Home » वाह रे अय्यर

वाह रे अय्यर

नई दिल्ली। प्रोफ़ेसर चमन लाल की गणना स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों पर गम्भीर काम करने स्कॉलर्स में होती है। उधर पूर्व नौकरशाह और कांग्रेस के भौंपू सांसद मणिशंकर अय्यर पढ़े लिखे राजनेताओं में शुमार किए जाते हैं लेकिन एक घटना के बाद अय्यर का जो रूप सामने आया है वह हैरान करने वाला है।
दरअसल प्रोफ़ेसर चमन लाल ने अय्यर को अपनी लिखी शहीद भगत सिंह पर किताब भेंट की थी। कुछ दिनों के बाद यही किताब दरिया गंज में पुरानी किताबों की एक दुकान से इसी किताब को साहित्य अकादमी परुस्कार से सम्मानित वयोवृद्ध उर्दू लेखक बलराज मैनरा ने खरीदी। मंटो साहित्य पर काम करने वाले शरद दत्त ने प्रोफसर चमन लाल को इस बाबत खबर दी कि उक्त किताब मैनरा साहब ने मात्र 25 रुपये में खरीदी थी।
भारत के शासक वर्ग द्वारा भगत सिंह के प्रति यह तिरस्कार की भावना गाँधी से लेकर मणि शंकर अय्यर तक आखिर क्या दर्शाती है इसे बताने/समझाने की जरूरत नहीं। इस बावत प्रोफ़ेसर चमन लाल ने मणिशंकर अय्यर को पत्र लिखते हुए अपनी फेसबुक वॉल पर स्टेटस डाला है- जो इस प्रकार है-
 “I wish to share a mail I sent to Mani Shankar Aiyar Congress MP. Since he is very vocal against communal forces and also in favor of Indo-Pak peaceful and friendly relations, I held him in respect for that and in that respect at one of meetings in India International Centre Delhi, I gifted him the copy of my new book on Bhagat Singh-Understanding Bhagat Singh, whose printed price in paperback edition is 250/ rupees. I got a phone call from my friend Sharad Dutt, editor of Manto’s complete works in Hindi just two days ago, that his friend and Sahitya Akademi award winner Urdu writer Balraj Mainra, who despite his 80 year old age goes to Sunday old books market in Daryaganj Delhi every week and gets wonderful books at very cheap rates. In one of these visits recently, he bought this book gifted to Mani Shankar in just 25/rupees, he was happy and liked the book very much, which he conveyed to me as well. For me it was a lesson, though interesting incident that very few politicians in bourgeois politics have any respect for books or Bhagat Singh. I sent a mail to Mani Shankar Aiyar, which I am sharing with my friends and followers here:
Dear Mani Shankar ji,
You must not be remembering that in one of India International Centre meetings, I gifted you this book, whose review was published in The Hindu with given link.It was interesting for me to know that one of celebrated Sahitya Akademi award winner writer got that gifted book with your name on it from old books Sunday market of Daryaganj in just 25/ rupees, ten times less that the printed price of the book!. I don’t know whether you read that book or not, as I gifted you this in regard for your strong stand against Communalism and equally strong faith in secularism, but Balraj Mainra has read it with pleasure. At least through you the book got an avid reader, who got the book heavily subsidized.
Thanks
Chaman Lal
http://www.thehindu.com/books/books-reviews/the-meditative-revolutionary/article5494133.ece “

About हस्तक्षेप

Check Also

भारत में 25 साल में दोगुने हो गए पक्षाघात और दिल की बीमारियों के मरीज

25 वर्षों में 50 फीसदी बढ़ गईं पक्षाघात और दिल की बीमांरियां. कुल मौतों में से 17.8 प्रतिशत हृदय रोग और 7.1 प्रतिशत पक्षाघात के कारण. Cardiovascular diseases, paralysis, heart beams, heart disease,

Bharatendu Harishchandra

अपने समय से बहुत ही आगे थे भारतेंदु, साहित्य में भी और राजनीतिक विचार में भी

विशेष आलेख गुलामी की पीड़ा : भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रासंगिकता मनोज कुमार झा/वीणा भाटिया “आवहु …

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा: चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश

राष्ट्रीय संस्थाओं पर कब्जा : चिंतन प्रक्रिया पर हावी होने की साजिश Occupy national institutions : …

News Analysis and Expert opinion on issues related to India and abroad

अच्छे नहीं, अंधेरे दिनों की आहट

मोदी सरकार के सत्ता में आते ही संघ परिवार बड़ी मुस्तैदी से अपने उन एजेंडों के साथ सामने आ रहा है, जो काफी विवादित रहे हैं, इनका सम्बन्ध इतिहास, संस्कृति, नृतत्वशास्त्र, धर्मनिरपेक्षता तथा अकादमिक जगत में खास विचारधारा से लैस लोगों की तैनाती से है।

National News

ऐसे हुई पहाड़ की एक नदी की मौत

शिप्रा नदी : पहाड़ के परम्परागत जलस्रोत ख़त्म हो रहे हैं और जंगल की कटाई के साथ अंधाधुंध निर्माण इसकी बड़ी वजह है। इस वजह से छोटी नदियों पर खतरा मंडरा रहा है।

Ganga

गंगा-एक कारपोरेट एजेंडा

जल वस्तु है, तो फिर गंगा मां कैसे हो सकती है ? गंगा रही होगी कभी स्वर्ग में ले जाने वाली धारा, साझी संस्कृति, अस्मिता और समृद्धि की प्रतीक, भारतीय पानी-पर्यावरण की नियंता, मां, वगैरह, वगैरह। ये शब्द अब पुराने पड़ चुके। गंगा, अब सिर्फ बिजली पैदा करने और पानी सेवा उद्योग का कच्चा माल है। मैला ढोने वाली मालगाड़ी है। कॉमन कमोडिटी मात्र !!

media

82 हजार अखबार व 300 चैनल फिर भी मीडिया से दलित गायब!

मीडिया के लिये भी बने कानून- उर्मिलेश 82 thousand newspapers and 300 channels, yet Dalit …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: