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मनोरोगी हैं केजरीवाल !

आंदोलन करते समय सरकारी नौकरी न छोड़ने और बेईमानी का वेतन हजम करने और पकड़े जाने पर वापस करने वाले केजरीवाल को ‘ईमानदारी के पैगम्बर’ बनने की जरूरत कतई नहीं
गणेश तिवारी
यह सबको मालूम है किसी घोटाले, घपले, भ्रष्टाचार में किसी वामपंथी सांसद या मंत्री-विधायक का नाम नहीं आया। आपरेशन दुर्योधन, हवाला, घूसकांड, अनैतिक आचरण में इनका कभी किसी ने जिक्र भी करने की जुर्रत नहीं की। इनकी जीवन-शैली सादगी ही है।
लेकिन तरह-तरह के आरोपों से घिरे एनजीओ छाप केजरीवाल एंड कंपनी सिर्फ अपने आपको ईमानदार समझते हैं। जैसे ईमानदारी ‘ईश्वर’ हो और ये लोग उस ‘ईश्वर’ अकेले दूत। इस मनोरोग ने ही इन्हें इतनी हिम्मत दे दी कि वामपंथी नेताओं को आ आ पा में शामिल होने का न्यौता दे दिया।
आरटीआई आंदोलन करते समय सरकारी नौकरी न छोड़ने और बेईमानी का वेतन हजम करने और पकड़े जाने पर वापस करने वाले केजरीवाल को ‘ईमानदारी के पैगम्बर’ बनने की जरूरत कतई नहीं है। अपने साथियों सहित कुछ इलाज-पानी करवा लें तो अच्छा होगा।
(गणेश तिवारी की फेसबुक वॉल से साभार)

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गणेश तिवारी, बिलासपुर (छत्तीसगढ़) स्थित वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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