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राजस्थान सरकार का दलितों को तोहफा-अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी बंद !

Is it a gift given to the Dalits by the BJP government of the state on completion of two years of the government?

एक तरफ केंद्र की भाजपा सरकार संविधान निर्माता बाबा साहब अम्बेडकर की 125वीं जयंती का समारोह (Celebration of 125th birth anniversary of the constitution builder Baba Saheb Ambedkar) मना रही है, वहीं दूसरी तरफ राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने अम्बेडकर के नाम पर स्थापित विधि विश्वविद्यालय को बंद करने का निर्णय ले लिया है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह सरकार के दो साल पूरे होने पर राज्य सरकार द्वारा दलितों को दिया गया तोहफा है ?

राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्रसिंह राठौड़ ने विगत दिनों हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद खबरनवीसों को बताया था कि राज्य सरकार ने डॉ भीमराव अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी को बंद करके इसके स्थान पर जयपुर में ‘अम्बेडकर पीठ – सेंटर फॉर एक्सीलेंस’ का गठन करने का निर्णय लिया है।

During the rule of Ashok Gehlot, Ambedkar Law University was established

राठौड़ ने इस फैसले का औचित्य बताते हुए कहा कि वर्ष 2012 -13 में अशोक गहलोत के शासन काल में अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी स्थापित की थी, मगर पूर्ववर्ती सरकार ने किसी भी प्रकार की वित्तीय व्यवस्था नहीं की, ना शैक्षणिक अनुभाग खोले, ना फैकल्टी नियुक्त की, ना भूमि आवंटित की गई और ना ही प्रवेश सम्बन्धी कार्यवाही की गयी। सिर्फ कागजों में ही विश्वविद्यालय खोल दिया गया और कुलपति की भी नियुक्ति कर दी गई। इसलिये इस कागजी विश्वविद्यालय को बंद करके अम्बेडकर पीठ स्थापित करने का राज्य मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है।

राज्य सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि राज्य सरकार गलतबयानी करके लोगों को गुमराह कर रही है। उनकी सरकार ने डॉ. अम्बेडकर के नाम पर यह विश्वविद्यालय स्थापित किया था और जरूरी संसाधन भी उपलब्ध करवाए थे। अगर कहीं कोई कमी भी रह गई थी तो इस सरकार को भी दो साल का वक़्त मिला, जिसमें वित्तीय, शैक्षणिक, फैकल्टी लगाने जैसी निरंतर प्रक्रियाओं की पालना करवाई जा सकती थी और यूनिवर्सिटी को मज़बूत बनाया जा सकता था, मगर यह सरकार चाहती ही नहीं है कि संविधान निर्माता अम्बेडकर के नाम पर कोई विश्वविद्यालय काम करे, इसलिये डॉ. अम्बेडकर युनिवर्सिटी को बंद कर उसकी जगह एक सेंटर खोला जा रहा है।

भाजपा सरकार का दलित विरोधी रवैया सामने आ गया है -अशोक गहलोत

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की तथा कहा कि एक ओर तो सरकार अम्बेडकर के नाम पर शुभकामनायें दे रही है, दूसरी ओर उनके नाम को ही मिटाने की कोशिश कर रही है, इससे भाजपा सरकार का दलित विरोधी रवैया सामने आ गया है

गहलोत के बोलने के बाद राज्य के दलित संगठनों की भी नींद खुली तथा देर से ही सही मगर राज्य भर में राजस्थान सरकार के इस निर्णय की चौतरफा आलोचना शुरू हो गयी। हालाँकि आश्चर्यजनक रूप से दलित बहुजनों की राजनीति करने वाले दल एवं संगठन अभी भी मौन हैं। बसपा हो अथवा भाजपा का अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ, दोनों ही समान रूप से चुप हैं। ख़ामोशी तो कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग ने भी अख्तियार की हुयी है, उसकी ओर से कोई बयान तक इस विषय पर नहीं आना जनचर्चा का विषय है।

हालाँकि कुछ दलित और मानव अधिकार संगठनों ने इस मुद्दे पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाये हैं, मगर देखा जाये तो अम्बेडकर यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए सबसे दमदार आवाज़ पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य के जनप्रिय नेता अशोक गहलोत की रही, उन्होंने ही सबसे पहले वसुंधरा सरकार के अम्बेडकर यूनिवर्सिटी बंद करने के निर्णय पर तुरंत प्रतिक्रिया दी तथा कहा कि वसुंधरा सरकार अम्बेडकर के नाम पर खड़ी की गयी विरासत के साथ खिलवाड़ कर रही है।

डॉ भीमराव अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी बंद करने के फैसले पर दलित संगठनों ने सरकार को चेताया

राजस्थान सरकार के डॉ भीमराव अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी बंद करने के फैसले को अदूरदर्शी और तानाशाहीपूर्ण बताते हुये कई दलित संगठनों ने सरकार को चेताया है कि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी को बंद नहीं करें वर्ना राज्य व्यापी आन्दोलन चलाया जायेगा। इसकी प्रथम कड़ी में विभिन्न जिलों में इसे लेकर ज्ञापन भी दिये गये हैं। यह भी योजना बनाई गयी है कि 6 दिसम्बर को अम्बेडकर के 59वें महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर राज्य भर में होने वाले समारोहों में राज्य शासन के इस अम्बेडकर विरोधी निर्णय का विरोध किया जायेगा।

अब देखना यह है कि अम्बेडकर के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें कर रही भारतीय जनता पार्टी की राज्य सरकार अपना फैसला बदलती है या अपनी आदत के मुताबिक वह यह फैसला भी अपरिवर्तनीय  ही बनाये रखेगी, भले ही उस पर दलित विरोधी होने का कितना ही आरोप क्यों ना लगा दिया जाये।

–  भंवर मेघवंशी

( लेखक स्वतंत्र पत्रकार है )

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