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ममता चमकेंगी खिलाड़ियों और सितारों के सहारे !

रीता तिवारी 
कोलकाता। आगामी लोकसभा चुनावों के बाद केन्द्र में सरकार के गठन में अहम भूमिका निभाने के मंसूबे पाल रहीं मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख- ममता बनर्जी को अबकी खिलाड़ियों और सितारों के सहारे अपनी किस्मत चमकने की उम्मीद है। यही वजह है कि बुधवार शाम को जारी उम्मीदवारों की सूची में उन्होंने इन दोनों तबके के लोगों को प्राथमिकता दी है। पिछली बार चुनाव जीते ज्यादातर लोगों को टिकट दिये गये हैं। पिछले आम चुनाव (2009) में कांग्रेस के साथ तालमेल की वजह से पार्टी ने 27 उम्मीदवार खड़े किये थे। लेकिन इस बार उसने सभी 42 सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का एलान कर दिया है। अपने गठन के बाद से तृणमूल कांग्रेस पहली बार बिना किसी दूसरे राजनीतिक दल के साथ गठबंधन के अकेले अपने बूते मैदान में उतरी है।
एक राष्ट्रीय पार्टी के तौर पर अपनी छवि बनाने की कवायद के तहत ममता ने पड़ोसी झारखंड की दो सीटों-रांटी और लोहरदगा के अलावा पूर्वोत्तर राज्यों मणिपुर और त्रिपुरा की सभी दो-दो सीटों पर भी अपने उम्मीदवार उतारे हैं। असम समेत बाकी राज्यों के लिये उम्मीदवारों का एलान बाद में किया जायेगा। यह सूची जारी करते हुये तृणमूल प्रमुख ने दावा किया कि उन्होंने महिलाओं, अनुसूचित जाति व जनजाति और अल्पसंख्यकों समेत सभी तबके के लोगों को प्रतिनिधित्व दिया है। उनकी सूची में 11 महिलाएं हैं।
गुजरे जमाने की अभिनेत्री मुनमुन सेन, बांकुड़ा संसदीय सीट से अपनी किस्मत आजमाएगी जबकि कभी भारतीय फुटबाल टीम की कमान संभालने वाले बाइचुंग भूटिया, दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र में मोर्चा संभालेंगे। वाममोर्चा की सहयोगी आरएसपी से नाता तोड़ कर तृणमूल में आने वाले पूर्व मंत्री दशरथ तिर्के को उत्तर बंगाल के आदिवासी बहुल अलीपुरदुआर सीट पर टिकट मिला है। पार्टी ने अबकी कई नए चेहरों को भी मैदान में उतारा है। इनमें ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी भी शामिल हैं।
राज्य चुनाव आयोग की ओर से घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, राज्य में 42 सीटों के लिये पांच चरणों में वोट पड़ेंगे। इस कार्यक्रम से ममता बेहद खुश हैं। उनका कहना है कि इससे उनको चुनाव प्रचार के लिये काफी समय मिल जायेगा।
ममता ने माकपा समेत विभिन्न राजनीतिक दलों को लेकर गठित तीसरे मोर्चे को थके-हारे दलों का गठबंधन करार दिया है। उनका कहना है कि वामपंथियों की भागीदारी वाला कोई भी मोर्चा कामयाब नहीं होगा। लोगों ने माकपा को पहले ही खारिज कर दिया है। यह तीसरा मोर्चा नहीं बल्कि एक थका हुआ मोर्चा है। उन्होंने भरोसा जताया कि आगामी लोकसभा चुनावों के बाद अलग तरह के संघीय मोर्चा का देश में शासन होगा।
तृणमूल प्रमुख ने चुनाव खर्च की सीमा बढ़ाने का भी विरोध किया है। उनका कहना है कि कि केन्द्र सरकार के इस फैसले से यहां भ्रष्टाचार बढ़ेगा और चुनाव प्रचार के लिये भी काला धन का उपयोग किया जायेगा। ध्यान रहे कि केन्द्र सरकार ने लोकसभा चुनाव के लिये खर्च की जानेवाली न्यूनतम राशि 54 लाख रुपए तय की है, जबकि अधिकतम राशि 70 लाख रुपए होगी।
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के इस फैसले से वह काफी आश्चर्यचकित व अचंभित हैं कि सरकार इस प्रकार के महत्वपूर्ण फैसले कर रही है। ममता ने कहा कि चुनाव में खर्च की जाने वाली राशि में राज्यों को भी विशेष अनुदान मिलना चाहिए, ताकि राज्य सरकार भी विभिन्न चुनाव के खर्च का वहन कर सके। ममता के मुताबिक, यह फैसला अमीर राजनीतिक दलों के हित में है। लेकिन तृणमूल कांग्रेस जैसी गरीब पार्टियां इससे नुकसान में रहेंगी। उम्मीदवारों की सूची जारी करने के बाद उन्होंने कहा कि विदेशों में जब सरकारें चुनाव खर्च उठा सकती हैं तो भारत में ऐसा क्यों नहीं हो सकता ?
जनादेश न्यूज़ नेटवर्क

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