Home » मोदी हैं मनमोहन के सच्चे वारिस, इनका भी हश्र मनमोहन जैसा होगा

मोदी हैं मनमोहन के सच्चे वारिस, इनका भी हश्र मनमोहन जैसा होगा

कारपोरेट बनाम आम आदमी के बीच है आम चुनाव
अनपरा और दुद्धी में हुई आइपीएफ प्रत्याशी एस0 आर0 दारापुरी की आमसभाएं
अनपरा (सोनभद्र) 10 मई 2014, मोदी मनमोहन की अमेरीकापरस्त, कारपोरेटपरस्त नीतियों को ही आगे बढ़ाने का काम करेंगे और बैंक, बीमा, सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण, किसानी के कारपोरेटीकरण जैसे जो काम जनांदोलन के दबाब में मनमोहन नहीं कर सके उन कामों को मोदी के द्वारा पूरा कराने के लिए उसे मसीहा बनाने में देश का कारपोरेट घराना लगा हुआ है। इस मायने में दल भले ही अलग हो मोदी मनमोहन के ही सच्चे वारिस हैं और इनका भी हश्र वहीं होगा जो मनमोहन का हुआ है। इस आम चुनाव में जनविरोधी नीतियों के दुष्परिणामों के कारण अन्य की बात छोड़ दें काग्रेसी भी मनमोहन का नाम लेने से परहेज कर रहे हैं।
यह बातें अनपरा के काशी तिराहे और दुद्धी के क्रिकेट मैदान पर आइपीएफ के राबर्ट्सगंज संसदीय क्षेत्र से प्रत्याशी पूर्व आई0 जी0 एस0 आर0 दारापुरी के लिए आमसभा को सम्बोधित करते हुए आल इण्डिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय संयोजक अखिलेन्द्र प्रताप सिंह ने कहीं। उन्होंने कहा कि यह आम चुनाव कारपोरेट बनाम आम आदमी के बीच है। भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा जैसे दलों के बीच नीतियों का फर्क खत्म हो गया है। सभी कारपोरेट हितों को पूरा करने वाली विश्व बैंक और आई0 एम0 एफ0 द्वारा तय नीतियों को ही लागू करने की होड़ में लगे है। सुशासन और विकास को जो नारा आज चौतरफा दिया जा रहा है वह भी विश्व बैंक द्वारा बनाया गया है। जिस मोदी सरकार के गुजरात माडल के कथित सुशासन को पूरे देश में लागू करने का प्रचार युद्ध छेड़ा गया है और जिसके लिए अब तक दस हजार करोड़ रूपए से ज्यादा खर्च कर दिए गए। उसका सच यह है कि वह मानव विकास सूचकांक के लिहाज से बेहद पिछड़ा हुआ है, वहां हर तीसरा बच्चा कुपोषित है, आदिवासी इलाकों में शुद्ध पीने का पानी तक नहीं है और महिलाओं विशेषकर दलित व आदिवासी महिलाएं एनिमिया का शिकार है, वहां दो लाख से ज्यादा वनाधिकार कानून के दावे खारिज कर दिए गए। वहीं अडाणी को एक रूपए की दर से लाखों एकड़ जमीन दे दी गयी और टाटा के नैनों कारखाने के लिए 0.01 प्रतिशत की ब्याज दर पर 9570 करोड़ रूपया कर्जा दे दिया गया। उन्होंने कहा कि इस चुनाव में आइपीएफ कारपोरेटपरस्त नीतियों के बरखिलाफ जनपक्षधर नीतियों को जनता के सामने लाने में सफल हुआ है जिन पर आने वाले समय में देश की सभी प्रगतिशील ताकतों को लेकर पूरे देश में आंदोलन तेज किया जायेगा।
आइपीएफ के प्रत्याशी पूर्व आई0 जी0 एस0 आर0 दारापुरी ने कहा कि डा0 अम्बेडकर कहते थे राजनीतिक दल का मकसद सिर्फ चुनाव जीतना ही नहीं होता उसे जनता की चेतना को विसित करने काम करना चाहिए। इस चुनाव में जाति, धर्म और गालीगलौज की ओछी राजनीति के बरखिलाफ जनमुद्दों को सामने लाकर हम इस काम को करने में सफल हुए हैं। उन्होंने मतदाताओं से जमीन के अधिकार, इस क्षेत्र के विकास के लिए विशेष पैकेज देने, ठेका मजदूरों के नियमितिकरण व वेतनमान, स्थानीय नौजवानों को रोजगार समेत तमाम जन मुद्दों के लिए कैमरा वाला बटन दबाने की अपील की।
आमसभा को आइपीएफ के संगठन प्रभारी दिनकर कपूर, वर्कर्स फ्रंट के महामंत्री राजेश सचान, सीआईटीयू जिलाध्यक्ष व सीपीएम नेता का0 अवधराज सिंह, ठेका मजदूर यूनियन के जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र पाल, नौजवान सभा के जिलाध्यक्ष शिव प्रसाद उपाध्याय, रमेश सिंह खरवार, प्रमोद चैबे, मोहम्मद रउफ, तेजधारी गुप्ता, कन्हैया गुप्ता आदि ने सम्बोधित किया और संचालन शम्भूनाथ गौतम ने किया।

About हस्तक्षेप

Check Also

भारत में 25 साल में दोगुने हो गए पक्षाघात और दिल की बीमारियों के मरीज

25 वर्षों में 50 फीसदी बढ़ गईं पक्षाघात और दिल की बीमांरियां. कुल मौतों में से 17.8 प्रतिशत हृदय रोग और 7.1 प्रतिशत पक्षाघात के कारण. Cardiovascular diseases, paralysis, heart beams, heart disease,

Bharatendu Harishchandra

अपने समय से बहुत ही आगे थे भारतेंदु, साहित्य में भी और राजनीतिक विचार में भी

विशेष आलेख गुलामी की पीड़ा : भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रासंगिकता मनोज कुमार झा/वीणा भाटिया “आवहु …

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा: चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा : चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश Occupy national institutions : …

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

अच्छे नहीं, अंधेरे दिनों की आहट

मोदी सरकार के सत्ता में आते ही संघ परिवार बड़ी मुस्तैदी से अपने उन एजेंडों के साथ सामने आ रहा है, जो काफी विवादित रहे हैं, इनका सम्बन्ध इतिहास, संस्कृति, नृतत्वशास्त्र, धर्मनिरपेक्षता तथा अकादमिक जगत में खास विचारधारा से लैस लोगों की तैनाती से है।

National News

ऐसे हुई पहाड़ की एक नदी की मौत

शिप्रा नदी : पहाड़ के परम्परागत जलस्रोत ख़त्म हो रहे हैं और जंगल की कटाई के साथ अंधाधुंध निर्माण इसकी बड़ी वजह है। इस वजह से छोटी नदियों पर खतरा मंडरा रहा है।

Ganga

गंगा-एक कारपोरेट एजेंडा

जल वस्तु है, तो फिर गंगा मां कैसे हो सकती है ? गंगा रही होगी कभी स्वर्ग में ले जाने वाली धारा, साझी संस्कृति, अस्मिता और समृद्धि की प्रतीक, भारतीय पानी-पर्यावरण की नियंता, मां, वगैरह, वगैरह। ये शब्द अब पुराने पड़ चुके। गंगा, अब सिर्फ बिजली पैदा करने और पानी सेवा उद्योग का कच्चा माल है। मैला ढोने वाली मालगाड़ी है। कॉमन कमोडिटी मात्र !!

Entertainment news

Veda BF (वेडा बीएफ) पूर्ण वीडियो | Prem Kahani – Full Video

प्रेम कहानी - पूर्ण वीडियो | वेदा BF | अल्ताफ शेख, सोनम कांबले, तनवीर पटेल और दत्ता धर्मे. Prem Kahani - Full Video | Veda BF | Altaf Shaikh, Sonam Kamble, Tanveer Patel & Datta Dharme

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: