Home » राहुल के पास कार्यकर्ताओं से मिलने का समय नहीं- हरक सिंह रावत का आरोप

राहुल के पास कार्यकर्ताओं से मिलने का समय नहीं- हरक सिंह रावत का आरोप

Rahul did not have time to meet to party workers- Harak Singh Rawat
नई दिल्ली, 22 मार्च। उत्तराखंड की हरीश रावत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के खिलाफ बगावत की अगुवाई कर रहे पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए आज कहा कि उनके पास राजद्रोह का आरोप झेल रहे जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार से मिलने का समय है लेकिन ‘हमसे बात करने की फुर्सत नहीं है।
एक न्यूज चैनल से बातचीत में श्री रावत ने कहा कि उन्होंने पार्टी आलाकमान से कई बार से मिलने का समय मांगा लेकिन उन्हें समय नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा,

“श्री गांधी के पास कन्हैया से मिलने का समय है लेकिन हमसे बात करने की फुर्सत नहीं।“

Singh rawat

About हस्तक्षेप

Check Also

भारत में 25 साल में दोगुने हो गए पक्षाघात और दिल की बीमारियों के मरीज

25 वर्षों में 50 फीसदी बढ़ गईं पक्षाघात और दिल की बीमांरियां. कुल मौतों में से 17.8 प्रतिशत हृदय रोग और 7.1 प्रतिशत पक्षाघात के कारण. Cardiovascular diseases, paralysis, heart beams, heart disease,

Bharatendu Harishchandra

अपने समय से बहुत ही आगे थे भारतेंदु, साहित्य में भी और राजनीतिक विचार में भी

विशेष आलेख गुलामी की पीड़ा : भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रासंगिकता मनोज कुमार झा/वीणा भाटिया “आवहु …

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा: चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा : चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश Occupy national institutions : …

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

अच्छे नहीं, अंधेरे दिनों की आहट

मोदी सरकार के सत्ता में आते ही संघ परिवार बड़ी मुस्तैदी से अपने उन एजेंडों के साथ सामने आ रहा है, जो काफी विवादित रहे हैं, इनका सम्बन्ध इतिहास, संस्कृति, नृतत्वशास्त्र, धर्मनिरपेक्षता तथा अकादमिक जगत में खास विचारधारा से लैस लोगों की तैनाती से है।

National News

ऐसे हुई पहाड़ की एक नदी की मौत

शिप्रा नदी : पहाड़ के परम्परागत जलस्रोत ख़त्म हो रहे हैं और जंगल की कटाई के साथ अंधाधुंध निर्माण इसकी बड़ी वजह है। इस वजह से छोटी नदियों पर खतरा मंडरा रहा है।

Ganga

गंगा-एक कारपोरेट एजेंडा

जल वस्तु है, तो फिर गंगा मां कैसे हो सकती है ? गंगा रही होगी कभी स्वर्ग में ले जाने वाली धारा, साझी संस्कृति, अस्मिता और समृद्धि की प्रतीक, भारतीय पानी-पर्यावरण की नियंता, मां, वगैरह, वगैरह। ये शब्द अब पुराने पड़ चुके। गंगा, अब सिर्फ बिजली पैदा करने और पानी सेवा उद्योग का कच्चा माल है। मैला ढोने वाली मालगाड़ी है। कॉमन कमोडिटी मात्र !!

media

82 हजार अखबार व 300 चैनल फिर भी मीडिया से दलित गायब!

मीडिया के लिये भी बने कानून- उर्मिलेश 82 thousand newspapers and 300 channels, yet Dalit …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: