मोदी जी ! देश को इंसानी कसाईखाना मत बनाइए

randhir singh suman
randhir singh suman

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की सेंट्रल जेल से भागे सभी आठ कथित सिमी आतंकियों को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया है।

कथित आतंकी सोमवार तड़के जेल में एक प्रधान आरक्षक की हत्या कर जेल से फरार हो गए थे। इसके बाद पुलिस ने इन्हें गुनगा थाना क्षेत्र में ईंटखेड़ी गांव के पास घेर कर एनकाउंटर में ढेर कर दिया।

इन कथित आतंकियों में जाकिर हुसैन सादिक, मोहम्मद सलीक, महबूब गुड्डू, मोहम्मद खालिद अहमद, अकील, अमजद, शेख मुजीब और मजीद शामिल थे। सभी आतंकियों पर 5-5 लाख का इनाम घोषित कर दिया था।

पुलिस के अनुसार सोमवार तड़के साढ़े तीन बजे जेल के बी ब्लॉक में बंद सिमी के आठ आतंकियों ने बैरक तोड़ने के बाद हेड कांस्टेबल रमाशंकर की हत्या कर दी। इसके बाद चादर की मदद से आतंकी दीवार फांदकर फरार हो गए थे।

कारागार में जहाँ कैदी बंद किये जाते हैं, उस कमरे के बाद तीन बड़ी दीवारें होती हैं और हर जगह पहरा होता है। शाम को जब एक बार कैदी बैरक के अन्दर बंद कर दिया जाता है, तो सुबह ही बैरक खोला जाता है, इसलिए वार्डन की हत्या कर कैदियों का भाग जाना कहीं से भी संभव नहीं प्रतीत होता है। जिसकी पुष्टि ईंटखेड़ी गांव के प्रत्यक्षदर्शियों ने आईबीसी 24 चैनल को बताया कि उन लोगों ने कुछ लोगों को भागते हुए देखा था। जब उनलोगों ने उसे रोकने की कोशिश की तो आतंकी उन पर रोड़े बरसाने लगे। इसके तुरंत बाद गांववालों ने पुलिस को इसकी सूचना दी। मौके पर तुरंत पहुंची पुलिस ने थोड़ी ही देर में एनकाउंटर में इन सभी आतंकियों को मार गिराया।

विशेष बात यह भी है कि घटनास्थल पर कोई असलहा कथित आतंकवादियों के पास से नहीं पाया गया है।

भोपाल में सिमी के कैदियों को एनकाउंटर में मार गिराने की बात तथ्यों के विपरीत होने के कारण फर्जी मुठभेड़ है, इसकी जांच कराए जाने की आवश्यकता है। यह जेल से निकाल हत्या है।

भोपाल सेंट्रल जेल देश के चुनिंदा आधुनिक अति सुरक्षित जेलों मे माना जाता तो ऐसे कैसे हो गया कि 8 बन्दी एक गार्ड का मर्डर भी कर देते हैं और फिर भाग भी जाते हैं और किसी को कानो कान खबर भी नहीं हुई ?

 ये कि जेल से भागने के 10 घंटे बाद भी आठों बंदी 10 किलोमीटर भी नहीं भाग पाये और एक साथ एक जगह छिपे रहे ? 

मध्यप्रदेश सरकार के गृह मंत्री कहते हैं कि फरार कैदियों के पास कोई हथियार नही था, तो पुलिस के आला अधिकारी कह रहे हैं कि वो हथियारों से लैस थे और उन्होंने पुलिस पे फायर किये जिसके बदले में पुलिस ने उन्हें मार गिराया।
उपरोक्त परिस्थितियां इस बात को और बल देती हैं कि एनकाउंटर फ़र्ज़ी है।
ऐसे क्या हालात पैदा हो गए कि पुलिस को आठों कैदियों को जान से मारना पड़ा? क्या उनमें से कोई ज़िंदा नही पकड़ा जा सकता था ?

दिल्ली से अलका लांबा ने ट्वीट कर कहा है कि-
पहले आठ आतंकियों का भागा जाना और फिर एनकाउंटर में एक साथ मारे जाना। इसके लिए मप्र सरकार के पास ‘व्यापमं’ फार्मूला था।

वहीं भारतीय क्म्युनिस्ट पार्टी के उत्तर प्रदेश के सचिव डॉ. गिरीश ने फेसबुक पर लिखा है एक को भी जिन्दा न पकड़ पाना और जेल से भाग जाने देना भी बहादुरी है और देशभक्ति भी।  

जेल के अन्दर से अगर निकाल कर मुठभेड़ के नाम पर हत्याएं की जा रही हैं तो यह सब संघ परिवार के घिनौने चहरे को प्रदर्शित करती हैं। प्रधानमंत्री से कहना चाहूँगा कि आप संघ के प्रचारक अवश्य रहे हैं लेकिन देश के प्रधानमंत्री भी हैं और इस तरह की कार्यवहियाँ देश को इंसानी कसाईखाने के रूप में तब्दील कर रही हैं। इससे देश का चेहरा बदरंग हो रहा है।

रणधीर सिंह सुमन

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