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मोदी की पराजय में निर्णायक भूमिका होगी वामदलों की

वाम विरोधी लोग अपने दिलों में बैठे कम्युनिज्म के प्रेत से आतंकित हैं
वाम दलों की कतारें इतनी पुख्ता हैं कि वे न तो नेहरु से हिलीं और न इंदिरा-अटल से हिलीं
जगदीश्वर चतुर्वेदी
देश के सामने केरल का विकास आदर्श विकास रहा है। हर क्षेत्र में केरल ने तरक्की की है। क्या मोदीपंथी केरल का कोई विकल्प दे सकते हैं ?
केरल में भाजपा क्यों सफल नहीं रही ? क्योंकि यह जनविरोधी दल है। देश को विकास के लिए केरल मॉडल चाहिए, गुजरात मॉडल नहीं।
तमाम दोस्त कम्युनिस्टों को मीडिया प्रचार में सक्रिय देखना चाहते हैं। मित्रो, इन दिनों मीडिया में जो जगह खरीद सकता है वह दिखेगा। कम्युनिस्टों की औकात के बाहर है टीवी में लगातार दिखना।
कम्युनिस्टों ने कभी मीडिया पर निर्भर होकर काम नहीं किया, प्रचार नहीं किया। वे फेस टु फेस मिलने और बात करने में विश्वास करते हैं और यह काम वे पश्चिम बंगाल में बेहतर ढंग से कर रहे हैं। यहां पर टीवी चैनलों में उनकी उपस्थिति भी है। क्योंकि वे भी चैनल चलाते हैं। आप भी चाहें तो बांग्ला चैनलों में देख सकते हैं।
कम्युनिस्टों की चिन्ताएं जनता के दिलों में चलती हैं टीवी में नहीं। कम्युनिस्टों से मोदी डरा हुआ है। जिस तरह हिटलर और उसकी फासिस्ट सेना को बोल्शेविक सेना ने हराया था, इस बार के चुनाव में वामदलों की मोदी की पराजय में निर्णायक भूमिका होगी। थोड़ा इंतजार करें। मोदी बाबू नींद की गोली लेकर सोने जा रहे हैं।
देश के मीडिया में कम्युनिस्ट या वामदल गायब हैं। लेकिन फेसबुक पर कम्युनिस्टों को गरियाने वालों की फौज सनसनाती घूम रही है।
अरे भाईयो, जाओ सो जाओ। कम्युनिस्ट तो नहीं आएंगे। वाम विरोधी लोग अपने दिलों में बैठे कम्युनिज्म के प्रेत से आतंकित हैं। कारपोरेट घरानों से लेकर मोदीपंथियों तक वामदलों का भय बैठा हुआ है। यह भय जायज है। वे आ रहे हैं। इसीलिए मोदीपंथी बार-बार कह रहे कम्युनिस्टों का नाश होगा। वे नहीं आएंगे।
लेकिन मुश्किल यह है कि वामदल अच्छी खासी संख्या में लोकसभा में चुनकर आने वाले हैं। कांग्रेस-भाजपा के बाद तीसरे नम्बर पर वाममोर्चा होगा और यह तथ्य है यह भविष्यवाणी नहीं है।
मीडिया और फेसबुक के कम्युनिस्ट विरोधी, कम्युनिस्ट रहित भारतीय संसद का सपना देखना बंद कर दें।
वामदलों की शक्ति मजदूरों-किसानों-छात्रों-युवाओं और महिलाओं के संगठनों में है। उनकी कतारें इतनी पुख्ता हैं कि वे न तो नेहरु से हिलीं और न इंदिरा-अटल से हिलीं। संसद में कम्युनिस्टों की मौजूदगी हमेशा देश के लिए गौरव की बात रही है।
मोदी की तरह किसी भी कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री का शासन कलंकित नहीं रहा।कोई मंत्री करप्ट नहीं था।किसी मंत्री को सजा नहीं हुई। कोई मंत्री दंगाई नहीं हुआ। देश की जनता कम्युनिस्टों पर इसीलिए गर्व करती है। वे जो कहते हैं उसे जीवन में ढालते हैं।

About the author

जगदीश्वर चतुर्वेदी। लेखक प्रगतिशील चिंतक, आलोचक व मीडिया क्रिटिक हैं। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष रहे चतुर्वेदी जी आजकल कोलकाता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं। वे हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

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