग दो दर्जन समुद्री मछलियाँ भी पकड़ ली हैं।

अंत में मछुआरा पूरी तरह जाग जाता है, थोडा सामान्य होता है वह, पर्यटक के कंधे पर सांत्वनापूर्वक हाथ रखता है।

पर्यटक के चहरे की यह अभिव्यक्ति उसे अनुचित फिर भी मार्मिक, चिंतापूर्ण प्रतीत होती है। अजनबी की आत्मा को तसल्ली देने के लिए वह कहता है “मेरे पास आने वाले कल और परसों के लिए पर्याप्त है।”

“क्या आप मेरी एक सिगरेट लेंगे?”

हाँ, धन्यवाद।

मुंह में सिगरेट रखे हुए अजनबी ने पांचवा क्लिक दिया। अपना सिर हिलाते हुए वह नाव के किनारे पर बैठ गया और उसने अपना कैमरा नीचे रख दिया, क्योंकि अपने भाषण पर जोर देने के लिए अब उसे दोनों हाथों की ज़रूरत थी।

वह कहता है, “मैं आपके व्यक्तिगत मामलों में हस्तक्षेप करना नहीं चाहता“, लेकिन पहले आप अपना परिचय दें। “आज आपने दूसरी, तीसरी और शायद चौथी बार भी काम किया है और आप तीन, चार, पांच और शायद दस दर्जन समुद्री मछलियाँ पकड़ लेते हैं, इसे एक बार फिर से बताइये”।

मछुआरा सिर हिलाता है।

पर्यटक कहता है, आप अधिकतम एक वर्ष में एक मोटर खरीद सकते हैं, दो वर्ष में एक दूसरी नाव, तीन या चार वर्षों में आप शायद एक छोटा जहाज़ खरीद सकते हैं। दो नावों या ज़हाज से आप स्वाभाविक रूप से बहुत कुछ कर सकते हैं। एक दिन आपके पास दो ज़हाज हो जायेंगे, तो आप….” उत्साह के कारण थोड़ी देर खामोश रहकर, “छोटा कोल्ड स्टोरेज बना सकेंगे, शायद एक धूम्र कक्ष भी, बाद में एक मांस, मछली पकाने वाली फैक्टरी, अपने निजी हेलीकाप्टर द्वारा उड़ भी सकेंगे, आप बहुत सारी मछलियां एकत्र कर सकते हैं और अपने जहाज़ों को रेडियो से काबू कर सकते हैं। आप मछलियों का प्राधिकरण ले सकते हैं। आप मछली का एक रेस्तरां खोल सकते हैं, बिचौलियों के बिना आप समुद्री झींगे का पेरिस निर्यात कर सकते हैं और फिर….” उत्साह से उसके मुंह से शब्द नहीं निकल रहे थे।

मछुआरा उस अजनबी का कंधा थपथपाता है, मानो बच्चे ने कुछ निगल लिया हो ।

मछुआरा धीरे से पूछता है, “तब क्या?”

पर्यटक ने शांत उत्साहपूर्वक मछुआरे से कहा “तब आप निश्चिंत होकर यहाँ बंदरगाह पर बैठ सकते हैं और धूप में ऊंघ सकते हैं और इस भव्य समुद्र का नज़ारा भी ले सकते हैं।”

मछुआरे ने कहा, “लेकिन मैं तो अभी भी यही कर रहा हूँ, सुकून से बंदरगाह पर बैठा हूँ और ऊंघ रहा हूँ, बस आपके क्लिक ने इसमें विघ्न डाल दिया।“

वास्तव में पर्यटक इस पर विचारमग्न हो गया, एक बार पहले भी उसने सोचा था, कि वह काम करता है, ताकि उसे दिन में एक बार से अधिक काम नहीं करना पड़े। मैले कुचैले वस्त्रों वाले मछुआरे के प्रति पर्यटक में कोई दया भाव नहीं रहा, अपितु उसे अब मछुआरे से थोड़ा रश्क हो रहा था।

 तृप्त मछुआरा (Der zufriedene Fischer) नोबल पुरस्कार प्राप्त जर्मन लेखक हाइनरिश ब्योल की प्रसिद्ध दंतकथा है, जो कार्य संस्कृति में गिरावट को दर्शाती  है। एक उत्साही पर्यटक एक छोटे मछुआरे को अपना जीवन सुधारने का मश्विरा देता है ,  लेकिन मछुआरे की उदासीनतापूर्ण निश्चितता देखकर वह अंत में वह विषण्णता से भर उठता है और मछुआरे से रश्क करता है। ब्योल द्वारा मई दिवस के अवसर पर लिखी यह कहानी ब्योल की सर्वश्रेष्ठ कहानियों में से एक है।

लेखक परिचय

मूल नाम : हाइनरिश थ्योडोर ब्योल

जन्म : 21 दिसंबर 1917

मृत्यु : 16 जुलाई  1985

विधाएँ : लघुकथा उपन्यास, व्यंग्य , अनुवाद

पुरस्कार :  नोबल पुरस्कार 1972 

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