Home » मीडिया मैनेज नहीं तो और क्या ये ?

मीडिया मैनेज नहीं तो और क्या ये ?

नीरज वर्मा
चुनावी अंधड़ चल रहा है ! कुछ उड़ जाने वाले हैं और कुछ उड़ा देने वाले हैं ! कुछ का कहना है कि मोदी नाम की “सुनामी” आयी हुई है ! मसलन हर रैली का लाइव कवरेज, सोने-उठने बैठने तक की खबर ! कोई तीखे सवाल नहीं ! विरोधियों की ज़बर्दस्ती आलोचना ! ये सारा कुछ चल रहा है टी.वी. न्यूज़ चैनल्स के ज़रिये !
हर रैली में करोड़ों रुपये फूंकने वाले मोदी, गरीबों को कभी ये नहीं बता रहे कि ये करोड़ों-अरबों रुपये आ कहाँ से रहे हैं ? और ना मीडिया ये सवाल उठाने की ज़ुर्रत कर रहा है ! भाजपाई खेमे के न्यूज़ चैनल्स, ढिंढोरा पीट रहे हैं , कि, मोदी नहीं तो हिंदुस्तान की हालत खराब हो जायेगी ! मगर केजरीवाल नाम के वामपंथ मिश्रित समाजवाद के कठिन सवालों का जवाब मोदी के साथ-साथ, मोदी भक्त न्यूज़ चैनल्स के पास भी नहीं है ! पेट्रोल 40 रुपया लीटर बिकेगा और प्याज 5 रुपये किलो, टमाटर-आलू-भिन्डी और भी सस्ता होगा, ऐसा मोदी को मानने वाले बता रहे हैं ! अम्बानी जैसे लोग बड़ी संख्या में हो सकते हैं और 40% गरीबी रेखा के नीचे रहने वाली आबादी, निम्न माध्यम वर्ग में ज़रूर आ जायेगी, ऐसा भी सपना मोदी के “अपने”” न्यूज़ चैनल्स पर बेचा जा रहा है ! आतंकवाद हमेशा-हमेशा के लिए अलविदा हो जाएगा और हर आदमी, भर पेट खाने के बाद तसल्ली से चैन की नींद सोयेगा , मोदी के “सौजन्य” से न्यूज़ चैनल्स ये जतला सा रहे हैं ! कैसे? ये कोई नहीं बता रहा ! खैर ! लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो मोदी भक्त मीडिया वालों के साथ क्या सलूक होना चाहिए , ये मोदी के शुभचिंतक न्यूज़ चैनल्स नहीं बताते और ना ही बुद्धिजीवी वर्ग की ओर से ये सवाल उठ रहे हैं ! ! मीडिया, मोदी का भरपूर “सहयोग” कर रहा है ! ऐसा सहयोग जो पूरी तरह “लेन-देन” पर टिका है ! मीडिया में काम करने पत्रकार साथी जानते हैं कि न्यूज़ चैनल्स के अंदर समाचारों की भाषा किस “अर्थ” पर टिकी होती है ! कहा जा रहा है कि आज की तारीख में भाजपा नाम की पार्टी ने अपनी तिजोरी खोल दी है ! जो नमो का जप करेगा, उसका आर्थिक “पाप” कटेगा ! गुजरात दंगों के अलावा, राष्ट्रीय स्तर पर, कोई अन्य उपलब्धि न होने के बावजूद मोदी परेशान नहीं होते..… क्योंकि वो मीडिया मालिकों की “कमज़ोरी” जानते हैं ! उस कमज़ोरी को दूर करने की “माया” से वो वाक़िफ़ हैं ! बेहद कम समय में बेहद अमीर बन चुके अम्बानी और अडानी जैसों के हवाई महल में बैठकर, मोदी आसमान से गरीबों के लिए ज़मीनी सपने दिखा रहे हैं ! क्योंकि मोदी जानते हैं कि मीडिया को “मैनेज” कर लो, मीडिया “पब्लिक मैनेजमेंट” का शॉर्ट टर्म कोर्स शुरू कर देगा ! नरेंद्र मोदी की खासियत है कि वो अमीरों के बल पर गरीबों के सपने बुनने में भरपूर मदद करते हैं ! मोदी अम्बानी-अडानी के रईस बनने के “शॉर्ट टर्म” फॉर्मूले पर ऐतराज़ नहीं जताते , क्योंकि उनका मानना है कि अम्बानी-अडानी जैसे अमीर, गरीब का पेट भरते हैं और राजनीतिक पार्टियों की तिजोरी ! .मगर….इतिहास गवाह है कि अमीर गरीब का शुभचिंतक बड़ी मुश्किल से होता है ! मोदी जानते हैं कि गर वो अपने वायदे पूरे नहीं कर पाए तो भी जनता, उन्हें, कांग्रेस की तरह सर आँखों पर सालों-साल बिठाए रखेगी, क्योंकि “मैनेज” करने के बाद मोदी का मीडिया बाकी सारे विरोधियों से कड़े सवाल पूछेगा मगर मोदी को बक्श देगा ! कई न्यूज़ चैनल्स ये साबित करने पर तुले हैं कि हिन्दुस्तान में राजनीतिक बदलाव का मतलब, पार्टी या व्यक्ति बदल जाना मात्र होता है ! विकास से इसका कोई ख़ास लेना-देना नहीं !
मोदी की जय-जय, मोदी से कड़े सवाल पूछने से परहेज और विरोधियों की खामी को हेडलाइन्स और ब्रेकिंग न्यूज़ के तौर पर पेश करना ही ज़्यादातर टी.वी.न्यूज़ चैनल्स की प्राथमिकता बन चुकी है है ! आज ऐसे कई बड़े न्यूज़ चैनल्स हैं जो मोदी-मोदी कर रहे हैं ! इन चैनल्स को भी “दक्षिणा” मिलने का अंदेशा है ! माना जा रहा है कि नमो-नमो करने वाले चैनल्स की तिजोरी भरी रह रही है ! दर्शक भी न्यूज़ चैनल नामक विकीपीडिया के ज़रिये, धन्य हो रहे हैं ! न्यूज़ को लिखा कुछ ऐसे जा रहा है कि “दक्षिणा” देने वाले नेताओं की जय-जय हो और विरोधी परास्त हो ! इन चैनल्स को गरीबी-भ्रष्टाचार-बेरोज़गारी-एलियन की तरह नज़र आते हैं ! आम आदमी इन चैनल्स को मिलने वाले “दक्षिणा ज्ञान” से वाक़िफ़ नहीं होता, लिहाज़ा वो यही समझता है कि जो टी.वी. पर दिख रहा है वो सच है ! आज-कल उद्योग-धंधे या मीडिया हाउस बड़े लोग चला रहे और बड़े आदमी कुछ देते तभी हैं जब बहुत कुछ मिलने की उम्मीद हो ! मोदी में उनको उम्मीद नज़र आ रही है ! किसी ईमानदार को दस बार चोर-चोर कह दीजिये या इसका उलटा कर दीजिये, तो , दसियों बार के बाद दिमाग थोड़ा सा ही सही पर बदलता है , मीडिया इसी फॉर्मूले पर काम कर रहा है ! “दक्षिणा” के बल पर मीडिया मोदी को ज़ीरो से हीरो बना चुका है ! खेल चालू आहे !
चलते चलते एक सवाल, आम हिन्दुस्तानी के ज़ेहन में छोड़ देना उचित होगा कि…मीडिया में खबर देखने के बाद आप लोग, जिन्हें अपनी उम्मीद मान बैठे हैं …वो लोग, अमीरों के हवाई-महल में बैठ कर हिन्दुस्तान को हकीकत की ज़मीन दिखा रहे हैं या सपने दिखा कर ज़मीन से चार फूट उंचा हवा में टांग रखे हैं ? या फिर … कस्मे वादे प्यार वफ़ा है- वादे हैं वादों का क्या !
ज़रा सोचना !

About the author

नीरज वर्मा, पिछले 15-16 साल से टी. वी. मीडिया में सक्रिय। फिलहाल विगत १० महीनों से राजनीति की उठा-पटक पर विश्लेषण।

About हस्तक्षेप

Check Also

भारत में 25 साल में दोगुने हो गए पक्षाघात और दिल की बीमारियों के मरीज

25 वर्षों में 50 फीसदी बढ़ गईं पक्षाघात और दिल की बीमांरियां. कुल मौतों में से 17.8 प्रतिशत हृदय रोग और 7.1 प्रतिशत पक्षाघात के कारण. Cardiovascular diseases, paralysis, heart beams, heart disease,

Bharatendu Harishchandra

अपने समय से बहुत ही आगे थे भारतेंदु, साहित्य में भी और राजनीतिक विचार में भी

विशेष आलेख गुलामी की पीड़ा : भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रासंगिकता मनोज कुमार झा/वीणा भाटिया “आवहु …

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा: चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा : चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश Occupy national institutions : …

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

अच्छे नहीं, अंधेरे दिनों की आहट

मोदी सरकार के सत्ता में आते ही संघ परिवार बड़ी मुस्तैदी से अपने उन एजेंडों के साथ सामने आ रहा है, जो काफी विवादित रहे हैं, इनका सम्बन्ध इतिहास, संस्कृति, नृतत्वशास्त्र, धर्मनिरपेक्षता तथा अकादमिक जगत में खास विचारधारा से लैस लोगों की तैनाती से है।

National News

ऐसे हुई पहाड़ की एक नदी की मौत

शिप्रा नदी : पहाड़ के परम्परागत जलस्रोत ख़त्म हो रहे हैं और जंगल की कटाई के साथ अंधाधुंध निर्माण इसकी बड़ी वजह है। इस वजह से छोटी नदियों पर खतरा मंडरा रहा है।

Ganga

गंगा-एक कारपोरेट एजेंडा

जल वस्तु है, तो फिर गंगा मां कैसे हो सकती है ? गंगा रही होगी कभी स्वर्ग में ले जाने वाली धारा, साझी संस्कृति, अस्मिता और समृद्धि की प्रतीक, भारतीय पानी-पर्यावरण की नियंता, मां, वगैरह, वगैरह। ये शब्द अब पुराने पड़ चुके। गंगा, अब सिर्फ बिजली पैदा करने और पानी सेवा उद्योग का कच्चा माल है। मैला ढोने वाली मालगाड़ी है। कॉमन कमोडिटी मात्र !!

Entertainment news

Veda BF (वेडा बीएफ) पूर्ण वीडियो | Prem Kahani – Full Video

प्रेम कहानी - पूर्ण वीडियो | वेदा BF | अल्ताफ शेख, सोनम कांबले, तनवीर पटेल और दत्ता धर्मे. Prem Kahani - Full Video | Veda BF | Altaf Shaikh, Sonam Kamble, Tanveer Patel & Datta Dharme

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: