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राष्ट्रवाद की अवधारणा और ऐतिहासिक समझ की भूल

राष्ट्रवाद की अवधारणा

कुछ मित्र भाजपा और आरएसएस के साम्प्रदायिक दृष्टिकोण से परेशान होकर यह मान बैठते हैं कि यह दल राष्ट्रवादी है और इसलिए राष्ट्रवाद को ही कोसने लगते हैं।

यह एक ऐतिहासिक समझ की भूल है।

The concept of nationalism in India is a positive political concept.

भारत में राष्ट्रवाद की अवधारणा एक सकारात्मक राजनीतिक अवधारणा है।

दुर्भाग्य से राष्ट्रवाद के एजेंडे को हिन्दू साम्प्रदायिकों ने हथिया लिया और धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील दलों ने भी राष्ट्रवाद को मात्र बुर्जुवा प्रतीक मानकर इसकी अनदेखी की।

कुछ विद्वान् जो विदेशी विश्वविद्यालयों को ध्यान में रखकर ही लिखते हैं और शाब्दिक मायाजाल को ही विद्वता समझते हैं, उन्होंने हिन्दू राष्ट्रवाद या मुस्लिम राष्ट्रवाद शब्द गढ़ दिए। जबकि वास्तव में यह हिन्दू या मुस्लिम साम्प्रदायिकता ही थी।

अब भी समय है। हमें राष्ट्रवाद की महत्ता से इनकार बहुत महँगा पड़ेगा, अगर न चेते तो।

आलोक वाजपेयी

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आलोक वाजपेयी, लेखक एक इतिहासकार एवं राजनीतिक टिप्पणीकार हैं

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