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ममता बनर्जी की ऐतिहासिक जीत, उच्चतम न्यायालय ने सिंगुर में जमीन अधिग्रहण रद्द किया

क्या भारत में गैरकानूनी जमीन अधिग्रहण के शिकार बाकी लोगों को न्याय मिलेगा? जल जंगल जमीन से बेदखली का सिलसिला रुकेगा?
एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास
कोलकाता (हस्तक्षेप)
क्या बेदखल किसानों को जमीन वापस मिलेगी?
क्या भारत में गैरकानून जमीन अधिग्रहण के शिकार बाकी लोगों को न्याय मिलेगा?
सिंगुर जमीन अधिग्रहण मामले में उच्चतम न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद बंगाल के राजनीतिक समीकरण में वामपंथियों के और ज्यादा हाशिये पर चले जाने से ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल ये हैं।
बंगाल की अग्निकन्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक जीवन की शायद यह सबसे बड़ी जीत है, जो दो-दो बार विधानसभा चुनाव भारी बहुमत से जीतने से भी बड़ी जीत है। यह जीत जल जगंल जमीन की लड़ाई में शामिल जनपक्षधर ताकतों की भी ऐतिहासिक जीत है।

उच्चतम न्यायालय ने सिंगूर में जमीन अधिग्रहण को गलत ठहराया है और जमीन अधिग्रहण पर रोक लगा दी है।
उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को अपने फैसले में कहा कि सिंगूर में जमीन अधिग्रहण गलत है। कानूनी रूप से यह जमीन अधिग्रहण सही नहीं था। लिहाजा राज्य सरकार (पश्चिम बंगाल सरकार) ऐसे जमीन का अधिग्रहण नहीं कर सकती।
 उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को 12 हफ्तों में किसानों की जमीन को वापस लौटाने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने लेफ्ट सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि लगता है सरकार ने प्रोजेक्ट के लिए जिस तरह जमीन का अधिग्रहण किया वह तमाशा और नियम कानून को ताक पर रखकर जल्दबाजी में लिया गया फैसला था, वहीं टाटा ने मामले को पाँच जजों की संवैधानिक पीठ को भेजे जाने की मांग की थी।

सिंगुर जमीन अधिग्रहण विरोधी आंदोलन में सड़क पर उतरकर जो लड़ाई ममता ने शुरु की थी
…और सत्ता में आने के बाद सिंगुर के किसानों को छिनी हुई जमीन वापस करने की जो कानूनी कवायद उन्होंने जारी रखी लगातार, उसमें उन्हें आज भारी जीत हासिल हुई है।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश को ख़ारिज करते हुए सिंगुर में नैनो प्रोजेक्ट के लिए टाटा मोटर्स के जमीन अधिग्रहण को रद्द कर दिया है।
जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में गड़बड़ी पाने के बाद उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि अधिग्रहित ज़मीनें किसानों को अगले 12 हफ्तों के भीतर लौटा दी जाए।
अदालत के मुताबिक ज़मीन अधिग्रहण कलेक्टर ने भूखंडों के अधिग्रहण के संबंध में किसानों की शिकायत की ठीक से जांच नहीं की।
आजादी के बाद से अब तक जमीन अधिग्रहण का कुल मिलाकर किस्सा यही है।

न कहीं जन सुनवाई होती है और ने बेदखल किसानों की किसी भी स्तर पर न्याय मिलता है।
एकतरफा जमीन अधिग्रहण अबाध पूंजी निवेश का मुक्तबाजारी खेल बन गया है जिससे आम नागरिकों के जल जंगल जमीन के हकहकूक खत्म हो गये हैं।
जमीन अधिग्रहण के बाद पूरे दस साल बीत गये हैं और सिंगुर की उपजाऊ जमीन अब कंक्रीट का खंडहर है, जहां से नैनो प्रोजेक्ट की वापसी हो चुकी है और टाटा मोटर्स के लिए विवादास्पद तरीके से जबरन जमीन हासिल करने की वजह से 35 साल के वाम शासन का अवसान हो गया है।
इसी बीच ममता बनर्जी लगातार दूसरी दफा विधानसभा चुनाव जीतकर बंगाल की सर्वेसर्वा बन चुकी हैं और इस अदालती फैसले के बाद बंगाल में वाम पक्ष की वापसी की संभावना और मुश्किल हो चुकी है।
गौरतलब है कि उद्योग और कारोबारी जगत के जबर्दस्त दबाव के बावजूद ममता बनर्जी सिंगुर नंदीग्राम आंदोलन की विरासत जी रही हैं और उनकी सरकार अब भी जबरन जमीन अधिग्रहण के खिलाफ है। जबकि सिंगुर को बंगाल में उद्योगों के लिए कब्रगाह कहा जा रहा है।
ममता की जमीन अधिग्रहण विरोधी नीति की वजह से बंगाल में पूंजी निवेश नहीं हो रहा है, इसके बावजूद ममता ने अपनी नीति नहीं बदली है।

इससे बड़ा सवाल यह है कि क्या किसानों को उनकी छिनी हुई जमीन वापस मिल सकेगी
…और यह जमीन वापस मिल भी गयी तो कंक्रीट के खंडहर में तब्दील उस जमीन पर वे कब तक दोबारा पहले की तरह साल में तीन बार सोने की फसल फैदा कर सकेंगे।
अंधाधुंध शहरीकरण और औद्योगीकरण की अंधी दौड़ और विकास के बहाने आम जनता को जल जंगल जमीन से बेदखल करने के अभियान पर क्या इस फैसले के लागू हो जाने का कोई असर पड़ेगा और सिंगुर की तरह देशभर में जबरन अपनी जमीन से बेदखल लोगों को क्या उनके हक हकूक की बहाली के साथ जमीन वापस मिलेगी।
अभी लंबी कानूनी लड़ाई बाकी है।
फिर भी यह कहना ही होगा कि सत्ता में आने के बाद जिस तरह ममता बनर्जी ने किसानों को सिंगुर में जमीन वापस दिलाने की कानूनी लड़ाई जीत ली है, इससे जल जंगल जमीन की लड़ाई में जीत का नया सिलसिला बन ही सकता है।
गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने सिंगुर मसले पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि तत्‍कालीन वाममोर्चा सरकार ने जमीन अधिग्रहण मामले में टाटा कंपनी को फायदा पहुंचाया था। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि अधिग्रहण का फैसला कानून के मुताबिक सही नहीं था।

उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सरकार ने अपनी शक्तियों का ग़लत इस्तेमाल कर प्राइवेट पक्ष को फायदा पहुंचाया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सिंगुर में भूमि अधिग्रहण के बारे में उच्चतम न्यायालय के फैसले को एतिहासिक जीत बताया। ममता ने यहां राज्य सचिवालय में संवाददाताओं के साथ बातचीत में कहा, सिंगुर पर उच्चतम न्यायालय का फैसला एतिहासिक जीत है।
ममता बनर्जी ने आंदोलन के दौरान सिंगुर के जमीन से बेदखल आंदोलनकारी किसान की बेटी तापसी मलिक को श्रद्धांजलि दी जो कि भूमि अधिग्रहण के विरोध में गठित कृषि जमी रक्षा समिति के अभियान में सबसे आगे थी। इस 18 वर्षीय लड़की का अधजला शव 18 दिसंबर 2006 को परियोजना स्थल के निकट मिला था।
जाहिर है कि इस फैसले से टाटा मोटर्स को करारा झटका लगा है। उच्चतम न्यायालय ने जमीन अधिग्रहण को रद्द कर दिया है।
उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल सरकार को आदेश दिया कि किसानों की जमीन 12 हफ्ते में वापस की जाए। साथ ही दिया हुआ मुआवजा भी किसान सरकार को वापस नही करेंगे।
वहीं इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि फैसले के बाद मेरी आंखों में खुशी के आंसू हैं। मुझे पूरा यकीन है कि आज सिंगुर में जश्न मनाया जाएगा। 2 सितंबर को सिंगुर के हर ब्लॉक में जश्न मनाएंगे।

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