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लखनऊ पहुँच कर हाँफने लगा तीसरा मोर्चा, भाकपा लड़ेगी 8 सीटों पर

भाकपा राज्य काउन्सिल की बैठक सम्पन्न- कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये।
लखनऊ- 14, मार्च 2012- दिल्ली से चला तीसरा मोर्चा उर्फ फर्स्ट फ्रंट लखनऊ पहुँचते-पहुँचते हाँफने लगा है। मुलायम सिंह यादव को प्रधानमंत्री बनाए जाने के प्रकाश कारत और ए बी वर्द्धन के एजेंडे को भाकपा की उत्तर प्रदेश इकाई ने धता बता दी है। पार्टी सूबे की आठ सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुकी है। ऐसे में जाहिर है कि सपा, भाकपा के लिए आठ सीटें तो समझौते में छोड़ने से रही। फिर मुलायम पीएम कैसे बनेंगे और कैसे चलेगा तीसरा मोर्चा, यह अहम सवाल उठ खड़ा हुआ है?
दरअसल भाकपा की उ.प्र. इकाई लंबे समय़ से मुलायम सिंह और समाजवादी पार्टी का विरोध करती रही है। डॉ. गिरीश के राज्य सचिव बनने के साथ ही पार्टी ने अपने पैरों पर खड़े होने और पार्टी का पुराना गौरव पाने की ठान ली। जबकि माकपा महासचिव प्रकाश कारत और भाकपा के पूर्व महासचिव ए.बी. बर्द्धन मुलायम सिंह यादव की पालकी ढोने की कसरतें ही करते रहे हैं। पिछले दिनों इस मसले पर भाकपा और माकपा के बीच सूबे में संबंध भी खराब हो गये थे। पिछले वर्ष के अंत में भाकपा ने लगभग दो दशक बाद लखनऊ में बड़ी रैली की और अपनी खोई हुई ताकत पुनः दिखाने का प्रयास किया। मित्रसेन यादव के जरिए भाकपा को सूबे में हजम कर जाने की मुलायम की हरकत के बाद यह पहला अवसर था जब भाकपा मजबूती के साथ न केवल सड़कों पर उतरी बल्कि मुलायम सिंह के बेटे की सरकार के खिलाफ मोर्चा भी खोल दिया। उसके तुरंत बाद माकपा ने इंडियन पीपुल्स फ्रंट और राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ मिलकर लखनऊ में रैली की। लेकिन यह रैली बुरी तरह फ्लॉप रही। रैली में एक बड़ी नुक्कड़ सभा में बदलकर रह गयी, वह भी आइपीएफ ने अपने कार्यकर्ता जुटाकर इस रैली की लाज रख ली। मजे की बात यह रही कि इस रैली में प्रकाश कारत, मोदी और भाजपा पर तो बरसते रहे लेकिन मुलायम सिंह और सपा का बचाव करते रहे। लेकिन आइपीएफ के अखिलेंद्र प्रताप सिंह ने सपा सरकार को आड़े हाथों लिया। महत्वपूर्ण बात यह रही कि माकपा प्रायोजित इस रैली में भाकपा नेताओं को आमंत्रण नहीं दिया गया और हाल ही में राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सर्वेसर्वा कौशल किशोर भगवा रंग में रंग गए।
इसी उठापटक के बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की उत्तर प्रदेश राज्य काउन्सिल की दो दिवसीय बैठक लखनऊ में सम्पन्न हो गयी। बैठक में भाकपा द्वारा लड़ी जा रही आठ लोक सभा सीटों पर चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की गयी और जनता से चुनाव फंड एकत्रित करने का निर्णय लिया गया तथा इन सीटों पर शीघ्र से शीघ्र कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही वामदलों के साथ अधिक से अधिक सहमति बनाने को सघन प्रयास करने का निर्णय भी लिया गया।
बैठक में देश और प्रदेश के मौजूदा हालात पर चर्चा करते हुये पार्टी के राज्य सचिव डॉ. गिरीश ने कहा कि देश इस समय अभूतपूर्व राजनैतिक एवं आर्थिक संकटों से जूझ रहा है। केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा अपनायी जा रही नीतियों से आम जनता बेहद कठिनाइयों का सामना कर रही है। जनता कमरतोड़ महंगाई, शासन- प्रशासन में दीमक की तरह घुस चुके भ्रष्टाचार, निरंतर बढ़ रही महंगाई, महंगे इलाज और महंगी पढ़ाई की मार से जूझ रही है। सत्ता में बैठे पूंजीवादी दलों से जनता आजिज आ गयी है और वह उसका विकल्प चाहती है।
बाद में एक वक्तव्य में डॉ. गिरीश ने कहा कि जनता के गहरे आक्रोश को भांपते हुये ये पार्टियाँ उसको गुमराह करने को हर तरह के हथकंडे अपना रही हैं। कांग्रेस अपनी उपलब्धियों का झूठा ढिंढोरा पीट रही है। भाजपा फिर से अपने चिर परिचित सांप्रदायिक औजारों को पैना कर रही है। उसने मुजफ्फर नगर और उसके अगल-बगल के जिलों को साम्प्रदायिकता की प्रयोगशाला बनाया और सैकड़ों लोगों की हत्याएं वहां कराई गयीं। वे नारा दे रहे हैं- उत्तर प्रदेश गुजरात बनेगा। वे गुजरात के विकास के फर्जी आंकड़े प्रस्तुत कर रहे हैं।
डॉ. गिरीश ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले दो सालों में प्रदेश का राजनैतिक ढांचा पूरी तरह चरमरा गया और आम आदमी का जीवन दूभर होगया। यहाँ तक कि राज्य सरकार सांप्रदायिक वारदातों को रोकने के बजाय वोट की राजनीति करते नजर आयी। सूबे का मुख्य विपक्षी दल बसपा है जो कभी भी जनता के सवालों पर आवाज नहीं उठाता। वे वोट के लिए केवल और केवल जातीय समीकरण साधने में लगे रहते हैं। प्रदेश की जनता अपने जीवन से जुड़े कठिन सवालों का हल चाहती है लेकिन ये सारे दल मुद्दों से दूर भाग रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वह केवल वामपंथ है जो जनता के ज्वलंत सवालों- महंगाई, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगी शिक्षा महंगे इलाज और किसान कामगारों की जिन्दगी में रोशनी लाने वाले सवालों पर निरंतर आवाज उठा रहा है और सांप्रदायिक और विभाजनकारी अन्य ताकतों को कड़ी चुनौती देता रहा है।
डॉ. गिरीश ने कहा, “हम इन्हीं सवालों को लेकर चुनाव अभियान चलाएंगे। हम जनता से अपील करेंगे कि वह मुद्दों पर आधारित राजनीति को बल प्रदान करे और वामपंथी दलों को आगे बढ़ाये। उन्होंने भाकपा कार्यकर्ताओं और नेताओं से अपील की कि वे भाकपा प्रत्याशियों की सफलता के लिए पूरी ताकत से जुट जायें।“
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि भाकपा को अपना चुनावी अभियान जनता के सहयोग से चलाना है माफिया दलाल और शोषकों के धन से नहीं। इसके लिए जनता के बीच जाकर चुनाव फंड एकत्रित करने का निर्णय भी लिया गया।
बैठक में बुन्देलखण्ड पश्चिमी उत्तर प्रदेश मध्य उत्तर प्रदेश एवं पूर्वांचल में ओलों एवं वारिश से फसलों के हुये भारी नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की गयी। एक प्रस्ताव पास कर राज्य सरकार और केंद्र सरकार से मांग की गयी कि वह फसलों की हानि की शत-प्रतिशत भरपाई तत्काल करे। निर्वाचन आयोग से भी मांग की गयी कि वह केंद्र और राज्य सरकार को किसानों को तत्काल आर्थिक पैकेज उपलब्ध कराने का निर्देश जारी करे।
बैठक की अध्यक्षता अशोक मिश्र ने की। बैठक को पूर्व विधायक इम्तियाज़ अहमद, एटक के प्रांतीय अध्यक्ष एवं सचिव अरविन्द राज स्वरूप व सदरुद्दीन राना, महिला फेडरेशन की महासचिव आशा मिश्रा आदि ने भी सम्बोधित किया।

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