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मोदी की जुमलेबाजी नहीं चलने वाली, जो धन्नासेठों का संरक्षक व हितैषी है वह व्यक्ति फकीर कैसे हो सकता है?

मोदी की जुमलेबाजी नहीं चलने वाली, जो धन्नासेठों का संरक्षक व हितैषी है वह व्यक्ति फकीर कैसे हो सकता है?
लखनऊ 03 दिसंबर। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, सांसद (राज्यसभा) व पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सुश्री मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बलते हुए कहा है कि जो व्यक्ति बड़े-बड़े पूँजीपतियों व धन्नासेठों का संरक्षक व हितैषी है वह व्यक्ति फकीर कैसे हो सकता है? वैसे भी देश के लोग उनकी जुमलेबाजी से काफी पहले धोखा खा चुके हैं और अब इस प्रकार की प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की जुमलेबाजी नहीं चलने वाली है।
आज यहाँ एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान यह पूछे जाने पर कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मुरादाबाद की अपनी जनसभा में अपने आपको ‘‘फकीर‘‘ बताया है, अपने जवाब में सुश्री मायावती ने कहा कि अब तक का तो अनुभव यही बताता है कि वे जो कहते हैं उसका उल्टा ही करते हैं। इसी कारण वह फकीर नहीं बल्कि मालदार हैं।

मंत्री, रिजर्व बैंक के गर्वनर, वित्त मंत्री व प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अलग-अलग बयान दे रहे हैं
एक अन्य सवाल के जवाब में सुश्री मायावती जी ने कहा कि यह सही है कि नोटबन्दी के मामले को लेकर केन्द्र सरकार के अधिकारी, मंत्री, रिजर्व बैंक के गर्वनर, वित्त मंत्री व प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अलग-अलग बयान दे रहे हैं। इनके बयानों में काफी विरोधाभास है, जिससे भी यह साबित होता है कि 500 व 1000 रुपये की नोटबन्दी का फैसला बिना समुचित तैयारी के व बिना उचित विचार-विमर्श के तथा केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति के लिये लिया गया है। यह एक बहुत बड़ा षड़यन्त्र प्रतीत होता है। रातों-रात नोटबन्दी करके जनता के हित के साथ भारी खिलवाड़ किया गया है। उन्हें कंगाल बनाकर छोड़ दिया गया है। आमजनता की दिक्कतों व परेशानियों का अन्दाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की रैलियों के दौरान नोटबन्दी के लिये बार-बार समर्थन माँगने के बावजूद ज्यादातर लोग खामोश ही रहते है और उनकी हाँ में हाँ नहीं मिलाते हैं।
सुश्री मायावती जी ने एक दूसरे सवाल के जवाब में कहा कि बैंकों में जनधन खाता रखने वालों के एकाउन्ट में जमा धन के समबन्ध में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आज मुरादाबाद की रैली में जो कुछ कहा है उसका वे उल्टा करेंगे और इससे ऐसा लगता है कि वे गरीबों को फायदा कम बल्कि बड़े-बड़े पूँजीपतियों व धन्नासेठों को ही फायदा पहुँचाने के लिये मंथन कर रहे है अर्थात् जैसाकि उन्होंने स्वयं ही कहा है कि वे उस ओर दिमाग लगा रहे हैं।
वास्तव में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सरकार को इस बात का हिसाब देश की गरीब आमजनता को देना चाहिये कि जो हजारों करोड़ का धन बैंकों में जनधन खाता के माध्यम से जमा कराया गया है वह धन कहाँ गया है? उससे किसको लाभ पहुँचाया जा रहा है। कहीं इसका अप्रत्यक्ष लाभ बड़े-बड़े पूँजीपतियों व धन्नासेठों को तो नहीं पहुँचाया जा रहा है?
एक अन्य सवाल के जवाब में सुश्री मायावती जी ने कहा कि नोटबन्दी के मामले में  बी.एस.पी. पूरी तरह से प्रतिपक्षी पार्टियों के साथ हैं, परन्तु हमारे संघर्ष करने का तरीका अलग है।
 

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