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मीडिया को खरीदने की हैसियत नहीं किसी भी घराने की-एन के सिंह

लखनऊ। लाइव इंडिया के संपादक और बीईए के सचिव एन के सिंह ने कहा है कि लोग मीडिया को बदनाम करने के लिये आरोप लगा रहे हैं कि मीडिया को बड़े कॉर्पोरेट घराने खरीद रहे हैं जबकि देश के किसी भी घराने की इतनी हैसियत नहीं है कि वो मीडिया को खरीद ले। उन्होंने कहा कि देश की मीडिया गम्भीरतापूर्वक अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन कर रही है और खुद ही अपनी कमियों को दूर कर रही है।

श्री सिंह शनिवार को यहाँ एक गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। प्रदेश के प्रमुख साप्तहिक समाचार पत्र वीकएंड टाइम्स ने अपने दसवें वर्ष की शुरूआत होने पर राजनीति और मीडिया विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन किया था जिसमें देश भर से आये पत्रकारों ने राजनीति और मीडिया के घालमेल पर चिंता जताते हुये पत्रकारों से अपने पेशे में ईमानदारी लाने की बात पर बल दिया। देश भर में मीडिया के सामने आ रहे ज्वलन्त मुद्दों पर पत्रकारों ने अपनी राय रखी।

एन के सिंह, जो ब्रॉड कास्ट एडिटर एसोसिएशन के सचिव भी हैं, ने कहा कि मौजूदा दौर में इलेक्ट्रॉनिक और प्रिन्ट मीडिया पर जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ रही है क्योंकि लोगों में मीडिया पर आरोप लगाने का चलन बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को गम्भीर विषय ज्यादा उठाना चाहिए।

न्यूज़ 24 के संपादक अजित अंजुम ने कहा कि अब मीडिया पर आरोप लगाना फैशन सा हो गया है। सरकार अपने खिलाफ कुछ सुनना पसन्द नहीं करती। कभी सैफई में डांस दिखाने पर न्यूज़ चैनल बन्द करा दिये जाते है तो कभी पंजाब की सरकार भी अपने खिलाफ खबर देख कर चैनल बन्द करा देती है। यह लोकतंत्र के लिये बड़ी गम्भीर स्थिति है।

जनसत्ता के संपादक ओम थानवी ने कहा कि अब जिसके खिलाफ खबर लिखो वो मीडिया के बिकाऊ होने का आरोप लगा देता है। हकीकत यह है कि पत्रकारिता जैसे ईमानदार पेशे को भी अब आरोप के घेरे में रखने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा प्रभाष जोशी जी जिस पेड न्यूज़ के खिलाफ अभियान चलते रहे वो अभियान फिर शुरू करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा पूँजीपतियो का दखल एक गम्भीर चिन्ता का विषय है। उन्होंने कहा 9 सालों तक बिना सरकारी मदद के वीक एंड टाइम्स जैसा अखबार निकालना एक सफल प्रयोग है और इस प्रयोग को दूसरे राज्यों में भी दोहराना चाहिए।

भड़ास 4 मीडिया के संपादक यशवंत सिंह ने कहा कि कॉर्पोरेट घरानो के दवाब में खबरे किसके लिये क्यों की जा रही है और क्यों रोकी जा रही हैं, यह सब समझने लगे हैं। उन्होंने कहा कि यह बदलते हुये समाज की बदलती हुयी तस्वीर का नया रूप है जहाँ सोशल मीडिया एक नए रूप में हम सबके सामने है। सोशल मीडिया के इस दबाव ने बड़े मीडिया घरानों को भी चिन्ता में डाल दिया है।

श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष के विक्रम राव ने कहा कि देश में मीडिया के सामने बड़ा संकट खड़ा है क्योकि इसकी निष्पक्षता पर सबाल उठने लगे हैं। उन्होंने कहा कि राजनीति और मीडिया के बीच महीन रेखा होती है और उसका उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए।

राज्यसभा टीवी चैनल के संसदीय कार्यक्रम के हेड अरविन्द सिंह ने कहा कि कोई कितना भी आरोप लगा ले मगर हकीकत यही है कि लम्बे समय से मीडिया खुद अपना आंकलन करके ख़बरों को लगातार बेहतर बना रही है।

कार्यक्रम के आयोजक वीकएंड टाइम्स के संपादक संजय शर्मा ने कहा कि राजनेताओं से सम्बंध होने के बाबजूद पत्रकारों को यह धयान रखना चाहिए कि राजनेताओ का प्रभाव उनकी पत्रकारिता में ना दखल दे। उन्होंने कहा कि सरकारों से ज्यादा लाभ लेने की चाहत ने पत्रकारिता को बहुत नुकसान पहुँचाया है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुये पूर्व केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के स्वामी चिन्मयानन्द ने मीडिया की निष्पक्षता को हर हालत में बनाये रखने की जरूरत पर बल दिया। कार्यक्रम को प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त प्रदीप यादव, सी पी राय, मधुकर जेटली ने भी सम्बोधित किया। सपा के राष्ट्रीय महासचिव अशोक वाजपेई ने भी मीडिया को ईमादार रहने की वकालत की। कार्यक्रम में वीकएंड टाइम्स के विशेषांक का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में उलेखनीय पत्रकारिता के लिये दस पत्रकारों को भी समानित किया गया।

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