Home » महान कोल खदान को रद्द करने की माँग

महान कोल खदान को रद्द करने की माँग

ऊर्जा मंत्रालय के कड़े विरोध के वावजूद इस्सार-हिंडालको को गलत तरीके से कोल खदान आबंटित किया गया- ग्रीनपीस
 

अविनाश कुमार चंचल

7, जनवरी 2014। कोल खदानों के आबंटन घोटाले पर जिस तरह सीबीआई के संदेह खड़ा किया है उसमें आदित्य बिड़ला ग्रुप के हिंडालको को महान कोल खदान आबंटन में भी धांधली नजर आ रही है। नए तथ्य के सामने आने के बाद ग्रीनपीस इंडिया ने महान कोल खदान को तत्काल रद्द करने की माँग की है। ग्रीनपीस इंडिया ने सरकार से यह भी माँग की है कि इस आबंटन में एस्सार ऊर्जा और मध्य प्रदेश सरकार की भूमिका की भी जाँच होनी चाहिए।

ग्रीनपीस का कहना है कि कोल आंबटन में किसी तरह की पारदर्शिता नहीं बरती गयी है। ऊर्जा मंत्रालय ने सीबीआई को बताया है कि उसने हिंडालको को महान कोयला खदान आबंटित करने की सिफारिश नहीं की थी। इसी तरह, शुरू में एस्सार ऊर्जा को कोल खदान आबंटित किये जाने की माँग मध्य प्रदेश सरकार और स्क्रीनिंग कमिटी ने भी खारिज कर दी थी। लेकिन बाद में दोनों ने अपने निर्णय को बिना किसी कारण के पलट दिया।

इससे पहले भी सीबीआई ने आदित्य बिड़ला ग्रुप के अध्यक्ष पर जालसाजी, धोखाधड़ी और वित्तीय गलतबयानी करके तालबिरा कोल खदान हासिल करने का आरोप लगाया था। ग्रीनपीस ने कहा है कि इस खुलासे से इस शक को बल मिलता है कि वर्ष 2004 से 2009 के बीच जितने भी कोल खदान आबंटित हुये थे उसमें कुछ न कुछ गड़बड़ियाँ जरूर हुयी थी।

ग्रीनपीस की कंपैनर अरुंधति मुतु ने कहा, “महान कोल खदान के आबंटन की जांच में एस्सार ऊर्जा को भी शामिल किया जाना चाहिए क्योंकि मध्य प्रदेश सरकार ने एस्सार और हिंडालको को एक मार्च 2005 को हुयी बैठक में कोल खदान आबंटन का विरोध किया था लेकिन तीन सप्ताह के भीतर 23 मार्च 2005 में उसने अपने फैसले को पलट कर हिंडालको को नहीं बल्कि एस्सार को कोल खदान आबंटित करने की अनुशंसा कोयला मंत्रालय से कर दिया।”

अरुंधति मुतु ने इस आबंटन पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुये पूछा कि यह कैसे हुआ कि, “ऊर्जा मंत्रालय ने इसी अनुशंसा को स्क्रीनिंग कमिटी को भेज दिया। स्क्रीनिंग कमिटी ने एक मार्च 2005 की बैठक में एस्सार को कोल खदान आबंटित करने से मना कर दिया था, लेकिन इस बार बिना किसी स्पष्टीकरण के एस्सार और हिंडालको को 2006 में कोल खदान आबंटित कर दिया।

अरुंधति मुतु ने सरकार से महान कोल खदान के आबंटन की जाँच करने की माँग की है और कहा कि जब तक जाँच पूरी न हो जाय तब तक वहाँ सभी तरह के काम पर रोक देने चाहिए।

महान कोल खदान की खुदाई महान कोल लिमिटेड द्वारा की जा रही है जो एस्सार ऊर्जा और हिंडालको का संयुक्त उपक्रम है। वहाँ पर स्थानीय नागरिकों द्वारा इसका पुरजोर विरोध किया जा रहा है क्योंकि उनके जल, जंगल, जमीन के अधिकार को मानने से इंकार किया जा रहा है।

दरअसल एस्सार और हिंडालको, दोनों ने मिलकर मार्च 2005 में 27वीं स्क्रीनिंग कमिटी में महान कोल ब्लॉक के आबंटन के लिए प्रयास किया था, जिसका मध्य प्रदेश सरकार ने विरोध किया था (यह मिनट्स में शामिल है )। ठीक इसके तीन हप्ते बाद मध्य प्रदेश सरकार ने पलटी खायी और कोयला मंत्रालय को एस्सार को शामिल किये जाने की वकालत कर दी (यह चिठ्ठी में शामिल है)। एस्सार को क्यों कोल खदान आबंटित किया जाय, इसका जिक्र मिनट्स में कहीं नहीं है। फिर भी, 3 जुन 2006 की स्क्रीनिंग कमिटी की 29वीं बैठक में उन दोनों कंपनियों को महान कोल खदान आबंटित कर दिया गया।

ग्रीनपीस शुरू से ही महान कोल खदान के आबंटन का विरोध करता रहा है। ग्रीनपीस की कंपैनर अरुंधति मुतु ने सरकार से माँग की है कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता है तब तक विवादास्पद समय में आबंटित किये गये सभी कोल खदानों पर चल रहे काम पर प्रतिबंध लगा दिया जाये।

About the author

अविनाश कुमार चंचल, युवा पत्रकार व एक्टिविस्ट हैं, हस्तक्षेप टीम का हिस्सा हैं।

About हस्तक्षेप

Check Also

Amit Shah Narendtra Modi

तो नाकारा विपक्ष को भूलकर तैयार करना होगा नया नेतृत्व

तो नाकारा विपक्ष को भूलकर तैयार करना होगा नया नेतृत्व नई दिल्ली। कुछ भी हो …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: