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मुफ्ती की सरकार भाजपा की हालत अब्दुल्ला दीवाना

भाजपा की हालत- मुफ्ती के फैसले से भाजपा का कुछ लेना देना नहीं है, यह भी सरासर गलतबयानी है।
कोलकाता में राजनीतिक हालात की तरह मौसम भी डांवाडोल है। सर्दी गर्मी से सेहत ढीली चल रही है महीनेभर से और अजीबोगरीब सुस्ती है। नींद खुल ही नहीं रही है। खांसी से महीनेभर से परेशान हूं तो पेट भी कराब चल रहा है। अब हालात से ज्यादा अपनी सेहत बनाये रखकर सक्रिय रहने की चुनौती है।  फिलहाल लंबे समय तक लगातार पीसी के साथ बैछ नहीं पा रहा हूं।
हम पहले से लिख रहे थे कि कश्मीर घाटी के जनादेश को रौंदकर संघपरिवार की कश्मीर की सत्ता दखल करने की बेताबी देश के लिए बेहद खतरनाक है।
सरकार बनते न बनते मुफ्ती की सरकार में भाजपा की हालत अब्दुल्ला दीवाना है।
संघ परिवार के पुराने स्टैंड के विपरीत जिस कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत पीडीपी भाजपा की सरकार बनी, उसकी धज्जियां उड़ गयी है।
हिंदुत्व के सिपाहसालार प्रवीण तोगाड़िया पूढ रहे हैं कि क्या मुफ्ती अगला चुनाव पाकिस्तान से लड़ेंगे तो जोगेंदर सिंह ने आर्गेनाइजर में लिखा कि मुफ्ती से पूछो कि क्या वह भारतीय है।
जिसके भारतीय होने में संघ परिवार को शक है, उसके साथ संघ परिवार की सत्ता में भागेदारी के जैसे गुल खिलने चाहिए, खिलेंगे।
गौरतलब है कि हिंदुत्व के एजेंडा से मुफ्ती को कुछ लेना देना नहीं है और न ही बाकी देश में उनको राजनीति करनी है। न मुफ्ती कश्मीर घाटी की अनदेखी करके जम्मू से राजकाज चला सकते हैं।
राजनीतिक तौर पर मुफ्ती का फौरी एजेंडा भाजपा के साथ सरकार बनाने की वजह से घाटी में जो जनाक्रोश है और जो साख उनकी गिरी है, उससे निपटना है।
मुख्यमंत्री मुफ्ती हैं और उन्हें मुख्यमंत्री भाजपा ने ही बनवाया है।
वैसे भी संघीय ढांचे में राज्य के मुख्यमंत्री को हर नीतिगत फैसले के लिए केंद्र की इजाजत लेनी हो, ऐसा जरुरी नहीं है।
ऐसे में संसद में प्रधानमंत्री की सफाई कि मुफ्ती जो भी फैसले कर रहे हैं, उस बारे में उन्होंने केंद्र को बताया नहीं है, अपने आप में असंवैधानिक बयान है और राज्य सरकार के अधिकारक्षेत्र का अतिक्रमण है।
मुफ्ती के फैसले से भाजपा का कुछ लेना देना नहीं है, यह भी सरासर गलतबयानी है।
अगर मुफ्ती के कामकाज से संघपरिवार को इतना ही ऐतराज है तो भाजपा को चाहिए कि तुरंत उस सरकार से अलग हो जाये।  लेकिन भाजपा ऐसा करने नहीं जा रही है।
कश्मीर घाटी का धर्मांतरण हो नहीं सकता है और न शत प्रतिशत हिंदुत्व का एजेंडा घाटी में लागू हो सकता है। संघ परिवार को इसका अहसास है।
दरअसल वह जम्मू में अपना राजकाज चलाने के लिए सरकार में है लेकिन सरकार के फैसलों की जिम्मेदारी भी लेना नहीं चाहता वह, जो संघ परिवार के हिंदुत्व के एजेंडा के खिलाफ है।
इस पाखंड को समझने की जरूरत है।
पलाश विश्वास 

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