Home » मुलायम के खिलाफ ओलमा कौन्सिल के मौलाना रशादी आजमगढ़ से मैदान में

मुलायम के खिलाफ ओलमा कौन्सिल के मौलाना रशादी आजमगढ़ से मैदान में

अधिकारों की प्राप्ति तथा अन्याय एवं अत्याचार की समाप्ति अपने राजनैतिक नेतृत्व के बिना संभव नहीं- आमिर रशादी मदनी
लखनऊ। आजमगढ़ में “मौलाना” मुलायम सिंह यादव की राह अब आसान नहीं रह जाएगी। राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी आजमगढ़ से मुलायम सिंह को चुनौती देंगे।
 आज यहां राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल के संसदीय बोर्ड ने एक प्रेस वार्ता में यह घोषणा की। संवाददाताओं से बात करते हुए मौलाना आमिर रशादी मदनी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने मुसलमानों से किये गये आतंकवाद के झूठे आरोपों में जेलों में बंद निर्दोष मुस्लिम नौजवानों को रिहा करने, मुसलमानों के आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए सच्चर कमेटी व रंगनाथ मिश्र आयोग की सिफ़ारिशों को उत्तर प्रदेश में लागू करने एवं सरकारी नौकरियों में 18 प्रतिशत आरक्षण देने जैसे वादों के परिणामस्वरूप प्रदेश के मुसलमानों ने अपना पूरा का पूरा वोट समाजवादी पार्टी की झोली में डाल दिया था जिससे पहली बार समाजवादी पार्टी बहुमत के साथ सरकार बनाने में सफल हो पाई। लेकिन सरकार के गठन के बाद मुसलमानों से किए गए चुनावी वादों पर अमल दरामद की बात तो दूर प्रदेश में जिस प्रकार मुसलमानों को 143 से भी अधिक साम्प्रदायिक दंगों में अन्याय, अत्याचार, हिंसा एवं कत्ल व गारतकारी का निशाना बनाया गया उसने 2002 में गुजरात में नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा किए अत्याचार को भी पीछे छोड़ दिया है और आज पूरे प्रदेश का मुसलमान अपने आपको असुरक्षित एवं ठगा हुआ महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के झूठे आरोप में मौलाना तारिक़ क़ासमी और मौलाना ख़ालिद मुजाहिद की गिरफ़्तारी की जांच के लिए गठित निमेष आयोग की रिपोर्ट को भी सरकार ने ठण्डे बस्ते में डाल दिया है तथा ख़ालिद मुजाहिद की हत्या को स्वाभाविक मृत्यु साबित करने की कोशिश किसी से छिपी नहीं है।
मौलाना आमिर रशादी मदनी ने कहा कि प्रतापगढ़ जनपद के आस्थान गांव में मुसलमानों के साथ हुई हिंसा एवं आगज़नी की जांच कर रहे ईमानदार मुस्लिम अधिकारी डी.एस.पी. जि़या-उल-हक़ के हत्या की नामजद एफ़आईआर उनकी विधवा ने दर्ज कराई लेकिन राजा भैया की एक दिन के लिए भी गिरफ़्तारी नहीं हुई जबकि समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकार में 2005 में गाजीपुर के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में उनकी विधवा की नामजद एफ़आईआर के आधार पर बिना किसी जांच के मुख़्तार अंसारी, अफ़ज़ाल अंसारी जो कि उस समय समाजवादी पार्टी के सांसद थे और हत्या के समय संसद में मौजूद थे, इसके बावजूद उन्हें और उनके कुनबे के अन्य लोगों को जेल भेज दिया जाता है। उन्होंने कहा कि 2006 में वाराणसी के संकटमोचन मंदिर में हुए बम धमाके में फंसाये गये मौलाना वलीउल्लाह कासमी आज भी बिना किए गुनाह की जेल की काल कोठरी में बंद होकर सजा भुगत रहे हैं। 2006 में अयोध्या में बम धमाका करने के षडयंत्र के आरोप में सात मुसलमानों के इनकाउंटर के बाद उसी केस में 5 निर्दोष मुस्लिम नौजवान आज भी इलाहाबाद के नैनी जेल में बंद हैं। आये दिन पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद में कम आयु की एवं ग़रीब परिवार की लड़कियों को हिन्दू युवा वाहिनी, पुलिस एवं स्थानीय सपा नेताओं की मिली भगत से अपहरण करके ज़बरदस्ती उन्हें अपना धर्म परिवर्तन करने पर विवश करने की घटनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।
मौलाना रशादी ने आरोप लगाया कि साम्प्रदयिक शक्तियों के तईं वर्तमान सरकार का रवैया न सिर्फ़ बेहद नरम है बल्कि उन्हें सरकार का पूर्ण संरक्षण भी प्राप्त है जिसके चलते ही वे पूरे प्रदेश में मुसलमानों के विरुद्ध भड़काऊ भाषण करके साम्प्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने में सफल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुज़फ़्फ़रनगर में हुए दंगों के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा सरकार को दोषी ठहराये जाने के आदेश के बाद समाजवादी पार्टी को सरकार में बने रहने का कोई अधिकार नहीं रह जाता है, उसे तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।
ओलमा कौन्सिल नेता नेकहा कि आज़ादी के बाद से अब तक मुलसमानों के सामने जितनी भी समस्याएं हैं, उसकी जि़म्मेदार तमाम तथाकथित धर्मनिरपेक्ष पार्टियां हैं जो मुसलमानों के वोटों से सत्ता में आईं लेकिन उन्होंने मुसलमानों की आर्थिक, सामाजिक एवं शैक्षिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए कोई ठोस नीति बनाने के बजाय मुसलमानों को भयभीत करके उनको अपना वोट बैंक बनाये रखने की रणनीति को अपनाया। वर्तमान लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी सहित तमाम धर्मनिरपेक्ष पार्टियां इसी रणनीति पर चल रही हैं। मुसलमानों की तरह दो दशक पूर्व तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा सिखों को भी आतंकवादी बताकर उनके उत्पीड़न का प्रयास किया गया था लेकिन सिख समाज ने इसके विरुद्ध संगठित होकर अपनी राजनैतिक ताक़त पैदा की जिसके नतीजे में न सिर्फ़ सिखों के ऊपर हो रहे अत्याचार की समाप्ति हुई बल्कि आज कांग्रेस पंजाब में सरकार बनाने की लिए तरसती नजर आ रही है।
उन्होंने कहा कि आज हमारे सामने कड़ी परीक्षा की घड़ी है। इसलिए मिल्ली संगठनों तथा मुस्लिम समाज के प्रतिष्ठित एवं बुद्धिजीवी वर्ग को चाहिए कि वर्तमान लोकसभा चुनाव में किसी को हराने, किसी को जिताने के लिए पिछले 65 वर्ष से प्रयोग किये जा रहे हानिकारक फार्मूले को छोड़कर अपने राजनैतिक नेतृत्व को मज़बूत करने के लिए प्रयासरत हों और इसी उद्देश्य के लिए अपने वोटों का इस्तेमाल करें क्योंकि अधिकारों की प्राप्ति एवं अन्याय व अत्याचार की रोकथाम अपनी राजनैतिक नेतृत्व के बिना संभव ही नहीं है।
राओकौ. नेता ने कहा कि वर्तमान लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव के आज़मगढ़ संसदीय क्षेत्र से भी उम्मीदवारी की घोषणा के बाद कार्यकर्ताओं की मांग पर राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल के संसदीय बोर्ड ने मुलायम सिंह यादव की मुस्लिम विरोधी, समाजवादी पार्टी के शासनकाल में हो रहे क़त्लेआम और सरकार की जनविरोधी नीतियों एवं कार्यशैली को ध्यान में रखते हुए मुलायम सिंह यादव के विरुद्ध राष्ट्रीय ओलमा कौन्सिल के एक सिपाही के रूप में मुझे उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया है।

About हस्तक्षेप

Check Also

भारत में 25 साल में दोगुने हो गए पक्षाघात और दिल की बीमारियों के मरीज

25 वर्षों में 50 फीसदी बढ़ गईं पक्षाघात और दिल की बीमांरियां. कुल मौतों में से 17.8 प्रतिशत हृदय रोग और 7.1 प्रतिशत पक्षाघात के कारण. Cardiovascular diseases, paralysis, heart beams, heart disease,

Bharatendu Harishchandra

अपने समय से बहुत ही आगे थे भारतेंदु, साहित्य में भी और राजनीतिक विचार में भी

विशेष आलेख गुलामी की पीड़ा : भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रासंगिकता मनोज कुमार झा/वीणा भाटिया “आवहु …

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा: चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा : चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश Occupy national institutions : …

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

अच्छे नहीं, अंधेरे दिनों की आहट

मोदी सरकार के सत्ता में आते ही संघ परिवार बड़ी मुस्तैदी से अपने उन एजेंडों के साथ सामने आ रहा है, जो काफी विवादित रहे हैं, इनका सम्बन्ध इतिहास, संस्कृति, नृतत्वशास्त्र, धर्मनिरपेक्षता तथा अकादमिक जगत में खास विचारधारा से लैस लोगों की तैनाती से है।

National News

ऐसे हुई पहाड़ की एक नदी की मौत

शिप्रा नदी : पहाड़ के परम्परागत जलस्रोत ख़त्म हो रहे हैं और जंगल की कटाई के साथ अंधाधुंध निर्माण इसकी बड़ी वजह है। इस वजह से छोटी नदियों पर खतरा मंडरा रहा है।

Ganga

गंगा-एक कारपोरेट एजेंडा

जल वस्तु है, तो फिर गंगा मां कैसे हो सकती है ? गंगा रही होगी कभी स्वर्ग में ले जाने वाली धारा, साझी संस्कृति, अस्मिता और समृद्धि की प्रतीक, भारतीय पानी-पर्यावरण की नियंता, मां, वगैरह, वगैरह। ये शब्द अब पुराने पड़ चुके। गंगा, अब सिर्फ बिजली पैदा करने और पानी सेवा उद्योग का कच्चा माल है। मैला ढोने वाली मालगाड़ी है। कॉमन कमोडिटी मात्र !!

Entertainment news

Veda BF (वेडा बीएफ) पूर्ण वीडियो | Prem Kahani – Full Video

प्रेम कहानी - पूर्ण वीडियो | वेदा BF | अल्ताफ शेख, सोनम कांबले, तनवीर पटेल और दत्ता धर्मे. Prem Kahani - Full Video | Veda BF | Altaf Shaikh, Sonam Kamble, Tanveer Patel & Datta Dharme

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: